अमेरिका का पारा हाई, अगर चीन ने किया ताइवान पर हमला तो चुकानी पड़ेगी ये कीमत

चीन (China) की तमाम धमकियों के बावजूद अमेरिकी संसद की स्पीकर नैंसी पेलोसी ताइवान दौरा कर आईं. 19 घंटे तक पेलोसी ताइवान (Taiwan) के राष्ट्रपति और वहां के अधिकारियों से मिलती रहीं और जब तक ये मुलाकात होती रही चीन को मिर्ची लगती रही. धमकियों के बीच पेलोसी की ये यात्रा, इस बात का सबूत है कि अमेरिका (America) को चीन की चेतावनियों से कोई फर्क नहीं पड़ता. पेलोसी ने ताइवान को भरोसा दिलाया कि अमेरिका उनके साथ है. पेलोसी के दौरे से बौखलाए चीन ने ताइवान में कई जगहों पर अपने फाइटर जेट और युद्धपोतों की तैनाती कर दी है.

पेलोसी की यात्रा संपन्न होते ही चीन ने ताइवान के चारों ओर अब तक के सबसे बड़े युद्धाभ्यास की शुरुआत की है. इसे सीधे तौर पर ताइवान और अमेरिका को चुनौती देना समझा जा रहा है. वहीं ताइवान ने चीन के इस कदम की आलोचना करते हुए कहा है कि वह युद्ध की स्थिति के लिए भी पूरी तरह से तैयार है. अगर वास्तव में ताइवान की खाड़ी में युद्ध छिड़ता है तो वैश्विक अर्थव्यवस्था को इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ सकती है और दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था चीन को काफी नुकसान उठाना पड़ सकता है.

कोरोना के चलते पहले से ही प्रभावित है इकोनॉमी 

कोरोना महामारी के कारण वैश्विक अर्थव्यवस्था पहले से ही प्रभावित थी. अभी कोरोना महामारी के चलते उत्पन्न व्यवधान दूर हो ही रहे थे कि पूर्वी यूरोप में जंग की शुरुआत हो गई. फरवरी महीने में यूक्रेन के ऊपर रूस के हमला करते ही वैश्विक अर्थव्यवस्था के समक्ष नई चुनौती उत्पन्न हो गई. यूक्रेन-रूस युद्ध के कारण ग्लोबल सप्लाई चेन पर बुरा असर हुआ, खासकर अनाजों के वैश्विक बाजार में हालात बेकाबू हो गए. कई देशों में खाने-पीने की चीजों की कमी हो गई.

भारत समेत पूरी दुनिया को लगेगा झटका 

भारत में 70 करोड़ से ज्यादा लोग मोबाइल का इस्तेमाल करते हैं. 20 करोड़ से ज्यादा लोग लैपटॉप और कार का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन क्या आपको पता है कि अगर ये युद्ध हुआ तो मोबाइल, लैपटॉप, ऑटोमोबाइल सब पर संकट गहरा जाएगा. दुनिया भर में हजारों कंपनियां बंद होने के कगार पर पहुंच जाएगी. सैकड़ों कंपनियों को अरबों का नुकसान होगा. दरअसल इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस में जिस चिप या फिर सेमीकंडक्टर का इस्तेमाल होता है, वो ताइवान में तैयार होता है. दुनिया में सेमीकंडक्टर से होने वाली कुल कमाई का 54 फीसदी हिस्सा ताइवान की कंपनियों के पास है और अगर ताइवान में उत्पादन बंद हो गया, तो झटका पूरी दुनिया को लगेगा.

सेमीकंडक्टर के मामले में दुनिया की फैक्ट्री है ताइवान

चीन, भूगोल के हिसाब से दुनिया के सबसे बड़े देशों में से एक है और ताइवान की गिनती दुनिया के सबसे छोटे देशों में की जाती है. अर्थव्यवस्था के हिसाब से दोनों देशों की तुलना कहीं नहीं ठहरती, लेकिन इसके बावजूद इन दोनों देशों के बीच जब युद्ध का खतरा मंडराने लगा है, तो दुनिया एक अलग टेंशन में है. पहले ही ऑटो से लेकर स्मार्टफोन इंडस्ट्री चिप शॉर्टेज से परेशान हैं. ताइवान में स्थिति बिगड़ने पर संकट और गहरा हो जाएगा, क्योंकि ये छोटा देश सेमीकंडक्टर के मामले में दुनिया की फैक्ट्री है.

इलेक्ट्रॉनिक्स के सामान महंगे होना तय

नैंसी के दौरे के बाद जो स्थिति उभरकर सामने आई है, वो स्थिति अगर यूं ही बनी रही और अगर ताइवान पर हमला हुआ तो इलेक्ट्रॉनिक्स, कम्प्यूटर, स्मार्टफोन, कारों की कीमतें बढ़नी तय है. हो सकता है कि बाजार से इलेक्ट्रानिक सामान गायब हो जाएं. कोरोना महामारी के दौरान जब ताइवान से सप्लाई चेन टूट गया था, तो दुनिया को ये एहसास हो गया था कि ताइवान का बाजार में ना होने का मतलब क्या होता है.

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