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टीवी, मोबाइल, लैपटॉप में नजरें गड़ाने वाले सावधान, हो सकते हैं इन बीमारियों के शिकार

लाइफस्टाइल: आज की दुनिया में लोगों ने वर्चुअल रियलिटी को दूसरी बना रखी है. लोगों ने पारिवारिक और सामाजिक दुनिया में जीवन व्यापन के लिए काफी संतुलन बना रखा है. लोगों ने अपनी सोशल दुनिया में काफी समय दे रखा है, जिसकी वजह से उनकी रियल लाइफ को जीने का अंदाज काफी बदल गया है. डिजिटल दुनिया में जीने वाले लोगों के लिए जिंदगी में संतुलन बनाने की आवश्यकता है. ऐसे में हमें थोड़ा डिजिटल दुनिया से दूर रहने की जरूरत है. मोबाइल, लैपटॉप, टीवी जैसे उपकरणों के साथ ज्यादा वक़्त बितीने से हमें शारीरिक और मानसिक समस्याओं का सामना करना पड़ता है.


अगर आप भी डिजिटल उपकरणों से निजात पाना चाहते हैं तो उसका एक प्रोसेस होता है जिसे डिजिटल डिटॉक्स कहा जाता है. डिजिटल डिटॉक्स के साथ ही फोमो की मुसीबत जुड़ी हुई है. फोमो का मतलब होता है अकेले छूट जाने का एक डर. जब हम डिजिटल डिटॉक्स की बात करते हैं, तो आखिरी हल यही होता है कि स्मार्टफोन, लैपटॉप से दूर रहें. लेकिन इस दूरी से ये भी डर लगने लगता है कि जब हम इंटरनेट की दुनिया से दूर होंगे तो उस दौरान अन्य लोगों को पता नहीं क्या क्या नई, रोचक और मजेदार चीजें जानने को मिलेंगी और हम इस सुख से वंचित रह जाएंगे. इसके लिए आप को कुछ टिप्स फॉलो करने होंगे.


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आपके जीवन में दोस्त, आपका काम और सेहत इस तरह की चीजें होती हैं, जिसमें शख्स को सबसे ज्यादा ध्यान और आकर्षण बनाए रखने की जरूरत होती है. ऐसे में मोबाइल के अलावा हम चारों तरह सभी चीजों से घिरे रहते हैं. इसी के साथ आमतौर पर मोबाइल का हाथ में होना हमें भटकाता है. वक्त मोबाइल में ज्यादा बिताने से अच्छा है कि हम ध्यान दें कि आपके साथ और आसपास क्या हो रहा है.


हम सभी जानते हैं की हमें आठ घंटे की नींद लेने की जरूरत होती है. मोबाइल के साथ ज्यादा समय बिताने से ज्यादा जरूरी है की हम अपने स्वास्थ्य, परिवार और अपने दोस्तों के साथ समय बिताये, घर के सभी लोग घर में एक ऐसा कोना बनाए जहां कोइ भी डिजिटल उपकरण न हों. यदि ऐसा नहीं हो पा रहा है तो कोई बात नहीं आप एक दिन मोबाइल डे जरूर बनाए


एक रिसर्च में यह पता चला है की एक व्यक्ति दिन में 200 बार फोन चेक करता है. यानी की हर छह मिनट तीस सेकंड में फोन चेक करता है. 16 से 24 वर्ष आयु के 70 फीसदी लोग कॉल कर बात करने के बजाय टेक्स्ट या चैट करना पसंद करते हैं. वहीं एक किशोर मोबाइल धारक एक महिने में औसतन 3400 मैसेज अपने बिस्तर पर लेटे हुए भेजता है.


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