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आतंकी डॉ. जलीस अंसारी का पूछताछ में खुलासा, CAA-NRC को लेकर पूरे देश में विद्रोह की भूमि तैयार, नहीं समझी सरकार तो भुगतना होगा अंजाम

Terrorist jalees ansari

यूपी एसटीएफ के हत्थे चढ़े बूढ़े आतंकी डॉक्टर जलीस अंसारी (Terrorist jalees ansari) को देखकर यह अंदाजा भी नहीं लगाया जा सकता कि वह कितना खतरनाक है। जलीस अंसारी रविवार की सुबह अमौसी एयरपोर्ट से मुंबई के लिए रवाना हो गया। लेकिन जाते-जाते उसने एसटीएफ के अधिकारियों को चुनौती भी दे दी। आतंकी अंसारी ने कहा कि देश की कानून व्यवस्था लचर होने की वजह से उसका कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता। यही नहीं, उसने खुद पर लिखी एक किताब भी पढ़ने की सलाह एसटीएफ अधिकारियों को दी।


इससे पहले शनिवार की दोपहर करीब 3 बजे जलीस अंसारी को एसटीएफ और मुंबई एटीएस कानपुर लेकर पहुंची थी। यहां पूछताछ के बाद उसे सुबह अमौसी ले जाया गया। कानपुर से लखनऊ के रास्ते में भी एसटीएफ के अधिकारी जलीस अंसारी से लगातार पूछताछ करते रहे। इस दौरान उसने साफ शब्दों में एसटीएफ अफसरों को चुनौती देते हुए कहा कि कोई भी उसका कुछ बिगाड़ नहीं सकता।


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आतंकी जलीस अंसारी ने कहा कि देश की कानून व्यवस्था लचर है, 65 से ज्यादा धमाके कर चुका हूं और अब तक मुझ पर सिर्फ तीन आरोप ही साबित हुए हैं। मैंने पुलिस वालों को धमाके में मारा और वह अबतक खुद पर हुए हमले के सबूत नहीं जुटा पाई, इसी से अंदाजा लगा लो कि क्या स्थितियां हैं। आतंकी ने अधिकारियों से कहा कि कोई भी बड़ा आतंकी संगठन मेरे बिना कुछ नहीं है, जेल में रहकर मैं जो कर सकता हूं…वह कोई संगठन बाहर रहकर भी नहीं कर सकता।


सीएए-एनआरसी पर विद्रोह की भूमि तैयार


आतंकी डॉक्टर जलीस अंसारी ने एसटीएफ अधिकारियों को जानकारी दी कि सीएए और एनआरसी को लेकर पूरे देश में विद्रोह की एक बहुत बड़ी भूमि तैयार हो चुकी है…सरकार इसे नहीं समझ पाएगी तो इसका अंजाम भुगतना पड़ सकता है। इस दौरान उसने डेंजरस माइंड नाम की किताब का जिक्र किया। उसने बताया कि यह किताब मेरे ऊपर लिखी गई है, इसे पढ़ना जरूर…बहुत से तथ्यों के बारे में और जानकारी मिल जाएगा। इस किताब को हुसैन जैदी ने लिखा है। हुसैन मुंबई के रहने वाले हैं और लंबे समय तक उन्होंने अंडरवर्ल्ड और आतंकवाद पर काम कर कई लेख लिखे हैं।


कौन है आतंकी डॉक्टर जलीस अंसारी


यह वही आतंकवादी है जिसने देश में बम विस्फोटों की शुरूआत की थी। वह कम खर्चे में घातक बम बनाने की तकनीक जानता था और देश में अलग-अलग जगहों पर इसने विस्फोट कराकर लोगों की जान ली। लगभग सभी आतंकी संगठन इससे जुड़े हुए थे और यह उन्हें बम बनाकर सप्लाई करता था। उस पर आईएसआई का हाथ था और इसी नेटवर्क के जरिए वह पाकिस्तान से लेकर भारत में कहीं पर भी आसानी से छिप सकता था। देश की आर्थिक नगरी मुंबई में उसने पहला बम 1988 में ब्लास्ट किया था, यह उसका ट्रायल था जिसमें उसका हाथ भी जल गया था। इसके बाद 1994 तक उसने लगातार देश में इस तरह की वारदातों से हजारों लोगों की जान ली।


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कई वारदातें बुरका पहनकर की


वह बम बनाने के साथ ही खुद ही मौके पर जाकर विस्फोट भी करता था। मुंबई के अंडरवल्र्ड डॉन हाजी मस्तान और दाउद इब्राहिम के लिए भी उसने कई बार बम बनाया भी और विस्फोट भी किया। वह कई बार बम फोडऩे के लिए बुरका पहनकर निकलता था। उसने बुरका पहनकर ही एक पुलिस जीप में भी विस्फोट किया था, जिसमें कई पुलिस वाले घायल हुए थे। कई बार उसने बुरका पहनकर लोगों को मौत के घाट उतारा।


बम बनाना पाकिस्तान से सीखा


कुख्यात आतंकी डॉ. जलीस अंसारी मुंबई स्थित अपने क्लीनिक में ही बम बनाता औऱ नए-नए प्रयोग करता था। एक तरह से यह क्लीनिक बम बनाने की प्रयोगशाला थी। आतंक की दुनिया में उसे डॉक्टर बम के नाम से जाना जाता है। बताया जाता है कि उसे बम बनाने की तकनीक अब्दुल करीम टुंडा ने दी। टुंडा के साथ वह पाकिस्तान भी जा चुका है। टुंडा के आईएसआई नेटवर्क का इस्तेमाल कर वह लश्कर, सिमी समेत कई प्रतिबंधित संगठनों के सीधे संपर्क में आया। उसने पाकिस्तान में ही आधुनिक तरीके से बम बनाना सीखा था।


100 से ज्यादा लोगों को तैयार किया


अंसारी तकनीकी रूप से तो ताकतवर था ही ब्रेन वॉश करने में भी उसका कोई विकल्प नहीं था। 93 में बड़े धमाके करने से पहले उसने 100 से अधिक युवाओं का ब्रेन वॉश कर उन्हें अपने मूवमेंट में शामिल कर लिया था। उसके एक इशारे पर भटके हुए युवा जान देने लेने को तैयार रहते थे। कानपुर में ऊंची मस्जिद से ही १९९३ तक आतंकी संगठनों का नेटवर्क संभाला था। इसी मस्जिद में वह अपने नए साथियों को मिलने के लिए बुलाया करता था। इस बार भी वह कानपुर अपने पुराने साथियों से ही मिलने आया था, पर एसटीएफ के हाथ लग गया।


ऐसे पकड़ा गया आतंकी जलीस अंसारी


एसटीएफ को पता था कि डॉ. जलीस अंसारी ने 1991 से 1992 के बीच कानपुर के कई चक्कर लगाए थे। तब भी वह ऊंची मस्जिद के पास ही रुका था और वहीं पर अपने लोगों के साथ नमाज अदा करता था। इस दौरान एटीएस समेत अन्य खुफिया एजेंसियां इसके बारे में जानकारियां जुटा रही थीं। उस दौरान ही इसका रिकार्ड तैयार किया गया था। यह वर्तमान में एटीएस समेत अन्य एजेंसियों का पास मौजूद था। जब मुंबई से वह लापता हुआ तो एटीएस ने उसके पुराने ठिकानों को खंगालना शुरू किया। इसमें कानपुर प्रमुख ठिकाना था। इसी आधार पर एसटीएफ ने उसे इतनी जल्दी गिरफ्तार करने में कामयाबी हासिल कर ली।


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