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DGP ओपी सिंह ने दिया कांस्टेबल का साथ, वर्दी उतरवाने वाले जज का हुआ तबादला

Agra Judge

उत्तर प्रदेश के आगरा में साइड नहीं देने पर कांस्टेबल की वर्दी उतरवाने वाले जज का तबादला कर दिया गया है। यूपी पुलिस के द्वारा इस मामले में ट्वीट करने के बाद इलाहाबाद हाईकोर्ट ने शनिवार को जज के तबादले का आदेश जारी कर दिया। जज का तबादला महोबा कर दिया गया है।


यूपी पुलिस ने ट्विटर पर की अपील

जानकारी के मुताबिक, शुक्रवार को एडिशनल चीफ जुडीशियल मजिस्ट्रेट (एसीजेएम) संतोष कुमार यादव की कोर्ट रूम के अंदर आगरा पुलिस में कॉन्स्टेबल सह ड्राइवर 38 वर्षीय घूरेलाल को अपनी वर्दी उतारनी पड़ी थी। दरअसल, घूरेलाल पर आरोप था कि उसने कोर्ट जाते समय जज की कार को साइड नहीं दिया था। इस सजा से बेहद दुखी कॉन्स्टेबल ने आगरा के एसएसपी को इस संबंध में खत लिखकर स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति मांगी। वहीं, यूपी के डीजीपी ओपी सिंह ने इस पूरे मामले को गंभीरतापूर्वक लेते हुए कहा है कि इस पूरे मामले को उचित स्तर पर उठाया जाएगा।


शुक्रवार के यूपी पुलिस ने ट्वीट किया, ‘यूपी के डीजीपी ओपी सिंह ने कॉन्स्टेबल के वर्दी उतारवाने के आदेश को बहुत गंभीरता से लिया है और इसे उचित स्तर पर उठाया है। हम पुलिसकर्मी की गरिमा के साथ खड़े हैं और समाज के सभी वर्गों से पुलिसकर्मियों के सम्मान करने की अपील करते हैं।’ यूपी पुलिस द्वारा ट्वीट करने और आगरा के एसएसपी द्वारा मामले को हाई कोर्ट को रेफर करने के बाद जज साहब का तुरंत तबादला कर उन्हें महोबा जाने का आदेश दिया गया है।


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कोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल मयंक कुमार जैन द्वारा शनिवार को भेजे गए आगरा के एडिशनल चीफ जुडिशल मजिस्ट्रेट संतोष कुमार यादव के ट्रांसफर आदेश से समझा जा रहा है कि शुक्रवार को पुलिसकर्मी की वर्दी उतरवाने की हरकत को हाईकोर्ट ने भी गंभीरता से लिया है। जज संतोष कुमार यादव को महोबा के डिस्ट्रिक्ट लीगल सर्विसेज अथॉरिटी के पूर्णकालिक सचिव का पदभार ग्रहण करने का निर्देश दिया गया है। आदेश में तुरंत चार्ज हैंडओवर कर नई नियुक्ति का पदभार ग्रहण करने की रिपोर्ट भेजने की बात भी कही गई है।


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गौरतलब है कि यह घटना मालपुरा स्थित किशोर अदालत सुबह 11 बजे हुई। इस पूरे मामले में आगरा के एसएसपी बबलू कुमार के अनुसार कॉन्स्टेबल ड्राइवर घूरेलाल ने आरोप लगाया है कि उनके साथ कोर्ट में जज ने अपमान किया है। जज ने कार को रास्ता नहीं देने पर दंड स्वरूप उन्हें (घूरेलाल को) वर्दी, टोपी और बेल्ट उतारने और आधे घंटे तक खड़ा रहने के लिए बाध्य किया।


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