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बदायूं: गर्भवती महिला कांस्टेबल से SO ने करवाई पैदल गश्त, पेट में ही बच्चे की मौत

Budaun

यूपी के बदायूं (Budaun) जिले के मूसाझाग थाने की एक महिला सिपाही के पति ने एसओ पर उत्पीड़न का आरोप लगाया है। महिला सिपाही के पति का आरोप है कि एसओ के छुट्टी न देने और इधर-उधर ड्यूटी कराने से उसकी पत्नी के पेट में ही बच्चे की मौत हो गई। महिला सिपाही के पति ने एसएसपी को शिकायती पत्र सौंपकर कार्रवाई करने की मांग की है।


अमर उजाला में छपी खबर के मुताबिक, मूलरूप से बागपत जनपद निवासी महिला कांस्टेबल राधा ने साल 2016 में पुलिस विभाग ज्वाइन किया था। उन्हें पहली पोस्टिंग मूसाझाग थाने में मिली है। इसी दौरान राधा की शादी शाहजहांपुर जिले के गढ़िया रंगीन क्षेत्र के ग्राम पृथ्वीपुर निवासी आनंद सिंह से हुई थी। रविवार को एसएसपी ऑफिस पहुंचे महिला सिपाही के पति आनंद प्रताप सिंह ने एसएसपी को शिकायती पत्र सौंपा।


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उन्होंने एसएसपी को बताया कि मूसाझाग एसओ ललित भाटी ने उसकी पत्नी महिला सिपाही राधा को बहुत प्रताड़ित किया है, राधा अप्रैल से गर्भवती थी। जैसे-जैसे समय आगे बढ़ता गया, वैसे डॉक्टरों ने उसे आराम करने की सलाह दी थी। नवंबर में उसका आठवां महिला चल रहा था। उस दौरान राधा ने अवकास लेने के लिए एसओ को प्रार्थना पत्र दिया था, लेकिन एसओ ने अवकाश स्वीकृत नहीं किया।


इसके बाद राधा को एक महिला का पोस्टमार्टम कराने के लिए भेज दिया गया। यही नहीं, राधा की एंटी रोमियो और हमराह की ड्यूटी कराई गई। जिससे उसका दर्द बढ़ता चला गया। इसके बावजूद एसओ को तरस नहीं आया। उन्होंने मातृत्व अवकाश तो नहीं दिया लेकिन उससे अभद्र भाषा का प्रयोग किया। 18 दिसंबर को एसआई सुनील के साथ उससे बरसुनियां तक एंटी रोमियो दल में पैदल गश्त कराई गई। इससे उसकी हालत और बिगड़ गई।


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अगले दिन से एक हास्पिटल में भर्ती कराया, जहां डॉक्टरों ने बताया कि उसके बच्चे की पेट में मौत हो गई। इससे डॉक्टरों को उसकी डिलीवरी करनी पड़ी। आरोप है कि एसओ ने न सिर्फ उसे प्रताड़ित किया है। बल्कि उसकी पत्नी मातृत्व सुख से भी वंचित रह गई। पति ने एसएसपी को पत्र देकर कार्रवाई की मांग की है।


उधरा एसओ मूझाझाग ललित भाटी ने बताया कि मूसाझाग थाने में राधा अकेली कांस्टेबल तैनात नहीं है और भी कांस्टेबल हैं। दो महिला कांस्टेबलों ने अपने परिवार वालों को अपने साथ रखा। हम कहते हैं कि हमने अवकाश नहीं दिया, तो वह बड़े अधिकारियों के पास जा सकती थी। उसे अवकाश की जरूरत थी। कोई अवकाश देने से मना नहीं करता। ये सिर्फ बेवजह आरोप लगाने की बात है।


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