अखिलेश यादव : ‘हमने जिन शिक्षामित्रों को शिक्षा के क्षेत्र में रोजगार दिया, भाजपा ने उन्हें आत्महत्या करने पर मजबूर किया’

उत्तर प्रदेश में एक तरफ शिक्षामित्र लगातार कई महीनों से आंदोलित हैं, वहीं दूसरी तरफ इस मुद्दे पर सियासत भी खूब हो रही है. बुधवार को समायोजन रद्द होने के एक साल के अवसर पर शिक्षामित्रों ने लखनऊ में काला दिवस के रूप में मनाया और कई महिलाओं ने मुंडन कराकर अपना विरोध दर्ज कराया. वहीं इस ‘मुंडन विरोध’ पर समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने योगी सरकार पर ट्वीट कर हमला किया है.

अखिलेश ने लिखा है कि हमने जिन शिक्षामित्रों को शिक्षक बना कर रोजगार व शिक्षातंत्र को सशक्त किया था, उन्हें भाजपा ने आत्महत्या करने पर मजबूर कर दिया है. आंदोलन की बरसी पर महिला- पुरुष शिक्षामित्रों का केश त्यागना वस्तुत: भाजपा में विश्वास का भी त्याग है. शिक्षामित्रों के हर संघर्ष में समाजवादी साथ हैं.

दरअसल बुधवार को समायोजन रद्द होने के एक साल के अवसर पर शिक्षामित्र काला दिवस के रूप में मना रहे हैं. राजधानी लखनऊ में शिक्षामित्रों का समायोजन रद्द करने के विरोध में सैकड़ों शिक्षामित्र महिलाओं ने मुंडन करवाया. उनकी मांग है कि शिक्षामित्र मृतकों के परिजनों को आर्थिक सहायता प्रदान की जाए और परिवार के एक सदस्य को नौकरी दी जाए.

बता दें, 5 जुलाई 2017 को सुप्रीम कोर्ट ने यूपी के प्राथमिक स्कूलों में सहायक अध्यापक बनाए गए 1.70 लाख शिक्षामित्रों के समायोजन को असंवैधानिक करार दिया था. सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद लाखों शिक्षामित्र निराश हुए थे. सैकड़ों शिक्षामित्रों ने आत्महत्या कर ली थी. फैसले के बाद लखनऊ के लक्ष्मण मेला ग्राउंड पर 38 दिनों तक लगातार धरना प्रदर्शन का दौर चला था. साल भर चले आंदोलन के दौरान अब तक 700 से ज्यादा शिक्षामित्रों की जान जा चुकी है.

उत्तर प्रदेश शिक्षामित्र संघ के बैनर तले हजारों की संख्या में शिक्षामित्र एक बार फिर धरने पर बैठ गए हैं. उनकी मांग है कि उन्हें पैरा टीचर बनाया जाए. जो शिक्षामित्र टीईटी उत्तीर्ण हैं, उन्हें बिना लिखित परीक्षा के नियुक्ति दी जाए. इसके अलावा असमायोजित शिक्षामित्रों के लिए भी सरकार से कोई समाधान निकालने की मांग की गई है. इस कड़ी में लखनऊ के एनेक्सी भवन में 13 जून को सीएम योगी आदित्यनाथ ने शिक्षामित्रों के 6 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात की थी.

 

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