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PFI पर शिकंजे के बाद ISO नाम से खड़ा किया गया नया संगठन, हाथरस मामले की जांच कर रहीं एजेंसियों का बड़ा खुलासा

हाथरस मामले (Hathras Case) की आड़ में यूपी में दंगा फैलाने दंगा फैलाने की साजिश मामले में पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) का नाम आया है. यूपी पुलिस ने मथुरा से पीएफआई के 4 कार्यकर्ता गिरफ्तार किए हैं. इनके पास से मोबाइल, लैपटॉप एवं भड़काऊ व आपत्तिजनक साहित्य (शांति व्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव डालने वाला) प्राप्त हुआ है. वहीं पूछताछ के दौरान आरोपियों ने पीएफआई के नए संगठन इस्लामिक स्टूडेंट्स ऑर्गनाइजेशन (Islamic Students Organization, ISO) के बारे में खुलासा किया है.


इंटेलिजेंस एजेंसियों के मुताबिक यह आईएसओ ऑर्गनाइजेशन पीएफआई का विंग बनकर काम कर रहा है. इंटेलिजेंस इनपुट की मानें तो पीएफआई को लेकर कई विवाद सामने आए हैं, इसीलिए यह संगठन अब आईएसओ नाम से नया ऑर्गनाइजेशन खड़ा करने की कवायद में जुटा है. इनपुट के मुताबिक आईएसओ के सदस्य किसी से घुलते-मिलते नहीं हैं, इनका तरीका लो प्रोफाईल रहकर खुफिया तरीके से काम करने का है. बता दें कि यूपी समेत कई राज्य पीएफआई की गतिविधियों पर शिकंजा कस रहे हैं, यूपी तो बैन के लिए गृह मंत्रालय को सिफारिश भी कर चुका है, जिसके चलते नए नाम से संगठन को खड़ा किया जा रहा है.


बता दें कि हाथरस के बहाने उत्तर प्रदेश में दंगों की अंतरराष्ट्रीय साजिश के खुलासे के बाद यूपी पुलिस (UP Police) ने पीएफआई (PFI) के 4 कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया है. इनके पास से मोबाइल, लैपटॉप एवं भड़काऊ व आपत्तिजनक साहित्य (शांति व्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव डालने वाला) प्राप्त हुआ है. पुलिस पूछताछ में बड़ा खुलासा सामने आया है. जानकारी के मुताबिक कि ये लोग पत्रकार बनकर हाथरस की आग को पूरे देश में फैलाने की फिराफ में थे. बता दें कि यूपी समेत कई राज्य पीएफआई की गतिविधियों पर लगाम कस रहे हैं.


इस्लामिक कट्टरता को बढ़ाने के भी लगते रहे हैं आरोप

पीएफआई खुद को एक गैर सरकारी संगठन बताता है. इस संगठन पर कई गैर-कानून गतिविधियों में पहले भी शामिल रहने का आरोप है. गृह मंत्रालय ने 2017 में कहा था कि इस संगठन के लोगों के संबंध जिहादी आतंकियों से हैं, साथ ही इस पर इस्लामिक कट्टरवाद को बढ़ावा देने का आरोप है. पीएफआई ने खुद पर लगे इन सभी आरोपों को बेबुनियाद बताया था, लेकिन अकसर इस संगठन को लेकर विवाद होता रहा है.


धर्मांतरण से जुड़े मामलों में भी आता रहा है नाम

पीएफआई ने अपनी वेबसाइट पर खुद को गरीबों, पिछड़ों के लिए काम करने वाला संगठन और फासीवाद के खिलाफ बताया है. पीएफआई की एक राजनीतिक विंग भी है, जिसका नाम एसडीपीआई (SDPI) यानी सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया है. इसके अलावा कैम्पस फ्रेंड ऑफ इंडिया यानि कि सीएफआई (CFI) इसकी स्टूडेंट विंग है. कर्नाटक सरकार इस राजनीतिक संगठन पर भी प्रतिबंध लगाने पर विचार कर रही है. यही नहीं कई रिपोर्ट्स में धर्मांतरण से जुड़े मामलों में भी पीएफआई का नाम लिया जाता रहा है.


6 आतंकी घटनाओं में शामिल रहने का था आरोप

गृह मंत्रालय के सूत्रों ने 2017 में पीएफआई के खिलाफ पर्याप्त सबूत होने की बात कही थी. इसमें एनआईए की वह जांच रिपोर्ट भी है, जिसमें इस संगठन पर 6 आतंकी घटनाओं में शामिल रहने का आरोप लगाया है. इसके अलावा राज्यों की पुलिस की रिपोर्ट भी एनआईए के पास है, जिसमें इस संगठन पर धार्मिक कट्टरवाद को बढ़ावा देने, आतंकी गतिविधियों में शामिल रहने और जबरन धर्मांतरण का आरोप भी लगा है.


Also Read: हाथरस केस में बड़ा खुलासा, जामिया का छात्र है UP मेंं दंगों की साजिश रचने वाला PFI का मास्टरमाइंड


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