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‘जब आप होली-दिवाली मनाते तब एक सिपाही अपनी खुशियां छोड़कर सुरक्षा में तैनात रहता है, बंद करें पुलिसकर्मियों का मजाक बनाना’

Home Minister Amit Shah became emotional while speaking on the Police Department in Delhi

केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह (Amit shah) ने शुक्रवार को पुलिस (Police) को लेकर जनता के नजरिए में बदलाव लाने की जरूरत पर बल दिया. उन्होने कहा कि लोगों का पुलिसकर्मियों को मजाक नहीं बनाना चाहिए. मजाक बनाने से पहले ये सोचना चाहिए पुलिस हमारे लिए कितना कुछ करती है. दरअसल, अमित शाह लखनऊ में दो दिन से चल रही 47वीं ऑल इंडिया पुलिस साइंस कांग्रेस के समापन कार्यक्रम में शामिल हुए थे, इस दौरान ही उन्होने ये बातें कहीं.


बंद करें पुलिसकर्मियों का मजाक बनाना

अमित शाह ने कहा कि पुलिसकर्मी का अक्सर मज़ाक बनाया जाता है, पुलिसकर्मी को बड़े तोंद वाला दिखाया जाता है. लेकिन देश की जनता को ये अनुभूति करनी होगी कि जब कोई भाई अपनी बहन के घर राखी बंधवाने जाता है, तब भी पुलिस का सिपाही ट्रैफिक की जिम्मेदारी संभालता है. जब आप होली या दिवाली मना रहे होते हैं तो उस दिन भी पुलिस का जवान लॉ एंड ऑर्डर की चिंता करता है. लोग छुट्टी लेकर घर जाते हैं, होली खेलते हैं लेकिन पुलिसकर्मी इस चिंता में रहते हैं कि कहीं कोई दंगा न हो जाए. पुलिस विभाग के 35 हजार जवानों ने अपनी शहादत दी जिसके बाद इस देश के लोग आज खुद को सुरक्षित महसूस करते हैं. इसलिए जरूरी है कि जनता और पुलिस दोनों एक दूसरे को देखने का नजरिया बदले. देश के एक-एक नागरिक के मन में पुलिस के प्रति सम्मान की भावना पैदा करना, ये हमारी प्राथमिकता है. जब तक ये नहीं कर सकते तब तक हम आंतरिक सुरक्षा को ठीक से नहीं निभा सकते.


IPC और CrPC में बदलाव के दिए संकेत

गृह मंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि भारत सरकार ने आईपीसी (IPC) और सीआरपीसी (CrPC) में आमूल-चूल परिवर्तन का एक बहुत बड़ा काम हाथ में लिया है. हम इसी सत्र में आर्म्स एक्ट बदल रहे हैं, नारकोटिक्स के बारे में भी कानून संशोधन कर रहे हैं और उसके बाद आईपीसी और सीआरपीसी में बदलाव करेंगे. उन्होंने कहा कि गुजरात का गृहमंत्री रहते हुए भी मैं एक बार पुलिस साइंस कांग्रेस में शामिल हुआ था. कई बार सोचता हूं कि उद्घाटन में जाना फायदेमंद है या समापन में? समापन में जाना अच्छा होता है क्योंकि तब कार्यक्रम में मिले विचारों का मंथन होता है. बीपीआरएनडी का काम समस्याओं को ढूंढकर उसका समाधान तलाशना है. पुलिस साइंस कांग्रेस में मिले विचारों पर बीपीआरएनडी काम करता है. 1960 से 2019 तक पुलिस साइंस कांग्रेस में मिले शोधपत्रों का क्या हुआ इस पर मंथन होना चाहिए.


पुलिसिंग में सुधार के लिए फॉरेंसिक विश्वविद्यालय

अमित शाह ने कहा कि केंद्र में जब मोदी सरकार आई देश की अर्थव्यवस्था दुनिया में 11वें स्थान पर थी पर अब यह सातवें स्थान पर है. भारत की 130 करोड़ जनसंख्या पूरी दुनिया के लिए बड़ा मार्केट है. प्रधानमंत्री मोदी का सपना है कि 2024 तक देश की अर्थव्यवस्था पांच ट्रिलियन की बने. जिसके लिए बेहतर कानून व्यवस्था की जरूरत है जो कि बेहतर पुलिसिंग से ही मिल सकती है. उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार एक फॉरेंसिक विश्वविद्यालय बनाने जा रही है जिससे कि पुलिसिंग में सुधार किया जा सके. जिन राज्यों में विश्वविद्यालय नहीं बनाया जा सकता वहां कॉलेज बनाए जाएंगे. जिस बच्चे ने ये तय किया है कि मुझे प्रोफेशनल पुलिस में ही जाना है, उसको वहां इस विषय की शिक्षा दी जाएगी. इसमें फोरेंसिक साइंस, क़ानून, Prosecution और Investigation के साथ साथ पुलिस स्टेशन कैसे चलाया जाये, उसकी भी शिक्षा दी जाएगी. गृहमंत्री ने कहा कि यह पुलिस साइंस कांग्रेस का 47वां आयोजन है. 1960 से ऐसे आयोजन किए जा रहे हैं. मुझे लगता है कि अब तक इन आयोजनों में जितने प्रस्ताव रखे गए हैं उनमें से कितने लागू हुए इस पर भी एक आयोजन होना चाहिए.


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