‘इस्लाम अपनाओ या मौत’..अफगानिस्तान में सिखों के सामने तालिबान ने रखे दो विकल्प, देश छोड़ने को मजबूर अल्पसंख्यक 

अफगानिस्तान (Afghanistan) पर कब्जे के बाद तालिबान ने कई वायदे किए कि वह अब नया तालिबान (Taliban) है, यहां अल्पसंख्यकों को रहने और अपने धर्म को मानने की पूरी आजादी रहेगी लेकिन आतंकी संगठन अब अपना असली रंग दिखाने लगा है. एक रिपोर्ट के मुताबिक यहां सिख समुदाय को चुनाव करना पड़ रहा है कि या तो वह जबरन धर्म परिवर्तन करके सुन्नी मुसलमान बनें या देश छोड़ दें. एक समय सिख समुदाय (Sikh Community) के लोगों की संख्या अफगानिस्तान में दसियों हजारों में हुआ करती था. लेकिन अफगानिस्तान से पलायन और मौतों की वजह से इनकी स्थिति खराब है. ऐसा व्यवस्थागत भेदभाव और अफगानिस्तान में होने वाली कट्टरपंथी हिंसा की वजह से हुआ है.

इंटरनेशनल फोरम फॉर राइट्स एंड सिक्योरिटी (IFFRAS) की रिपोर्ट के मुताबिक, तालिबान सरकार ने यह साफ कर दिया है कि सिखों को सुन्नी इस्लाम कबूल करना होगा नहीं तो उन्हें मार दिया जाएगा. तालिबानी सरकार कभी भी देश में विविधता को बढ़ावा नहीं देगी. रिपोर्ट में आशंका जताई गई है कि ऐसे में देश में अल्पसंख्यकों के नरसंहार का खतरा मंडरा रहा है. तालिबान ने 15 अगस्त को काबुल पर कब्जा कर लिया था, जिसके बाद देश में दहशत का माहौल बना हुआ है.

हाल के सालों में अफगानिस्तान में कई सिख विरोधी हिंसक (Sikh Community in Afghanistan) हमले हुए. कथित तौर पर ‘आतंकवादियों’ ने पिछले साल जून में एक अफगान सिख नेता का अपहरण कर लिया था. सूत्रों ने मामले के बारे में अधिक जानकारी का खुलासा नहीं किया. मार्च 2019 में काबुल (Kabul) में एक और सिख व्यक्ति का अपहरण कर हत्या कर दी गई थी. बाद में, अफगानिस्तान की पुलिस (Afghanistan’s police) ने दो संदिग्धों को गिरफ्तार किया था. जबकि कंधार (Kandahar) में एक अन्य अज्ञात बंदूकधारियों ने एक अन्य सिख व्यक्ति को गोली मार दी थी.

सिख समुदाय के लोग सदियों से अफगानिस्तान में रह रहे हैं, लेकिन दशकों से अफगान सरकार सिखों को पर्याप्त आवास प्रदान करने और उनके घरों को बहाल करने में विफल रही है. दरअसल, 1990 के दशक के दौरान उनके पड़ोसियों और वॉरलॉर्ड ने सिखों के घरों पर अवैध रूप से कब्जा जमा लिया था. IFFRAS ने कहा कि 26 मार्च, 2020 को काबुल के एक गुरुद्वारे में तालिबान द्वारा किए गए सिखों के नरसंहार के बाद से ही बड़ी संख्या में समुदाय के लोग भारत जा रहे हैं. इसके अलावा, फोरम ने बताया कि सिख समुदाय के लोग सुन्नी संप्रदाय की मुख्यधारा के अंतर्गत नहीं आते हैं, इसलिए उन्हें या तो जबरन मुस्लिम बना दिया जाता है या फिर उनकी हत्या कर दी जाती है.

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