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UP: मुख्तार अंसारी के चलते DSP शैलेन्द्र सिंह को छोड़नी पड़ी थी नौकरी, अब भी नहीं हो सकते बहाल, ये है वजह

हाल ही में यूपी पुलिस बाहुबली मुख्तार अंसारी को यूपी की बांदा जेल में कैद करने के लिए ले आई। जिसके बाद एक बार फिर उन डीएसपी का जिक्र सोशल मीडिया पर होने लगा है, जिन्होंने मुख्तार पर कार्रवाई करने के लिए काफी दिक्कतें झेलनी पड़ी। हम बात कर रहे हैं डीएसपी शैलेंद्र सिंह की, जिनको अपनी नौकरी से इस्तीफा देना पड़ा था। दरअसल, अब जब उन पर लगे सारे मुकदमे वापस ले लिए गए हैं तो उनकी बहाली की मांग उठने लगी है। लेकिन ऐसा होना बहुत मुश्किल है, आइए आपको उसकी वजह बताते है।


ये है पूरी वजह

जानकारी के मुताबिक, सोशल मीडिया पर डीएसपी शैलेंद्र सिंह के पक्ष में तर्क देते हुए कहा जा रहा है कि जब यूपी पुलिस के ही अफसर IPS दावा शेरपा नौकरी छोड़कर दोबारा नौकरी में आ सकते हैं तो शैलेन्द्र सिंह क्यों नहीं? बिहार के डीजीपी रहे गुप्तेशवर पांडेय नौकरी छोड़कर दोबारा नौकरी में आ सकते हैं तो शैलेन्द्र सिंह क्यों नहीं? इनके पक्ष में महाराष्ट्र के चर्चित पुलिस अफसर सचिन वाझे का भी उदाहरण दिया जा रहा है।


पर क्या आप जानते हैं कि इन सभी उदाहरण के बाद भी शैलेंद्र सिंह वापस नौकरी ज्वाइन नही कर सकते। इसकी खास वजह है। बाकी तीनों अफसरों का मामला डीएसपी शैलेंद्र सिंह से काफी अलग है। अंतर ये है कि शैलेन्द्र सिंह ने इस्तीफा दिया था जबकि दावा शेरपा और गुप्तेश्वर पांडेय ने वीआरएस मांगा था। सचिव वझे निलम्बित थे। तीनों मामलों में बहुत फर्क है।


बता दें कि इस्तीफा देने और उसे सरकार द्वारा स्वीकार किये जाने के बाद नौकरी में दोबारा वापसी नहीं हो सकती। शैलेन्द्र सिंह ने 11 फरवरी 2004 को इस्तीफा दिया था और 10 मार्च 2004 को इस्तीफा स्वीकार कर लिया गया था। जिसके चलते अब उनकी बहाली नही हो सकती।


सीएम को दिया था धन्यवाद

हाल ही में अपने मुकदमे वापस होने पर पूर्व डीएसपी शैलेंद्र सिंह ने सोशल मीडिया पर पोस्ट किया था। जिसमे उन्होंने लिखा था कि, “2004 में जब मैंने माफिया मुख्तार अंसारी पर LMG केस में POTA लगा दिया था, तो मुख्तार को बचाने के लिए तत्कालीन सरकार ने मेरे ऊपर केस खत्म करने का दबाव बनाया। जिसे न मानने के फलस्वरूप मुझे डिप्टी एसपी पद से त्यागपत्र देना पड़ा था। इस घटना के कुछ महीने बाद ही तत्कालीन सपा सरकार के इशारे पर, राजनीति से प्रेरित होकर मेरे ऊपर वाराणसी में आपराधिक मुकदमा लिखा गया और मुझे जेल में डाल दिया गया। लेकिन जब माननीय योगी जी की सरकार बनी तो, उक्त मुकदमे को प्राथमिकता के साथ वापस लेने का आदेश पारित किया गया, जिसे माननीय सीजेएम न्यायालय द्वारा 6 मार्च, 2021 को स्वीकृति प्रदान की गई। न्यायालय के आदेश की नकल आज ही प्राप्त हुई। मैं और मेरा परिवार योगी जी की इस सहृदयता का आजीवन ऋणी रहेगा। संघर्ष के दौरान मेरा साथ देने वाले सभी शुभेक्षुओं का, हृदय से आभार व्यक्त करता हूं।”


मुख्तार अंसारी पर की थी कार्रवाई

गौरतलब है कि शैलेंद्र सिंह ने 2004 में माफिया मुख्तार अंसारी पर POTA के तहत कार्रवाई की थी जिसके बाद तत्कालीन सरकार ने शैलेंद्र सिंह से इस्तीफा ले लिया था और उनके ऊपर मुकदमा दर्ज किया था। 2004 में शैलेंद्र सिंह एसटीएफ के डिप्टी एसपी हुआ करते थे तथा वाराणसी के एसटीएफ यूनिट के प्रमुख थे। इसी दौरान कृष्णानंद राय हत्याकांड के पहले सेना के एक भगोड़े से से मुख्तार अंसारी ने LMG यानि लाइट मशीन गन खरीदी थी जिसे शैलेंद्र सिंह ने न सिर्फ बरामद किया था बल्कि सरकार को वह रिपोर्ट भेजी थी जिसमें मुख्तार के देशद्रोही कारनामों का कच्चा चिट्ठा था। कहा जाता है तब शैलेन्द्र सिंह पर ये केस हटाने का दबाव था लेकिन जब वो नहीं माने तो शैलेंद्र पर ही केस दर्ज कराया गया जिसके बाद उन्होंने पुलिस की नौकरी ही छोड़ दी थी।


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