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बरेली: इनोवा खरीदने के मामले में DIG और रिटायर्ड सिपाही में विवाद, एक ने दर्ज कराई FIR तो दूसरे ने दी तहरीर

DIG wireless anil kumar

उत्तर प्रदेश के बरेली (Bareilly ) जनपद में इनोवा खरीदने के मामले को लेकर डीआईजी वायरलेस अनिल कुमार (DIG wireless anil kumar) और रिटायर्ड सिपाही देवेंद्र के बीच विवाद का मामला सामने आया है। डीआईजी ने सिपाही पर धोखाधड़ी करने का आरोप लगाते हुए एफआईआर दर्ज कराई है। वहीं, सिपाही के परिजनों ने भी डीआईजी के खिलाफ एसपी क्राइम को तहरीर देकर दी है।


डीआईजी ने सिपाही के खिलाफ दर्ज कराई एफआईआर


पूरा मामला सुभाष नगर थाना क्षेत्र के बदायूं रोड का है। सूत्रों ने बताया कि लॉकडाउन से पहले रिटायर्ड सिपाही ने 5 लाख रुपए एडवांस देकर डीआईजी से इनोवा गाड़ी खरीदी थी। दोनों के बीच यह तय हुआ कि लॉकडाउन खत्म होने के बाद पूरी रकम देकर गाड़ी का रजिस्ट्रेशन भी करा लिया जाएगा। लेकिन केपी सिंह नामक कथित रिश्तेदार के जरिए हुए इस सौदे में अब नया विवाद खड़ा हो गया है।


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डीआईजी वायरलेस अनिल कुमार ने रिटायर्ड सिपाही देवेंद्र के खिलाफ लखनऊ के सुशांत गोल्फ सिटी थाने में एफआईआर दर्ज कराई है। एफआईआर दर्ज होने के बाद बरेली की सुभाष नगर थाना पुलिस ने रिटायर्ड सिपाही के घर दबिश देकर डीआईजी की इनोवा गाड़ी बरामद कर ली है। पुलिस के मुताबिक, इनोवा गाड़ी डीआईजी की पत्नी पुष्पा अनिल के नाम पर रजिस्टर्ड है।


5 लाख दिया एडवांस, 17.80 लाख में हुआ सौदा


वहीं, बरेली के रहने वाले रिटायर्ड सिपाही देवेंद्र का आरोप है कि उनका डीआईजी अली से 17.80 लाख रुपए में गाड़ी का लिखित सौदा हुआ था। उन्होंने 5 लाख एडवांस देकर मुरादाबाद निवासी जकी खान से गाड़ी ले ली थी। बाकी की रकम लॉकडाउन पूरा होने के बाद देने की बात तय हुई थी। लेकिन लगातार लॉकडाउन आगे बढ़ रहा है जिस कारण वह डीआईजी को पेमेंट नहीं कर पाए और न हीं गाड़ी अपने नाम ट्रांसफर करा पाए। जिसको लेकर डीआईजी की तरफ से एक एफआईआर दर्ज कराई गई है।


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अब सिपाही देवेंद्र के परिजनों ने भी डीआईजी और उनकी पत्नी सहित 4 के खिलाफ एसपी क्राइम को तहरीर दी है, जिसमें आरोप है कि उन पर गलत तरीके से एफआईआर दर्ज करा दी गई और जबरन उनके घर से गाड़ी उठा ली गई। इतना ही नहीं देवेंद्र के परिजनों द्वारा दी गई तहरीर में बरेली के सुभाष नगर पुलिस पर भी रिश्वत का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि सुभाषनगर थाना पुलिस ने इस मामले के निपटारे के लिए 25 हजार की डिमांड की थी। उसके परिजनों ने 20 हजार रुपये मौके पर दे दिए और 5 हजार रुपये इंस्पेक्टर के खाते में डाल दिए।


उधर, इंस्पेक्टर का कहना है कि उनपर लगाए गए सारे आरोप सरासर गलत हैं, वह डीआईजी की गाड़ी बरामद करने के लिए रिटायर्ड सिपाही देवेंद्र के घर जरूर गए थे।


डीआईजी बोले- रिटायर्ड सिपाही ने तोड़ा वादा


डीआईजी अनिल कुमार का कहना है कि उन्होंने 4-5 महीने पहले रिटायर्ड सिपाही को अपनी गाड़ी बेची, उसने सिर्फ 2 लाख रुपए देकर गाड़ी ले ली। लेकिन 4-5 महीने बीत जाने के बाद भी कोई पैसा नहीं दिया, जिसके बाद उन्होंने एफआईआर दर्ज करवा दी। उन्होंने कहा कि मैं नहीं चाहता था कि कोई एफआईआर दर्ज हो, लेकिन सिपाही देवेंद्र ने गाड़ी खरीदते समय जो वादा किया, उसे तोड दिया। ऐसे में हमें कानूनी प्रक्रिया अपनानी पड़ी।


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मामले में एसपी क्राइम रमेश कुमार भारतीय का कहना है कि गाड़ी खरदी को लेकर विवाद हुआ है।रिटायर्ड सिपाही देवेंद्र को डीआईजी साहब की गाड़ी लेकर थाने बुलवाया गया था लेकिन वह नहीं पहुंचा। जिसके बाद डीआईजी साहब को आशंका हुई कि देवेंद्र ने उनके साथ कोई गड़बड़ी करने की प्लानिंग तो नहीं की है, जिसके बाद डीआईजी ने देवेंद्र के खिलाफ लखनऊ में एफआइआर कराई है। फिलहाल गाड़ी बरामद कर ली गई है। बाकी की कार्रवाई लखनऊ से होगी।


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