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राजस्थान: ‘इस्लामिक आतंकवाद’ पर छापा कंटेंट तो पब्लिशर के दफ्तर पर हमला, पुलिस की मौजूदगी में की तोड़फोड़, किताबें जलाईं

राजस्थान (Rajasthan) की राजधानी जयपुर (Jaipur) में एक किताब में ‘इस्लामिक आतंकवाद’ (Islamic Terrorism) पर छपे कंटेंट को लेकर दफ्तर पर हमला बोल दिया गया. बताया जा रहा है कि मुसलमानों की भीड़ ने ऑफिस में जमकर तोड़फोड़ की. फर्नीचर को तहस-नहस कर दिया, किताबों को फाड़ा और उनमें आग लगा दी. वहीं यहां सबसे हैरान करने वाला यह रहा कि यह सब उपद्रव पुलिस की मौजूदगी में हुआ. वहीं इसे लेकर बीजेपी गहलोत सरकार पर हमलावर हो गई है. बीजपी ने चेतावनी दी है कि अगर आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई तो पार्टी आंदोलन करेगी.


किताब में छपे किस कंटेंट पर है बवाल ?


सवाल: इस्लामी आतंकवाद से आप क्या समझते है?

जवाब: इस्लामी आतंकवाद इस्लाम का ही एक रूप है, जो विगत 20-30 वर्षों में अत्यधिक शक्तिशाली बन गया है. आतंकवादियों में किसी एक गुट विशेष के प्रति समर्पण का भाव नहीं होकर एक समुदाय विशेष के प्रति समर्पण भाव होता है.समुदाय के प्रति प्रतिबद्धता इस्लामिक आतंकवाद की मुख्य प्रवृत्ति है. पंथ या अल्लाह के नाम पर आत्मबलिदान और असीमित बर्बरता, ब्लैकमेल, जबरन धन वसूली, और निर्मम नृशंस हत्याएं करना ऐसे आतंकवाद की विशेषता बन गई है. जम्मू कश्मीर में आतंकवाद पूर्णतया धार्मिक व पृथकतावादी श्रेणी में आता है.


Islamic terror strand of Islam, says Rajasthan textbook | Jaipur News -  Times of India
हमलावर बुधवार को दोपहर में आए लोगों ने ऑफिस में जमकर तोड़फोड़ की और किताबें भी फाड़कर फेंक दीं।

आपत्ति के बाद कंटेंट हटा भी दिया फिर भी की तोड़फोड़

पब्लिशर के मैनेजर विजय शंकर शुक्ला ने बताया कि 12वीं कक्षा की राजनीतिक विज्ञान की एक किताब में इस्लामिक आतंकवाद के सवाल पर एक जवाब छापा गया था. यह सवाल माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की किताब में भी पूछा गया है. मैनेजर ने बताया कि कुछ समय पहले जब इस सवाल के जवाब पर आपत्ति आई, तो हमने अपनी तमाम पुस्तकें बाजार से वापस उठा ली थीं और नई किताबों से भी उस कंटेंट को हटा दिया था, ताकि किसी की धार्मिक आस्था को ठेस न पहुंचे. हालांकि, इस सवाल का जवाब दूसरे पब्लिशर्स की किताबों में भी इसी तरह दिया गया है.


पब्लिशर के ऑफिस पर हमले के बाद वहां फर्नीचर के टुकड़े और कांच बिखरा नजर आया।

कंटेंट हटाने के साथ माफी भी मांगी

शुक्ला ने बताया कि आपत्ति के बाद पब्लिश किया गया कंटेंट हटाने के साथ ही लिखित में माफी भी मांग ली थी. उसके बावजूद 3-4 दिन पहले कुछ लोगों के फोन आए और उन्होंने इस मामले पर हमें धमकाया. इसकी शिकायत हमने पुलिस कोतवाली में भी की, इसके बाद 3 पुलिसकर्मी सुरक्षा में लगा दिए गए. दोपहर करीब 3 बजे दो दर्जन से अधिक हमलावरों ने दफ्तर में तोड़फोड़ की. विरोध करने आए लोगों ने फर्नीचर नीचे गिरा दिया और यहां पड़ी किताबें फाड़ दी, और उनमे आग लगा दी.


पासबुक में इस्लामिक आतंकवाद पर छपे कंटेंट को लेकर प्रकाशक के दफ्तर पर हमला। फाइल फोटो

पुलिसकर्मियों की मौजूदगी में की तोड़फोड़

बताया जा रहा है कि यह मामला 2017 का है. यानी पब्लिशर ने 2017 में जो किताब प्रकाशित की थी, उसमें यह जवाब छापा था. 3 साल से भी ज्यादा समय बाद पब्लिशर के ऑफिस पर हमला हुआ है. हमलावर राष्ट्रीय मुस्लिम परिषद के लोग बताए जा रहे हैं. 3 पुलिसकर्मियों की मौजूदगी में इस तरह दुकान में तोड़फोड़ करना साफ दर्शाता है कि हमलावरों को कानून का कोई खौफ नहीं था.


भाजपा की चेतावनी- आरोपियों पर कार्रवाई नहीं तो बड़ा आंदोलन 

भाजपा ने चेतावनी दी है कि अगर अगर आरोपियों खिलाफ कार्रवाई नहीं की गई तो भाजपा बड़ा आंदोलन करेगी. कोतवाली थाना पुलिस ने तोड़फोड़ करने के आरोप में 4 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है. हालांकि, पुलिस का कहना है धमकी के संबंध में कल ही कोतवाली में एक परिवाद दे दिया गया था. कोतवाली थाने के थाना अधिकारी विक्रम सिंह ने कहा परिवाद मिलने के बाद हमने पुलिस जाब्ता तैनात कर रखा था. वही डीसीपी पारिस देशमुख का कहना पूरे मामले की जांच की जा रही है.



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