National Youth Day: स्वामी विवेकानंद की जयंती पर मनाया जाता है ये दिन, जानें वजह और इतिहास

आज देश भर में राष्ट्रीय युवा दिवस मनाया जा रहा है, जिसके पीछे की वजह बेहद ही खास है। दरअसल, स्वामी विवेकानंद की जयंती के उपलक्ष्य में सभी जगह राष्ट्रीय युवा दिवस मनाया जाता है। महान संत और दार्शनिक स्वामी विवेकानंद का जन्म 12 जनवरी 1863 को हुआ था। इन का असली नाम नरेंद्रनाथ दत्त था। वह वेदांत के विख्यात और प्रभावशाली आध्यात्मिक गुरु थे। छोटी उम्र से ही उन्हें अध्यात्म में रुचि हो गई थी। पढ़ाई में अच्छे होने के बावजूद जब वह 25 साल के हुए तो अपने गुरु से प्रभावित होकर नरेंद्रनाथ ने सांसारिक मोह माया त्याग दी और संयासी बन गए। संन्यास लेने के बाद उनका नाम विवेकानंद पड़ा। इनके जीवन की कई बातें लोगों को आज भी ज्ञान देती है।

आज ही क्यों मनाया जाता है राष्ट्रीय युवा दिवस

जानकारी के मुताबिक, स्वामी विवेकानंद ने मानवता की सेवा एवं परोपकार के लिए 1897 में कोलकाता में रामकृष्ण मिशन की स्थापना की थी। वहीं 1898 में गंगा नदी के किनारे बेलूर में रामकृष्ण मठ की स्थापना भी की थी। इस मिशन का नाम विवेकानंद ने अपने गुरु रामकृष्ण परमहंस के नाम पर रखा था। बता दें कि 1984 में स्वामी विवेकानंद के जन्मदिन को राष्ट्रीय युवा दिवस के तौर पर मनाने का ऐलान किया गया था। उन दिनों भारत सरकार ने कहा था कि स्वामी विवेकानंद का दर्शन, आदर्श और काम करने का तरीका भारतीय युवाओं के लिए प्रेरणा का एक बड़ा स्रोत हो सकते हैं। तब से स्वामी विवेकानंद की जयंती को राष्ट्रीय युवा दिवस के तौर मनाने की घोषणा कर दी गई। जिसके बाद 1985 से प्रत्येक वर्ष 12 जनवरी को राष्ट्रीय युवा दिवस के रूप में मनाया जाता है।

स्वामी विवेकानंद से जुड़ी रोचक बातें

स्वामी विवेकानंद अक्सर लोगों से एक सवाल किया करते थे कि क्या आपने भगवान को देखा है? इसका सही जवाब किसी के पास नहीं मिला। एक बार उन्हें रामकृष्ण परमहंस से भी यही सवाल किया था, जिस पर रामकृष्ण परमहंस जी ने जवाब दिया था, हां मुझे भगवान उतने ही स्पष्ट दिख रहे हैं, जितना की तुम दिख रहे हो, लेकिन मैं उन्हें तुमसे ज्यादा गहराई से महसूस कर पा रहा हूं।

स्वामी विवेकानंद ने 1897 में कोलकाता में रामकृष्ण मिशन की स्थापना की थी। वहीं 1898 में गंगा नदी के किनारे बेलूर में रामकृष्ण मठ की स्थापना भी की थी।

11 सितंबर 1893 में अमेरिका में धर्म संसद का आयोजन हुआ, जिसमें स्वामी विवेकानंद भी शामिल हुए थे। यहां उन्होंने अपने भाषण की शुरुआत हिंदी में ये कहकर की कि ‘अमेरिका के भाइयों और बहनों’। उनके भाषण पर आर्ट इंस्टीट्यूट ऑफ शिकागो में पूरे दो मिनट तक तालियां बजती रहीं। जो भारत के इतिहास में एक गर्व और सम्मान की घटना के तौर पर दर्ज हो गई।

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