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योगी सरकार का बड़ा फैसला, भूगर्भ जल प्रदूषित किया तो 7 साल की सजा और 20 लाख तक जुर्माना

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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) की अध्यक्षता में मंगलवार को कैबिनेट बैठक (Cabinet Meeting) हुई, कैबिनेट ने कुल 9 प्रस्तावों पर अपनी मुहर लगाई है, जिसमें भूजल प्रबंधन अधिनियम 2020 (Ground water act 2020) के तहत बनाई गई नियमावली को भी मंजूरी मिली है. जिसके मुताबिक भूगर्भ जल को दूषित या गंदा करने के दोषियों को 7 साल तक की जेल और 20 लाख रुपये तक जुर्माने की सजा भुगतनी होगी.


जलशक्ति मंत्री डॉ. महेंद्र सिंह (Dr Mahendra Singh) ने बताया कि भूजल दूषित करने के पहले अपराध में 6 महीने से 1 साल तक की जेल व 2 से 5 लाख रुपये तक जुर्माना लगेगा. दूसरी बार ऐसा करने पर 5 से 10 लाख तक का जुर्माना व 5 साल तक की जेल होगी. फिर अपराध किया तो 20 लाख रुपये तक जुर्माना और 7 साल तक की सजा होगी.


सबमर्सिबल पंप लगाने से पहले कराना होगा रजिस्ट्रेशन

अगर, घर में सबमर्सिबल पंप लगवाया है तो ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन करवाना होगा. हालांकि, किसानों और घरेलू उपयोगकर्ताओं से इसका कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा. जो लोग भूगर्भ जल का कमर्शल इस्तेमाल करेंगे, उन्हें इसके लिए शुल्क देना होगा. कमर्शल उपयोग के लिए शुल्क राज्यस्तरीय समिति तय करेगी. नियमावली की अधिसूचना जारी होने की तारीख से एक साल के अंदर पंजीकरण करवाना अनिवार्य होगा. सभी सरकारी और गैर सरकारी संस्थानों में रेन वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम अनिवार्य होगा. सभी शिक्षण संस्थाओं की मान्यता की शर्त में भी इसे शामिल किया जाएगा. 300 वर्ग मीटर से ज्यादा के आवास में सबमर्सिबल लगाने पर रेनवॉटर हार्वेस्टिंग जरूरी होगी. बोरिंग करने वाली ड्रिल एजेंसियों के लिए भी पंजीकरण अनिवार्य होगा. उन्हें हर तिमाही सूचना भी देनी होगी कि कितनी ड्रिलिंग की गई. उन्होंने बताया कि सरकारी और निजी भवनों का नक्शा तभी पास होगा, जब वर्षा जल संचय प्रणाली लगाने का प्रावधान होगा. इसके लिए एक साल का मौका दिया गया है. इस दौरान पंजीकरण करवाना होगा.


ग्राम पंचायतों से लेकर शासन तक गठित होगी कमीटी

महेंद्र सिंह ने बताया कि भूजल के संरक्षण व उसे प्रदूषण से बचाने के लिए ग्राम पंचायतों से लेकर शासन तक कमीटी का गठन होगा. शासन स्तर पर मुख्य सचिव की अध्यक्षता में 18 सदस्यीय भूजल प्राधिकरण बनेगा. इसमें विभिन्न विभागों के प्रमुख सचिवों के साथ जल संरक्षण के विशेषज्ञ भी शामिल होंगे. प्राधिकरण भूगर्भ जल के लिहाज से संकटग्रस्त क्षेत्रों को अधिसूचित करेगा. इसमें ऐसे क्षेत्र शामिल होंगे, जिनमें पिछले पांच साल में प्रतिवर्ष 20 सेमी भूजल स्तर नीचे गया हो. इन जगहों पर सरकारी पेयजल योजनाओं, पौधरोपण के अलावा बोरिंग/ट्यूबवेल नहीं लगाए जा सकेंगे. जागरूकता के लिए भूजल सेना का गठन होगा. शासन स्तर पर मुख्य सचिव और जिले में डीएम की अध्यक्षता में समितियां बनेंगी. नगर निगमों, नगरीय निकायों और पंचायतों में उसके निर्वाचित प्रमुख कमिटी के अध्यक्ष होंगे.


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