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हौसले को सलाम: बीमार होने के बाद ड्यूटी पर डटे रहे कांस्टेबल रतन लाल, हिंसा में दंगाइयों ने ले ली जान

नागरिकता संशोधन कानून (CAA) और राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर (NRC) के खिलाफ दिल्ली (Delhi) के गोकुलपुरी थाना क्षेत्र के मौजपुर (Maujpur) इलाके में चल रहे विरोध प्रदर्शन के बीच हिंसा में जान गवाने वाले हेड कांस्टेबल रतन लाल (Head Constable Ratan Lal) अपनी ड्यूटी को लेकर तत्पर रहते थे. सोमवार को बुखार होने का बावजूद 42 वर्षीय रतन लाल ने ड्यूटी पर जाना उचित समझ. इसी दौरान सीएए विरोध के नाम पर दंगाइयों ने मौजपुर में हिंसा भड़काई जिमने उन्हें जान गवानी पड़ी.


परिवार में इकलौते कमाने वाले थे रतनलाल

रतन लाल राजस्थान के सीकर के मूल निवासी थे. रतन लाल एसीपी/गोकलपुरी के कार्यालय में तैनात थे. यहां वो वह अपनी पत्नी और 3 बच्चों के साथ रह रहे थे. वह अपने परिवार मे इकलौते कमाने वाले थे. उनके परिवार में बारह साल की बेटी सिद्धि, दस साल की बेटी कनक और सात साल का बेटा राम है. सिद्धि 7वीं, कनक 5वीं और राम पहली कक्षा में पढ़ते हैं. तीनों बच्चे एनपीएल स्थित दिल्ली पुलिस पब्लिक स्कूल में हैं. रतनलाल का छोटा भाई दिनेश गांव में रहता है और एक भाई मनोज बंगलूरू में नौकरी करता है.


मौत की खबर सुन पत्ती हुईं बेहोश

रतनलाल वर्ष 1998 में दिल्ली पुलिस में सिपाही भर्ती हुए थे. फिलहाल वे एसीपी गोकलपुरी ऑफिस में तैनात थे. सोमवार को वे ड्यूटी पर थे तो पत्नी ने हालचाल जानने के लिए फोन किया था. पत्नी को टीवी से पता लगा था कि रतनलाल के साथ अनहोनी हो गई है. तभी से वे फोन कर रही थीं. फोन किसी ने नहीं उठाया. कुछ देर में पता चल गया कि रतनलाल शहीद हो गए हैं. यह खबर सुनकर पूनम बेहोश हो गई थीं.


रिश्तेदारों ने लगाया गुमराह करने का आरोप

उत्तम नगर से रतनलाल के घर पहुंचे एक रिश्तेदार ने कहा कि उन्हें टीवी से पता लगा है कि रतनलाल की मौत हो गई है. रिश्तेदार का कहना था कि पुलिसकर्मी कुछ बता नहीं रहे हैं. सुनने में आया है कि उनके सिर में गोली लगी थी, जबकि कुछ पुलिसकर्मी बता रहे थे कि रतनलाल के सिर में पत्थर लगा है.


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