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Covid-19: रेलवे ने 20,00 ट्रेनों को आइसोलेशन वार्ड में किया कनवर्ट

बिज़नेस: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशभर में लॉकडाउन की घोषणा कर दी जिससे भारतीय रेलवे ने 14 अप्रैल तक देशभर में यात्री ट्रेनों को निलंबित करने का अभूतपूर्व कदम उठाया. यह 167 वर्षों में यह पहली बार था जब एशिया के सबसे पुराने रेल नेटवर्क को बंद कर दिया गया. अब रेलवे नेटवर्क ने वायरस फैलते ही 20,000 से अधिक पुरानी पुरानी गाड़ियों को अलग-अलग आइसोलेशन वार्ड में बदलने का फैसला किया है. भारतीय रेलवे नेटवर्क दुनिया का चौथा सबसे बड़ा रेल ऑपरेटर है और भारत में सबसे ज्यादा नौकरियां देता है. रेलवे पहले से ही पूरे देश में 125 अस्पतालों का संचालन करता है, इसलिए उसके पास अनुभव की कमी नहीं है.


इस पर भारतीय रेल मंत्री पीयूष गोयल ने एक ट्वीट में लिखा कि, कोरोना वायरस का मुकाबला करने के लिए भारतीय रेलवे अपने कोचों को आइसोलेशन वार्ड में बदलेगा. आम तौर पर भारतीय रेलवे भारत के 7,349 स्टेशनों से लंबी दूरी और उपनगरीय मार्गों पर प्रति दिन में 20,000 से अधिक यात्री ट्रेनें चलाता है. रेल मंत्रालय ने 16 रेलवे ज़ोनों में से प्रत्येक को नॉन एसी गाड़ियों की पहचान करने का निर्देश दिया है और कहा है कि जो गाड़ियां परिचालन में नहीं हैं, उन्हें आपातकालीन स्थिति में उपयोग के लिए तैयार किया जाये.



मीडिया ख़बरों के अनुसार, रेलवे बोर्ड में एक्सिक्यूटिव डायरेक्टर ऑफ इनफार्मेशन एंड पब्लिसिटी, राजेश दत्त बाजपेयी ने कहा कि 5,000 आइसोलेशन वार्ड 14 दिन के भीतर तैयार हो जाएंगे और यदि आवश्यक हो तो 48 घंटों के भीतर और गाड़ियां वार्ड में बदला जायेगा. प्रत्येक सैनिटाइज्ड कैरिज में 16 मरीजों को रखा जा सकेगा. इसमें एक नर्स स्टेशन, एक डॉक्टर के केबिन और चिकित्सा आपूर्ति और उपकरणों के लिए जगह होगी.


भारत में आए दिन कोरोना वायरस के मामले आ रहे हैं, जिसकी वजह से किसी को भी एक स्थान से दूसरे स्थान जाने में काफी समस्या हो रही है. इन गाड़ियों को स्थानीय स्वास्थ्य अधिकारी सरकारी डॉक्टर, पैरामेडिक्स नर्स दिए जायेंगे. भारत सरकार ने रेलवे कारखानों को रेलवे अस्पतालों और अन्य सरकारी अस्पतालों में उपयोग के लिए वेंटिलेटर जैसे अस्पताल के बेड, स्ट्रेचर, मेडिकल ट्रॉलियों, मास्क, सैनिटाइज़र, एप्रन, और चिकित्सा उपकरणों के निर्माण के आकलन करने का भी निर्देश दिया है.


भारत में 1,000 लोगों पर 0.5 अस्पताल बेड-


कोरोना जैसी इस भयानक महामारी से पहले भी भारत में अस्पताल बेड की कमी थी. OECD के अनुसार भारत में प्रत्येक 1,000 लोगों के लिए 0.5 अस्पताल के बिस्तर उपलब्ध हैं. इनमें से अधिकांश शहरी क्षेत्रों में हैं. उदाहरण के लिए पूर्वी राज्य बिहार में प्रति 1,000 लोगों पर 0.11 बेड हैं, जबकि पश्चिम बंगाल में प्रति 1,000 लोगों पर 2.5 बेड हैं. चीन में प्रति 1,000 लोगों पर चार अस्पताल बेड का राष्ट्रीय औसत है. चीन ने सबसे ज्यादा प्रभावित हुबेई प्रांत में 10 दिनों में 1,000 बेड का अस्पताल बनाया.


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