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कोरोना वायरस से ग्रसित के फेफड़ों में इस तरह काम करता है ये संक्रमण, जानें पूरी डिटेल

सोशल: कोरोना वायरस की दहशत दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही है. इस संक्रमण से हर किसी का दिल बैठा जा रहा है. यह बहुत खतरनाक वायरस है जो महामारी की तरह फ़ैल रहा है. इस वायरस की चपेट में लाखों लोग आ चुके हैं. इसके साथ ही कुछ लोगों की लापरवाही से यह वायरस बहुत तेजी से कई राज्यों में फ़ैल रहा है. भारत में भी इस बीमारी को लेकर हाहाकार मचा हुआ है. इस बीमारी से WHO के मुताबिक 6 लोगों को कोई एक आदमी जोरों से बीमार पड़ता है. इसमें सांस लेने में बहुत दिक्कत होती है. चलिए बताते हैं आपको कि आखिरकार कैसे लोगों को प्रभावित कर रहा है ये वायरस.


इसके साथ ही इसकी वजह से लोगों के मन में ये सवाल भी आ रहा है कि आखिर ये छोटी से बीमारी कोरोना वायरस जैसे गंभीर बीमारी में कैसे बदल जाता है और ये हमारे फेफड़ों और पूरे शरीर को प्रभावित करता है? जिस बात की जानकारी कुछ रॉयल ऑस्ट्रेलियन कॉलेज ऑफ फिजिशियन के प्रोफेसर जॉन विल्सन ने दी है.


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आपको बता दें, जॉन विल्सन के मुताबिक कोरोना वायरस के गंभीर मामलों में न्यूमोनिया के लक्षण पाए जाते हैं. उन्होंने बताया कि इस संक्रमण के रोगियों को चार श्रेणियों में बांटा जा सकता है.सबसे कम गंभीर लोग उन्हें बताया गया है जिन्हें ये वायरस होता है लेकिन इसमें कोई लक्षण नहीं होता है. इसके बाद दूसरे नंबर पर वो लोग आते हैं जिन्हें सांस लेने में दिक्कत महसूस होती है. इसी के साथ उन्हें बुखार, कफ, सिर दर्द या कंजक्टिवाइटिस जैसे हल्के लक्षण महसूस होते हैं.


इस फ्लू के लक्षण वाले लोग इस वायरस को फैला सकते हैं. उन्हें खुद नहीं पता होता है. तीसरे नंबर पर वो लोग आते हैं जिनमें फ्लू जैसे लक्षण होते हैं और वो कुछ भी न करने के लिए असहाय होता है. उनमें इस वायरस से पॉजिटिव पाए जाते हैं. आखिर में वो लोग आते हैं जो न्यूमोनिया की वजह से गंभीर रूप ले लेते हैं.


कुछ और डॉक्टर्स के मुताबिक कोरोना वायरस के मरीजों को जब कफ और बुखार होता है, तो इसके इन्फेक्शन से श्वास नली को नुकसान पहुंचता है और उसमें सूजन आ जाती है. इसकी वजह से वायुमार्ग की नसों में भी दिक्कत होती है. इसके बाद जब स्थिति गंभीर हो जाती है तब जब यह वायुमार्ग से होता हुआ गैस एक्सचेंद यूनिट में चला जाता है, ये यूनिट ऑक्सीजन के आवागमन का काम करती है. इस यूनिट में संक्रमण की वजह से फेफड़ों की थैलियों में सूजन आ जाती है. जिसकी वजह से न्यूमोनिया हो जाता है.


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विल्सन ने यह भी बताया की सूजन की वजह से फेफड़ों में पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं पहुंच पाता है. शरीर की ऑक्सीजन लेने और कार्बनडाइ ऑक्साइड छोड़ने की क्षमता भी कम होने लगती है और न्यूमोनिया की ये गंभीर स्थिति मौत का कारण बन जाती है.


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