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Covid-19: सांस लेने में हो रही है तकलीफ?, तो बिना घबराए अपनाएं ये उपाय, बस इनसे बना लें दूरी

लाइफस्टाइल: जहां एक तरफ कोरोना वायरस ने हर किसी को बेहाल कर रखा है वहीँ दूसरी तरफ कई लोग ऐसे भी हैं, जो इस कोरोना काल में तरह-तरह के तरीकों से खुद को और अपने परिवार को सुरक्षित करने में लगा हुआ है. कोरोना वायरस का संक्रमण ऐसा सामान्य वायरस है जो आपकी नाक, साइनस या ऊपरी गले में संक्रमण का कारण बनता है. ज्यादातर लोगों के लिए यह वायरस खतरनाक होता है. यह वायरस बहुत तेजी से देश में फैलता नजर आ रहा है जिससे मरने वालों की संख्या लाखों में है. यह आपके ऊपरी श्वसन पथ (साइनस, नाक और गले) या निचले श्वसन पथ (विंडपाइप और फेफड़े) को प्रभावित कर सकता है.


कोरोना वायरस भी बिलकुल वैसे ही फैलता है जैसे की अन्य वायरस तेजी से फैलते हैं. यह वायरस ज्यादातर एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति के संपर्क में आने से फैलता है जो काफी घातक हो सकता है. SARS-CoV-2 कोरोनोवायरस के सात प्रकारों में से एक है, जिसमें मध्य पूर्व श्वसन सिंड्रोम (MERS) और अचानक तीव्र श्वसन सिंड्रोम (SARS) जैसे गंभीर रोग शामिल हैं. अन्य कोरोनावायरस अधिकांश सर्दी का कारण बनते हैं जो हमें वर्ष भर प्रभावित करते हैं लेकिन स्वस्थ लोगों के लिए गंभीर खतरा नहीं है.


इस वायरस की वजह से निमोनिया, साँस लेने में तकलीफ, ह्रदय रोग, यकृत की समस्या, सेप्टिक शॉक होती है जिससे इंसान की मृत्यु हो जाती है. कोरोना यानी कोविड-19 की दिक्क्तों को साइटोकिन रिलीज सिंड्रोम या साइटोकिन स्टॉर्म के रूप में जाना जाता है. यह तब होता है जब संक्रमण आपके रक्त प्रवाह को साइटोकिन्स नामक भड़काऊ प्रोटीन आपकी प्रतिरक्षा प्रणाली को ट्रिगर करता है. वे टिश्यूज को मार सकते हैं और आपके अंगों को नुकसान पहुंचा सकते


ऐसे गंभीर लक्षण दिखाई देने पर तुरंत किसी डॉक्टर से सलाह लें-


सांस लेने में तकलीफ या सांस की कमी
छाती में दर्द या दबाव का बढ़ना
कंफ्यूजन
पूरी तरह से न जाग पाना
नीले होंठ या चेहरा
बुखार
खाँसना
थकान
ठंड लगना
शरीर में दर्द
सरदर्द
गले में खरास
कंजेशन / बहती नाक
गंध या स्वाद में कमी
जी मिचलाना
दस्त


इस कोरोना की दूसरी लहर ने देश में हाहाकार मचा दिया है. सबसे ज्यादा इसमें सांस लेने की तकलीफ देखी जा रही है, लेकिन हर किसी को अस्पताल जाने की जरूरत भी नहीं है. वहीँ अगर आपका ऑक्सीजन लेवल ऑक्सीमीटर पर लगातार 90 के नीचे जा रहा है तभी अस्पताल जाएं. इसके अलावा जिन लोगों को सांस में तकलीफ हो रही है वो कुछ खास बातों का ध्यान जरूर रखें. एक्सपर्ट्स के अनुसार, शरीर में ऑक्सीजन की कमी होने पर गैस स्टोव, मोमबत्ती, फायरप्लेस, बिजली या गैस हीटर जैसी चीजों से करीब 5 फीट दूर रहें. ऐसी चीजों के नजदीक जाने से आपकी दिक्कतें और ज्यादा बढ़ेंगी.


पेंट थिनर, एरयोसोल स्प्रे, क्लीनिंग फ्लूड जैसे फ्लेमेबल प्रोडक्ट्स का बिल्कुल इस्तेमाल न करें. इसके अलावा पेट्रोलियम जेली, ऑयल, ग्रीस बेस्ड क्रीम या वैसलीन जैसे किसी भी प्रोडक्ट को छाती या शरीर के किसी हिस्से पर न लगाएं. सांस लेने में दिक्कत महसूस कर रहे हैं तो भूलकर भी धूम्रपान न करें. या फिर सिगरेट-बीड़ी पीने वालों से भी कोसों दूर रहें. इतना ही नहीं, घर में इस्तेमाल होने वाली कैमिकल से बनी खुशबूदार अगरबत्ती या धूपबत्ती के धुएं के संपर्क में भी न आएं. घर की खिड़कियां पर्दे खुली रखें फ्रेश हवा लें. अपने घर के बाहर या बालकनी में पौधे लगाएं ये आपके घर में मौजूद नाइट्रोजन को बाहर निकाल कर ऑक्सीजन पहुंचाने में मदद करेंगे.


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