धरती की तरफ तेजी से बढ़ रहा विशाल ‘एस्टेरॉयड’, NASA ने जारी किया अलर्ट

एक विशाल क्षुद्रग्रह (Asteroid) हमारी धरती (Earth) की तरफ तेजी से बढ़ रहा है, जिसका आकार काफी बड़ा बताया जा रहा है. अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नेशनल एरोनॉटिक्स एंड स्पेस एडमिनिस्ट्रेशन (NASA) की ओर से इस क्षुद्रग्रह पर नजर रखी जा रही है. नासा के अनुसार विशाल अंतरिक्ष रॉक क्षुद्रग्रह 388945 (2008 TZ3) 16 मई को सुबह 2.48 बजे हमारे ग्रह के करीब पहुंच जाएगा.

अंतरिक्ष वैज्ञानिकों के मुताबिक क्षुद्रग्रह 1,608 फीट चौड़ा है. इसकी तुलना में, न्यूयॉर्क की प्रतिष्ठित एम्पायर स्टेट बिल्डिंग 1,454 फीट की है. ये एफिल टॉवर और स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी से भी बड़ा है.  लिहाजा अगर यह धरती की सतह से टकराता है तो इससे होने वाली तबाही का अंदाजा लगाया जा सकता है. वैज्ञानिकों का कहना है कि यह एस्टेरॉइड 16 मई को सुबह तकरीबन 2.48 बजे धरती के बेहद करीब होगा.

नासा के अनुसार अगर ये पृथ्वी से टकरा जाता है तो भारी नुकसान होगा.अंतरिक्ष वैज्ञानिकों की गणना के मुताबिक ये पृथ्वी से करीब 25 लाख मील की दूरी से गुजरेगा. सुनने में ये दूरी काफी लगती है, लेकिन वास्तव में ये ज्यादा दूरी नहीं है. इसीलिए नासा ने इसे हल्के में नहीं लिया है.

ये पहली बार नहीं है जब क्षुद्रग्रह 388945 धरती की ओर बढ़ रहा है. मई 2020 में पृथ्वी के बहुत करीब से ये गुजरा था, ये दूरी 1.7 मिलियन मील की थी. अंतरिक्ष वैज्ञानिकों के अनुसार सूर्य की परिक्रमा करते समय, हर दो साल में ये अंतरिक्ष चट्टान नियमित रूप से पृथ्वी से गुजरती है. अगली बार ये मई 2024 में पृथ्वी के करीब से गुजरेगा. क्षुद्रग्रह अंतरिक्ष में घूमते रहते हैं. वैज्ञानिकों ने दशकों से चेतावनी दी है कि कुछ विशाल अंतरिक्ष चट्टानें पृथ्वी के लिए खतरनाक हैं. यदि कोई क्षुद्रग्रह 4.65 मिलियन मील के भीतर आता है और एक निश्चित आकार से अधिक है, तो इसे “संभावित रूप से खतरनाक” माना जाता है.

क्या होते हैं ऐस्टरॉइड?

ऐस्टरॉइड्स वे चट्टानें होती हैं जो किसी ग्रह की तरह ही सूरज के चक्कर काटती हैं लेकिन ये आकार में ग्रहों से काफी छोटी होती हैं. हमारे सोलर सिस्टम में ज्यादातर ऐस्टरॉइड्स मंगल ग्रह और बृहस्पति यानी मार्स और जूपिटर की कक्षा में ऐस्टरॉइड बेल्ट में पाए जाते हैं. इसके अलावा भी ये दूसरे ग्रहों की कक्षा में घूमते रहते हैं और ग्रह के साथ ही सूरज का चक्कर काटते हैं.

ऐस्टरॉइड और उल्कापिंड एक ही चीज है?

उल्कापिंड ऐस्टरॉइड का ही हिस्सा होते हैं. किसी वजह से ऐस्टरॉइड के टूटने पर उनका छोटा सा टुकड़ा उनसे अलग हो जाता है जिसे उल्कापिंड यानी meteroid कहते हैं. जब ये उल्कापिंड धरती के करीब पहुंचते हैं तो वायुमंडल के संपर्क में आने के साथ ये जल उठते हैं और हमें दिखाई देती एक रोशनी जो शूटिंग स्टार यानी टूटते तारे की तरह लगती है लेकिन ये वाकई में तारे नहीं होते, और ये Comet यानी धूमकेतु भी नहीं होते.

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