Health Tip: युवाओं में सबसे ज्यादा होती है माइग्रेन की दिक्कत, जानें इसके लक्षण और बचाव के तरीके

आज कल की बिगड़ी हुई लाइफस्टाइल की वजह से लोगों की हेल्थ पर काफी प्रभाव पड़ा है। ज्यादातर लोग मॉर्डन लाइफ स्टाइल के नाम पर नेचर से दूर होते जा रहे हैं। खान-पान के नाम पर जंकफूड को बढ़ावा दे रहे हैं। फल और सब्जियां खाते नहीं और जब बीमार पड़ते हैं, बस तभी हेल्थ पर ध्यान देते हैं। इन सबकी वजह से नींद खराब होती है और साथ में थकावट महसूस होती है। ये आगे जाकर माइग्रेन और सिर दर्द में तब्दील हो जाता है। इसी के चलते आज की खबर में हम आपको माइग्रेन के लक्षण के साथ साथ इससे बचाव के बारे में भी टिप्स देंगे।

क्या हैं इसके लक्षण

जानकारी के मुताबिक, माइग्रेन सिरदर्द का एक टाइप होता है, जिसमें व्यक्ति को अचानक तेज सिरदर्द, उल्टी आना और तेज आवाज, तेज लाइट से परेशानी होती है। माइग्रेन कई तरह का होता है, जिसमें अलग-अलग लक्षण और समस्याएं देखने को मिलती हैं। कई बार माइग्रेन से जूझ रहे व्यक्ति को तेज सिरदर्द के साथ शरीर के एक हिस्से में कमजोरी महसूस होती है। हालांकि, कुछ घंटे के बाद शरीर की कंडीशन नॉर्मल हो जाती है। अगर आपको 2 सप्ताह से ज्यादा समय तक इस तरह की समस्या रहती है, तो यह माइग्रेन हो सकता है। आपको तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

किन वजहों से हो सकती है परेशानी

डॉ. गौरव केसरी कहते हैं कि वर्तमान समय में माइग्रेन की समस्या युवाओं में तेजी से बढ़ रही है. 18 से 30 साल तक के वर्किंग युवाओं को इससे बचने के लिए विशेष सावधानी बरतनी चाहिए. माइग्रेन होने की सबसे बड़ी वजह युवाओं की बिगड़ी हुई लाइफस्टाइल होती है. कई लोग देर रात तक जागते हैं और समय पर खाना भी नहीं खाते. इस वजह से भी माइग्रेन की समस्या हो सकती है. वर्क फ्रॉम होम के दौरान माइग्रेन के मामलों में तेजी से बढ़ोतरी देखने को मिली है.

कैसे करें माइग्रेन से बचाव

सबसे पहले आपको अपनी लाइफस्टाइल को सुधारना होगा। सोने का समय तय करना होगा।हेल्दी डाइट लेनी होगा। इस समस्या से बचने के लिए तनाव से बचना चाहिए। हर 3 से 4 घंटे में ब्लड ग्लूकोज को मेंटेन रखने के लिए कुछ न कुछ खाना चाहिए। लंबे समय तक फास्टिंग से बचना चाहिए। योग करना चाहिए। अगर आप इन बातों का ध्यान रखेंगे, तो माइग्रेन की समस्या से बचाव कर सकते हैं।

माइग्रेन का इलाज

माइग्रेन का ट्रीटमेंट दवाओं के जरिए किया जाता है, लेकिन हर मरीज की कंडीशन अलग होती है। सबसे पहले माइग्रेन की पहचान करने के लिए सभी टेस्ट किए जाते हैं। फिर लक्षणों के अनुसार दवा दी जाती है। गंभीर मामलों में इलाज का तरीका अलग हो सकता है।

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