OIC की बैठक में पाकिस्तान की भयंकर बेइज्जती!, 5 मुस्लिम देश आए भारत के साथ

अफगानिस्तान (Afghanistan) पर ओआईसी (OIC) की बैठक बुलाना पाकिस्तान (Pakistan) को भारी पड़ गया है, बैठक में इमरान खान की भयंकर बेइज्जती हुई है, वहीं भारत ने अफगानिस्तान मामले पर पाक समते पूरी दुनिया को अपनी ताकत का अहसास करवा दिया है. रविवार को पांच मुस्लिम देशों ने ओआईसी की बैठक की जगह भारत मध्य एशिया वार्ता को तरजीह दी है. इस सभी देशों ने अफगानिस्तान को लेकर भारत के रूख का समर्थन किया है. इससे पहले भारत ने नवंबर में अफगानिस्तान पर पश्चिम एशिया के देशों से वार्ता की थी.

रविवार को अफगानिस्तान केंद्रित दो देशों की बैठकों पर पूरी दुनिया की नजरें थी. पाकिस्तान की मेजबानी में आआईसी देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक में 20 देशों के मंत्री ही शामिल हुए. बाकी ने अपने दूत भेजे. वहीं भारत मध्य एशिया वार्ता में तुर्कमेनिस्तान, कजाखस्तान, ताजिकिस्तान, किर्गिस्तान औऱ उज्बेकिस्तान के विदेश मंत्री शामिल हुए. पांच देशों ओआईसी के अहम सदस्य हैं.

इनमें भी तीन देशों उज्बेकिस्तान, तुर्कमेनिस्तान व ताजिकिस्तान की सीमा अफगानिस्तान से लगती है. अकेले ताजिकिस्तान की 1344 किसी सीमा जुड़ी हुई है. जाहिर तौर पर यही वे देश हैं जो अफगानिस्तान में हो रहीं घटनाओं से सीधे तौर पर प्रभावित होते हैं. इसके बावजूद इन देशों ने पाकिस्तान की मेजबानी में हो रही विदेश मंत्रियों की बैठक की जगह मध्य एशिया वार्ता को तवज्जो दिया है.

अफगानिस्तान के नाम पर बुलाई गई इस बैठक में पाकिस्तान को उस समय और भी शर्मिंदगी झेलनी पड़ी जब उन्होनें तालिबान के कार्यवाहक विदेशमंत्री अमीर खान मुत्तकी की मौजूदगी पर सवाल उठा दिए. ओआईसी के मेंबर देशों ने पाकिस्तान से सवाल किया कि तालिबान ओईसी का मेम्बर नहीं है. अफगानिस्तान में कोई अधिमान्य सरकार नहीं है तो फिर अमीर खां मुत्तकी किस हैसियत से इस समिट में शामिल हुए हैं. इससे भी बड़ी शर्मिंदगी की बात यह रही कि अमीर खान मुत्तकी से पाकिस्तान के विदेशमंत्री के अलावा किसी ने भी साइड लाइन मीटिंग नहीं की.

पाकिस्तानी मीडिया में भी इन सवालों को पूछा जा रहा है. हालांकि, इस मीटिंग से पहले ही कुछ जर्नलिस्टों से कह दिया था कि यह मीटिंग अफगानिस्तान के नाम पर नहीं बल्कि अल्लाह के नाम पर देने के लिए बुलाई गई है. इस मीटिंग में हुआ भी कुछ ऐसा ही पाकिस्तान की ओर से इस मीटिंग में प्रस्ताव रखा गया कि अफगानिस्तान को मदद दी जाए और चूंकि पाकिस्तान तालिबान की मदद के लिए अपने सारे संसाधन ही नहीं इज्जत भी दांव पर लगा रहा है, इसलिए पाकिस्तान को भी मदद दी जाए. पाकिस्तान की ओर से यह भी प्रस्ताव रखा कि गया कि अफगानिस्तान के नाम इकट्ठे होने वाले फण्ड को पाकिस्तान में रखा जाए और यहीं से फण्ड्स का डिस्ट्रीब्यूशन हो. ऐसा बताया जाता है कि पाकिस्तान के इस प्रस्ताव को किसी ने तवज्जोह नहीं दी है.

ओआईसी के 51 में से 27 देशों के अघोषित बहिष्कार पर पाकिस्तान के विदेशमंत्री ने बड़ी बेशरमाई से कहा कि, चूंकि यह इजलास जल्दबाजी में बुलाया गया था इसलिए बाकी देश शामिल नहीं हो सके. अगर इजलास में देर की जाती तो इतने देश भी शामिल नहीं हो पाते. शाह महमूद कुरैशी जानते हैं कि बाकी दुनिया ही नहीं बल्कि मुस्लिम देश भी अफगानिस्तान पर पाकिस्तानी पहल को मंजूर नहीं करते हैं. इसीलिए सऊदी अरब को पटा-सटा कर ओआईसी का इजलास इस्लामाबाद में तो बुला लिया लेकिन अब घोर बेइज्जति का सामना कर रहे हैं.

Also Read:‘दिवालिया हो गया पाकिस्तान, जनता को बरगला रही इमरान सरकार’, टैक्स एजेंसी के पूर्व प्रमुख ने खोली पोल

( देश और दुनिया की खबरों के लिए हमें फेसबुक पर ज्वॉइन करें, आप हमें ट्विटर पर भी फॉलो कर सकते हैं. )