असम में जारी हुआ नया सिटिजन रजिस्टर, जानिए क्यों छिड़ा है विवाद

 

 

असम में आज नैशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजन जारी कर दिया गया है। कुल 3.29 करोड़ आवेदन में 1.89 करोड़ लोगों के नाम नैशनल रजिस्टर में शामिल किए जाने के योग्य पाए गए जबकि 40 लाख लोगों का नाम ड्राफ्ट में नहीं है। हालांकि यह फाइनल लिस्ट नहीं है बल्कि ड्राफ्ट है। जिनका नाम इसमें शामिल नहीं है वह इसके लिए दावा कर सकते हैं। इसको लेकर राज्य में तनाव का माहौल बरकरार है, जानें क्या है सिटिजन रजिस्टर और इसको लेकर क्यों विवाद है.

 

 

 

नए नैशनल सिटिजन रजिस्टर में असम में बसे सभी भारतीय नागरिकों के नाम, पते और फोटो हैं। यह पहला मौका है, जब सूबे में अवैध रूप से रहने वाले लोगों के बारे में जानकारी मिल सकेगी। देश में लागू नागरिकता कानून से थोड़ा अलग रूप में राज्य में असम + अकॉर्ड, 1985 लागू है। इसके मुताबिक 24 मार्च, 1971 की आधी रात तक सूबे में प्रवेश करने वाले लोगों को भारतीय नागरिक माना जाएगा।

 

प्रथम लिस्ट के नागरिकों की संख्या

पहली लिस्ट में 1.9 करोड़ लोगों को वैध नागरिक के रूप में मान्यता दी गई है, लेकिन बाकी one.39 करोड़ का नाम इस लिस्ट में नहीं आया। हालांकि, सरकार ने कहा कि यह पहली लिस्ट है और दूसरी लिस्ट भी जल्द जारी की जाएगी। इस बीच किसी भी तरह के हालात के निपटने की तैयारी कर ली गई है।

 

केंद्र सरकार ने राज्य में कानून और व्यवस्था की स्थिति को बनाए रखने के लिए सशस्त्र बलों की 220 कंपनियों को तैनात किया है। राज्य के 7 जिलों- बारपेटा, दर्रांग, डीमा हासो, सोनितपुर, करीमगंज, गोलाघाट और धुबरी में निषेधाज्ञा लागू की गई है।

 

 

असम में अवैध रूप से रहने वाले बांग्लादेशियों + का मामला बहुत बड़ा मुद्दा रहा है। इस मुद्दे पर कई बड़े और हिंसक आंदोलन भी हुए हैं। 18 के दशक में इसे लेकर एक बड़ा स्टूडेंट मूवमेंट हुआ था जिसके बाद असम गण परिषद और तत्कालीन राजीव गांधी सरकार के बीच समझौता हुआ कि 1971 तक जो भी बांग्लादशी असम में घुसे उन्हें नागरिकता दी जाएगी और बाकी को निर्वासित किया जाएगा।

 

 

विवादित ड्राफ्ट सुप्रीम कोर्ट के दबाव के बाद जारी हुआ है। केंद्र और राज्य सरकार ने दलील थी कि ड्राफ्ट जारी होने से कानून-व्यवस्था का मामला उठ सकता है, क्योंकि इसमें लाखों लोगों के नाम नहीं हैं और इससे आशंका की स्थिति पैदा हो सकती है कि उनका भविष्य क्या हाेगा। हालांकि कोर्ट ने इस दलील को नहीं माना अपने आदेश में कहा कि इस ड्राफ्ट से किसी का हक नहीं छिनेगा।

 

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