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नागरिकता संशोधन बिल: अमित शाह बोले- इंदिरा गांधी ने बांग्‍लादेशियों को नागरिकता दी, पाकिस्‍तान से आए हिंदुओं को क्‍यों नहीं?

Home Minister Amit Shah introduced the Citizenship Amendment Bill in Lok Sabha

गृह मंत्री अमित शाह (Home Minister Amit Shah) द्वारा लोकसभा में नागरिकता संशोधन बिल (Citizenship Amendment Bill) पेश करते ही विपक्षी दलों ने हंगामा करना शुरू कर दिया. अमित शाह ने बिल पेश करते हुए कहा कि ये बिल किसी भी तरह से अल्‍पसंख्‍यकों के खिलाफ नहीं है. इस पर विपक्ष ने कहा कि ये बिल समानता के अधिकार के खिलाफ है. इस पर शाह ने कहा कि नागरिकता के बिल से समानता के अधिकार पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा. इसके साथ ही कहा कि अल्‍पसंख्‍यकों को कई अधिकार दिए गए हैं, वहां समानता का अधिकार लागू क्‍यों नहीं होता. इसी तरह उन्होंने कहा कि ‘1971 में इंदिरा गांधी ने बांग्‍लादेशियों को नागरिकता दी, पाकिस्‍तान से आए हिंदुओं को क्‍यों नहीं दी गई? 1971 में पाकिस्‍तान के शरणार्थियों को नागरिकता क्‍यों नहीं दी गई’.


बता दें कि इस बिल में पाकिस्‍तान, अफगानिस्‍तान और बांग्‍लादेश से आए गैर-मुस्लिमों को नागरिकता के संबंध में प्रावधान किया गया है. इस संदर्भ में अमित शाह ने कहा कि इस बिल को समझने के लिए पाकिस्‍तान, अफगानिस्‍तान और बांग्‍लादेश के संविधान को देखना होगा. विपक्ष के हमले पर अमित शाह ने कहा कि कांग्रेस ने धर्म के आधार पर विभाजन किया. उन्होंने कहा कि मैं हर सवाल का जवाब देने को तैयार हूं और विपक्ष को कहा कि वॉक आउट मत कर जाना.


इस बीच लोकसभा में नागरिकता संशोधन बिल के चर्चा के पक्ष में 293 और खिलाफ 82 वोट पड़े. केंद्रीय मंत्रिमंडल ने पिछले बुधवार को इस विधेयक को मंजूरी दी थी. पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बंग्लादेश में उत्पीड़न के कारण वहां से भागकर आए हिंदू, ईसाई, सिख, पारसी, जैन और बौद्ध धर्मावलंबियों को नागरिकता संशोधन विधेयक 2019 के तहत भारत की नागरिकता प्रदान की जाएगी. इस विधेयक का विपक्ष ने पहले ही विरोध किया है. कांग्रेस ने इसे असंवैधानिक करार दिया है. विधेयक में मुस्लिम को छोड़ देने को लेकर अल्पसंख्यक गुटों ने भी इसका विरोध किया है.


अमित शाह ने कहा कि इस बिल में मुस्लिमों को इसलिए नहीं रखा गया क्योंकि उनके साथ कोई धार्मिक प्रताड़ना नहीं हुई है. धर्म के आधार पर इस देश का विभाजन कांग्रेस पार्टी ने किया. नागरिकता संशोधन बिल संविधान के किसी अनुच्छेद के खिलाफ नहीं है और ना ही अनुच्छेद 14 के खिलाफ है. ऐसा पहली बार नहीं है कोई सरकार नागरिकता पर कोई बिल लेकर आए है.


amit shah

विपक्ष ने किया बिल का विरोध

कांग्रेस ने इस बिल का जमकर विरोध किया और लोकसभा में खूब हो-हल्ला किया. TMC सासंद सौगत रॉय ने कहा ‘यह विभाजनकारी और असंवैधानिक है. यह संविधान के अनुच्छेद 14 का उल्लंघन करता है. अमित शाह सदन में नए है और उनको नियमों के बारे में नहीं पता है’. समाजवादी पार्टी प्रमुख और आजमगढ़ से सांसद अखिलेश यादव ने कहा ‘हम नागरिकता संशोधन बिल 2019 के खिलाफ हैं और हर कीमत पर इसका विरोध करेंगे’. AIUDF के सांसद बदरुद्दीन अजमल ने संसद परिसर में बैनर लेकर नागरिकता संशोधन विधेयक का विरोध जताया. इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग पार्टी के सांसदों ने संसद परिसर में महात्मा गांधी की प्रतिमा के सामने नागरिकता संशोधन बिल के खिलाफ 2019 प्रदर्शन किया.


कांग्रेस सांसद अधीर रंजन चौधरी ने कहा कि ‘अल्पसंख्यकों को निशाना बनाया जा रहा है. बिल संविधान के खिलाफ के खिलाफ है’. शिवसेना के प्रवक्ता संजय राउत ने ट्वीट किया ‘गैरकानूनी घुसपैठियों को देश से बाहर किया जाना चाहिए और अप्रवासी हिंदुओं को नागरिकता देनी होगी लेकिन अमित शाह जी, वोट बैंक बनाने के आरोपों को विराम दें और उन्हें मताधिकार न दें. इस पर आप क्या कहते हैं? और हां, कश्मीरी पंडितों का क्या हुआ, क्या अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद वे कश्मीर लौट गए’.


गौरतलब है कि हाल ही में शिवसेना ने महाराष्ट्र में भाजपा से अलग होकर कांग्रेस और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के साथ महा विकास अघाड़ी गठबंधन सरकार बनाई है. ऐसे में अटकले लगाई जा रही थी कि क्या शिवसेना इस विधेयक का समर्थन करेगी या नहीं. माकपा ने भी रविवार को प्रेस कांफ्रेस कर कहा कि वे प्रस्तावित विधेयक के लिए दो संशोधन पेश करने वाले हैं.


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