Makar Sankranti 2022: मकर संक्रांति है साल का पहला महापर्व, जानें इसकी खास 10 बातें

नए साल की शुरुआत हो गई है। ऐसे में अब कुछ ही दिन में वापस से त्योहारों की शुरुआत हो जाएगी। दरअसल, हिंदू धर्म में साल का पहला त्योहार मकर संक्रांति महापर्व के रूप में मनाया जाता है। मकर संक्रांति के पर्व को देश के अलग-अलग हिस्से में अलग- अलग नामों से जाना जाता है। इसे पंजाब में लोहड़ी, उत्तराखंड में उतरायणी, गुजरात में उत्तरायण, केरल में पोंगल कहा जाता है। इसके साथ ही कहीं कहीं इसे खिचड़ी का पर्व भी कहा जाता है। पंचांग के अनुसार वर्ष 2022 में मकर संक्रांति का पर्व 14 जनवरी 2022, शुक्रवार को पौष मास की शुक्ल पक्ष की द्वादशी की तिथि को मनाया जाएगा।

जानें इसकी खास दस बातें

1. 14 जनवरी 2022 शुक्रवार को है मकर संक्रांति और इसी दिन से सूर्य उत्तरायण होना प्रारंभ हो जाएगा। 6 महीने का समय उत्तरायण काल कहलाता है। भारतीय महीने के अनुसार यह माघ से आषाढ़ महीने तक माना जाता है।

2. इस दिन से शरद ऋतु अर्थात सर्दी के मौसम की समाप्ति की शुरुआत होना प्रारंभ हो जाती है। ऋतु और मौसम में परिवर्तन होने लगता है।

3. उत्तरायण की वजह से रातें छोटी और दिन बड़े होने लगते हैं। सूर्य के मकर राशि से मिथुन राशि तक के भ्रमण भ्रमणकाल को उत्तरायण काल कहा जाता है। इसके बाद सूर्य कर्क राशि से धनु राशि तक संचरण करता है इसे दक्षिणायन काल कहा जाता है। मान्यता है कि दक्षिणायन का काल देवताओं की रात्रि है। दक्षिणायन में रातें लंबी हो जाती है।

4. उत्तरायण को देवताओं का दिन कहा जाता है इसलिए इस काल में सभी तरह के शुभ, संस्कार और मांगलिक कार्य किए जाते हैं। मान्यता है कि उत्तरायण काल के दौरान किए गए कार्य शुभ फल देने वाले होते हैं।

5. उत्तरायण के मौके पर गंगा और यमुना नदी में स्नान का बड़ा महत्व है। स्नान के साथ ही जान और पुण्य करना भी शुभ होता है। शास्त्रों के अनुसार उत्तरायण का काल जप, तप, साधना और सिद्धि के लिए अनुकूल होता है।

6. गुजरात में उत्तरायण या मकर संक्रांति के मौके पर पतंग के भव्य उत्सव का आयोजन होता है।

7. कहते हैं कि सूर्य पूर्व से दक्षिण की ओर चलता है, तब सूर्य की किरणें खराब होती है, परंतु जब सूर्य पूर्व से उत्तर की ओर गमन करने लगता है, तब उसकी किरणें सेहत और शांति के लिए लाभदायक होती हैं।

8. मकर सक्रांति या सूर्य के उत्तरायण होने व्रतों का समय समाप्त होकर तीर्थ और उत्सवों का समय प्रारंभ हो जाता है।

10. गीता में उल्लेख है कि उत्तरायण में शरीर त्यागने वाले को मोक्ष प्राप्त होता है, जबकि दक्षिणायम में शरीर का त्याग करने वालों को पुन: जन्म लेना होता है।

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