Chhath Puja 2021: नहाय-खाय के साथ आज से शुरू होगा छठ पूजा का महापर्व, जानें विधि, पूजा सामग्री और शुभ मुहूर्त

छठ पूजा, जिसका लोग साल भर इंतजार करते हैं, आज से इस महापर्व की शुरुआत हो जाएगी। बिहार के अलावा अब कई जगहों पर छठ पूजा का काफी महत्व है। छठ पूजा कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष चतुर्थी तिथि को नहाय-खाय से शुरू होती है, जो इस बार सोमवार यानी 8 नवंबर को पड़ रहा है।नहाय-खाय के दिन व्रती गंगा या पास के नदी, तलाब में डुबकी लगाती हैं और केवल एक बार सात्विक भोजन करते हैं। कार्तिक मास की पंचमी को खरना भी कहा जाता है। इस दिन व्रती शाम को गुड़, अरवा चावल की बनी खीर और रोटी खाते प्रसाद के रूप में ग्रहण करते हैं। इसके बाद तीसरे दिन भगवान सूर्य को संध्या में अर्घ्य दिया जाता है और चौथे दिन उगते सूर्य को। खास बात यह है कि खरना के दिन शाम में प्रसाद ग्रहण करने के बाद से करीब 36 घंटे तक यानी उगते हुए सूर्य को अर्ध्य देने तक व्रती यह व्रत निर्जला करते हैं।

छठ पूजा सामग्री

प्रसाद रखने के लिए बांस की दो बड़ी टोकरियां
बांस या फिर पीतल का सूप
दूध-जल के लिए एक ग्लास
एक लोटा और थाली
5 गन्ने
शकरकंदी और सुथनी
पान, सुपारी और हल्दी
मूली और अदरक का हरा पौधा
बड़ा मीठा नींबू
शरीफा, केला और नाशपाती
पानी वाला नारियल
मिठाई, गुड़, गेहूं, चावल और आटे से बना ठेकुआ
चावल, सिंदूर, दीपक, शहद और धूप
नए वस्त्र जैसे सूट या साड़ी लेना ना भूलें.

छठ पूजा कार्यक्रम

8 नवंबर 2021, सोमवार- चतुर्थी (नहाए-खाए)
9 नवंबर 2021, मंगलवार- पंचमी (खरना)
10 नवंबर 2021, बुधवार- षष्ठी (डूबते सूर्य को अर्घ्य)
11 नवंबर 2021, गुरुवार- सप्तमी (उगते सूर्य को अर्घ्य)

पूजन विधि

कार्तिक शुक्ल षष्ठी के दिन घर में पवित्रता के साथ कई तरह के पकवान बनाए जाते हैं, जिनमें ठेकुआ खासतौर पर प्रसिद्ध है। सूर्यास्त से पहले सारे पकवानों को बांस की टोकरी में भड़कर निकट घाट पर ले जाया जाता है। एक मान्यता यह भी है कि छठ पूजा में सबसे पहले नई फसल का प्रसाद चढ़ाया जाता है। इसलिए प्रसाद के रूप में गन्ना फल अर्पण किया जाता है। घाट 4-5 गन्नों को खड़ा कर बांधा जाता है और इसके नीचे दीप जलाये जाते हैं। व्रत करने वाले सारे स्त्री और पुरुष जल में स्नान कर इन डालों को अपने हाथों में उठाकर षष्ठी माता और भगवान सूर्य को अर्ध्य देते हैं। सूर्यास्त के पश्चात सब अपने घर लौट आते हैं। अगले दिन यानी कार्तिक शुक्ल सप्तमी को सूर्योदय से पहले ब्रह्म मुहूर्त में फिर डालों में पकवान, नारियल और फलदान रख नदी के तट पर सारे वर्ती जमा होते हैं और उगते हुए सूर्य को अर्घ्य देते हैं| इसके बाद छठ व्रत की कथा सुनी जाती है और कथा के बाद प्रसाद ग्रहण करके व्रती अपना व्रत तोड़ते हैं।

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