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कानपुर अपहरण कांड में चौंकाने वाला खुलासा, चीता ने 30 लाख में संजीत को खरीदने की कही थी बात, मानव तस्करों से जुड़े हैं तार

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कानपुर (kanpur) के संजीत यादव अपहरण कांड में किडनैपर्स को सिम और मोबाइल उपलब्ध कराने वाले आरोपी चीता के अंतर्राष्ट्रीय मानव तस्करों से जुड़े होने की बात सामने आई है। इसका खुलासा पुलिस हिरासत में पूछताछ के दौरान आरोपी नीलू और सिम्मी ने किया था। किडनैपर्स के मुताबिक, संजीत को मारने से पहले चीता ने उनसे संजीत को खुद 30 लाख रुपए में खरीदने की बात रखी थी, लेकिन नकद पैसा नहीं मिलने की वजह से सभी ने उसकी बात से इंकार कर दिया था।


पुलिस को आशंका है कि कानपुर देहात निवासी चीता का संपर्क किसी अंतर्राष्ट्रीय मानव तस्कर गिरोह से हो सकता है। पुलिस चीता का आपराधिक इतिहास खंगालने में जुटी है। वहीं, संजीत के पिता चमन सिंह ने बताया कि पुलिस ने जब उनका सामना नीलू और सिम्मी से कराया था तो दोनों ने बताया कि संजीत को मारने का प्लान बनाया जा रहा था, तभी चीता ने संजीत को 30 लाख रुपए में खरीदने की बात कही थी।


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चीता ने कहा था कि पैसों की व्यवस्था होने में थोड़ा समय लगेगा। ऐसे में रामजी और कुलदीप ने इंकार कर दिया था। इसके बाद में संजीत की हत्या कर शव को नदी में फेंक दिया। पिता का आरोप है कि संजीत की हत्या कर शव फेंकने का बयान किडनैपर्स पुलिस के दबाव में दे रहे हैं। उन्हें आशंका है कि किडनैपर्स ने संजीत को चीता के हवाले कर दिया होगा, जिसने संजीत को मानव तस्करों के हाथ बेच दिया है।


पिता का आरोप है कि कैडनैपर्स ने पुलिस को गुमराह करने के लिए संजीत का शव पांडु नदी में फेंकने की बात बताई। उन्होंने कहा कि जिस वक्त किडनैपर्स ने संजीत का शव नदी में फेंकने की बात बताई थी, उस वक्त नदी में नाममात्र का पानी था। ऐसे में शव बहकर जाना नामुमकिन है। शव बरामद न होना, संजीत का मानव तस्करों के चंगुल में होने की ओर इशारा करता है।


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इस मामले में 2 ऐसे लोग हैं, जिनके बारे में पुलिस के पास फिलहाल नाम के सिवा और कोई जानकारी नहीं है। कानपुर देहात के चीता और नौबस्ता के आशीष का नाम भी संजीत अपहरण कांड से जोड़ा गया था। दोनों ही आरोपी पुलिस की गिरफ्त से दूर हैं। चीता के बारे में और आशीष को लकेर पुलिस के पास कोई खास जानकारी नहीं है।


पुलिस पूछताछ में आरोपी ईशू और नीलू ने बताया था कि पूरे गिरोह में सबसे ज्यादा चालाक रामजी था। रामजी फिरौती की पूरी रकम हड़पना चाहता था। 13 जुलाई को फिरौती की रकम लेने के लिए रामजी ने अपने चार अन्य दोस्तों को भी गुजैनी रेलवे पुल के नीचे बुला लिया था। संजीत के पिता ने फिरौती वाला बैग नीचे फेंका तो रामजी के दोस्तों ने उसे उठा लिया था।


इस बीच राम ने शोर मचा कर सभी को वहां से भगा दिया था। इसके बाद से ही बैग का कुछ पता नहीं चल सका। इसे लेकर सभी का रामजी से झगड़ा भी हुआ था। पुलिसके मुताबिक, फिरौती वाले बैग का पता रामजी को रिमांड पर लेने के बाद ही चल सकेगा। कोरोना संक्रमण की दूसरी रिपोर्ट निगेटिव आने के बाद उसे रिमांड पर लेने के लिए कोर्ट में अर्जी लगाई जाएगी।


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