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….. उन्नाव वाकए की एक ऐसी हक़ीक़त, जो मीडिया कभी नहीं दिखाएगा !

..और उन्नाव की पीड़िता जिंदगी और मौत से लड़ते-लड़ते आखिर हार गई. करीब 90 फीसदी तक जल चुकी बहादुर बेटी ने सफदरजंग अस्पताल में शुक्रवार रात 11.40 बजे दम तोड़ दिया. पीड़िता के परिजनों के साथ ही देशभर में मांग उठने लगी है कि उन्नाव के गुनाहगारों को भी वैसी ही सजा होनी चाहिए जैसी कि हैदराबाद की पीड़िता के दोषियों को मिली है, माने कि सड़क पर पर खड़ा करके सीधा गोली मार देनी चाहिए. भले ही ये तरीका कानून संगत न हो लेकिन यह लोगों का आक्रोश है जो कि जनभावना के रूप में निकल रहा है. वहीं इस मामले में दोनों परिवारों और स्ठानीय लोगों के बयानों को देखा जाए तो इसके पीछे की कहानी ठीक वैसी नहीं है जैसी दिख रही. कुछ सवाल और बिन्दु ऐसे हैं जिनपर गहन जांच की जरूरत है. हम इस मामले की तह तक गए हैं और आपको कुछ ऐसी बातें बताने जा रहे हैं जिसे मेनस्ट्रीम मीडिया ने अभी तक नहीं बताया है.


गांव वालों की मानें तो दोनों परिवारों में दो साल पहले तक काफ़ी अच्छे संबंध थे. पीड़ित परिवार के संबंध गांव के प्रधान से भी बहुत अच्छे थे और ख़ुद पीड़ित लड़की के पिता इस बात को स्वीकार करते हैं कि प्रधान परिवार उनकी काफ़ी मदद करता था और बेहद ग़रीब होने के चलते सरकारी योजनाओं का लाभ भी इसी वजह से उन्हें आसानी से मिल जाता था. लेकिन जब लड़की और लड़के के बीच रिश्ते ख़राब हुए तो दोनों परिवारों के अलावा प्रधान के परिवार से भी ‘दुश्मनी’ हो गई. इसकी वजह ये है कि मुख्य अभियुक्त शिवम त्रिवेदी प्रधान के परिवार का ही लड़का है. जानकारी के मुताबिक पीड़िता की पास के रहने वाले शिवम से मार्च 2017 में प्रेम प्रसंग प्रसंग हुआ, मार्च 2017 में ही दोनों रायबरेली गए.


जानकारी के मुताबिक पीड़िता और शिवम ने रायबरेली सिविल कोर्ट में वैवाहिक अनुबंध कराकर शादी की, परंतु दोनो ही परिवारों को यह रिश्ता नागवार गुजरा और उन्होने इसकी मंजूरी नहीं दी. इसके बाद पीड़िता ने 5 मार्च 2019 को आरोपी के खिलाफ रेप की एफआईआर दर्ज कराई, जिसके बाद पुलिस ने शिवम को गिरफ्तार कर लिया. लोअर कोर्ट ने शिवम को जेल भेज दिया. जेल जाने के बाद आरोपी शिवम ने हाईकोर्ट में अपील दायर की.


हाईकोर्ट में आरोपी के वकील ने दलील दी कि दो साल तक शिवम के साथ रहने के बाद पीड़िता ने 2019 में एफआईआर दर्ज कराई. अगर दोनों में प्रम प्रसंग नहीं था तो यह एफआईआर पहले क्यों दर्ज नहीं कराई गयी. हाईकोर्ट में आरोपी के वकील ने दलील दी कि शिवम का पहले से कोई क्रिमिनल रिकॉर्ड नहीं है. आरोपी की दलील को मानते हुूए हाईकोर्ट ने पर्सनल बॉन्ड पर आरोपी शिवम को बेल दे दी. वहीं इस बेल का यूपी सरकार के वकील ने विरोध किया. घटना के ठीक 5 दिन पहले ही शिवम जेल से छूटकर आया था.


बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक लड़की की भाभी बताती हैं कि दोनों ने कब शादी की थी, इसकी जानकारी उन्हें नहीं थी. वह कहती हैं, “हमें तो शादी का तब पता चला जब लड़के ने और उसके घर वालों ने आकर यहां लड़ाई-झगड़ा किया, हमसे मार-पीट की. तब लड़की ने बताया कि उसने कोर्ट में शिवम से शादी की है लेकिन अब वह उसे मानने से इनकार कर रहा है”


बाकी हैं कई सवाल

पीड़िता ने अपने बयान में कहा था कि उसपर चाकू से हमला किया गया, इतना ही नहीं उसने डंडे से पिटाई की बात भी कही. लेकिन मेडिकल रिपोर्ट में पीड़िता के शरीर पर सिर्फ जलने के निशान ही पाए गए हैं. उस पर चाकू या डंडे से किसी भी तरह के हमले को डॉक्टर की टीम नकार रही है.


पीड़िता ने अपने बयान में कहा कि शिवम समेत 5 लोगों ने उस पर हमला किया है. वहीं पीड़िता के भाई ने इस पूरे मामले में केवल दो लोगों के शामिल होने की आशंका जताई है. जिसके आधार पर पुलिस ने शिवम त्रिवेदी व शुभम त्रिवेदी के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया था. हालांकि पीड़िता ने मजिस्ट्रेटी बयान में एसडीएम, नायब तहसीलदार और अन्य अधिकारियों को शिवम व शुभम के अलावा शिवम के पिता रामकिशोर, शुभम के पिता हरिशंकर त्रिवेदी (प्रधान के पति), उमेश बाजपेई (पंचायत मित्र) के नाम बताए थे. पुलिस ने बाद में इन तीनों के नाम भी जोड़ दिए.


बिहार थाना झेत्र सीओ सी.के त्रिपाठी का न्यूज चैनल द्वारा स्टिंग सामने आया है, जिसमें उन्होने जांच की जानकारियां साझा की हैं. सीओ के मुताबिक मुख्य आरोपी शिवम और उसके दोस्त शुभम के बीच बातचीत 5:12 बजे हुई थी, वहीं पीड़िता को जलाने की घटना 4:40 से 4:50 के बीच हुई थी. पुलिस की जांच के मुताबिक सीडीआर की जांच भी आरोपियों के बयान से मेल खा रही है. वहीं पुलिस ने सभी आरोपियों को उनके घर से गिरफ्तार किया है. मुख्य आरोपी शिवम ने खुद पुलिस के पास जाकर सरेंडर किया था. बिहार थाने की पुलिस इस बात की पुष्टि करती है. यही नहीं, घटना के तत्काल बाद जब अभियुक्तों के घर पर पुलिस ने दबिश दी तो लगभग सभी अभियुक्त अपने घर पर ही मिले.


स्थानीय लोगों की मानें तो पीड़िता और शिवम के परिवार शादी मंजूर नहीं थी. वहीं पीड़िता इसके बाद भी शिवम पर साथ रहने का दबाव बनाती रही. लेकिन जब शिवम फिर भी नहीं माना तो उसने शिवम व उसके दोस्त शुभम पर गैंगरेप का आरोप लगा दिया. स्थानीय लोगों के मुताबिक पीड़िता ने केस वापस लेने के लिए शुभम के पिता हरिशंकर त्रिवेदी (प्रधान के पति) से 15 लाख रुपए की डिमांड की, लोगों की माने तो पीड़िता ने करीब 7-8 लाख वसूल भी लिए थे.


उन्नाव में इस घटना को शुरू से देख रहे कई पुलिस अधिकारी भी स्थानीय लोगों की आशंकाओं से सहमति जताते हैं लेकिन इस बारे में वो आधिकारिक रूप से कुछ भी कहने से बच रहे हैं. गांव में कुछ लोगों को इस बात पर भी आपत्ति है कि अन्य लोगों के अलावा मीडिया भी पीड़ित पक्ष के प्रति ज़्यादा हमदर्दी दिखा रहा है.


कुल मिलाकर इस केस में अगर किसी एक पहलू को न पकड़कर हर पहलू को देखा जाए तो ये मामला बेहद पेचीदा है. इसके हर एंगल से जांच की जरूरत है. ताकि कोई भी दोषी न बचे वहीं एक भी निर्दोष सजा न पाए. फिलहाल एसआईटी बिन्दुवार इस पूरे मामले की जांच कर रही है, सच क्या है यह जांच के बाद ही पता चल सकेगा.


INPUT- Gaurav Sharma


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