कानपुर: मुख्तार बाबा को क्लीन चिट देने वाले PCS अफसरों की बढ़ीं मुश्किलें, राम जानकारी मंदिर तोड़ने के मामले में होगी पूछताछ

कानपुर जनपद में अवैध तरीके से शत्रु संपत्तियों पर बैंक लोन के मामले सामने आने के बीच पुलिस की जांच में अब बेकरनगंज स्थित रामजानकी मंदिर (Ram Janki Temple) पर कब्जा करने के आरोपी मुख्तार बाबा (Mukhtar Baba) को क्लीन चिट देने वाले 3 पीसीएस अफसरों (Three PCS Officers) की मुश्किलें बढ़ गई हैं।

दस्तावेजों के आधार पर दी थी क्लीन चिट

दरअसल, पुलिस ने प्रशासन से मामले में की गई जांच की रिपोर्ट मांगी थी, जिसमें 2019 में तैनात रहे जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी, हसीलदार न्यायिक सदर और एसीएम 7 ने बाबा की ओर से पेश किए गए दस्तावेजों के आधार पर उसे क्लीन चिट दे दी थी। इसके साथ ही पेश किए गए सबूतों के आधार पर यह भी माना गया था कि राम जानकी मंदिर कोई मंदिर नहीं, ब्लिक एक हिंदू परिवार के घर का हिस्सा था।

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जिसे मुख्तार बाबा ने खरीदकर अपना व्यवसाय शुरू किया था। साथ ही मंदिर तोड़ने की बात को खारिज कर दिया गया था। पुलिस में दर्ज मामले की अब तक की जांच में बाबा के मंदिर को नुकसान पहुंचाने और उस परिसर में बिरयानी बेंचने की बात कही जा रही थी। लेकिन अब यह साफ हो गया है कि बाबा को इसी मामले में तीन पीसीएस अधिकारियों न क्लीन चिट दी।

इतना ही नहीं, इससे पहले 2017 में भी एक जांच हुई थी, जिसमें तत्कालीन एसीएम 7 ने क्लीन चिट दे दी थी। फिलहाल पुलिस जांच रिपोर्ट के तथ्यों को खंगलाने में जुटी है। सूत्रों का कहना है कि इस रिपोर्ट को तैयार करने वाले अधिकारियों से भी पुलिस जल्द पूछताछ कर सकती है।

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क्या कहती है जांच रिपोर्ट

बाबा पर आरोप लगा था कि उसने मंदिर पर कब्जा कर अवैध तरीके से दुकान खोल ली। इसकी जांच में यह पाया गया कि मंदिर वाली संपत्ति को एक हिंदू परिवार ने बंटवारे के बाद पाक नागरिक आबिद रहमान को बेंच दिया था। इसी आबिद रहमान से मुख्तार बाबा ने जमीन खरीद ली। जमीन खरीदने के बाद मंदिर में रखी मूर्तियों को मूल हिंदू परिवार के सदस्यों को सौंप दिया गया।

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ऐसे में मंदिर को तोड़ने की बात गलत है। वहीं, अब पुलिस अब क्लीन चिट देने वाले अफसरों से पूछताछ की तैयारी में है। बता दें कि कानपुर में शत्रु संपत्ति को बंधक रखकर 1.66 करोड़ रुपये का लोन लेने के मामले में पुलिस की जांच में एक चौंकाने वाला तथ्य सामने आया था। बाबा ने बैंक अधिकारियों से सांठगांठ कर शत्रु संपत्तियों पर करोड़ों का लोन लिया था।

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