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‘नशा और शराब’ का कारोबार बंद करें तथा भारत को ‘नशामुक्त देश’ घोषित करें, भाजपा नेता की प्रधानमंत्री से मांग

भारतीय जनता पार्टी के नेता और सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता अश्विनी उपाध्याय (Ashwini Upadhyay) ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से नशा और शराब के व्यापार को बंद करने की मांग की है. इतना ही नहीं उन्होने भारत को नशामुक्त देश घोषित किए जाने की मांग भी की है. उपाध्याय ने इसके लिए आर्टिकल 47 का हवाला भी दिया. उनका कहना है कि संविधान निर्माता भी यही चाहते थे, इसलिए उनके सपनों को पूरा करने के लिए नशा-शराब का व्यापार प्रतिबंधित करके भारत को नशामुक्त देश घोषित किया जाए.


अश्विनी उपाध्याय ने रविवार को ट्वीट कर लिखा, “आदरणीय प्रधानमंत्री, जी करोड़ों माता-पिता अपने नशेड़ी शराबी जुआरी बेटों से तथा करोड़ों बेटे-बेटियां अपने नशेड़ी शराबी जुआरी पिता से परेशान हैं, करोड़ों पत्नियां अपने नशेड़ी शराबी जुआरी पति से तथा करोड़ों भाई-बहन अपने नशेड़ी शराबी जुआरी भाइयों से परेशान हैं. अपने ट्वीट में उपाध्याय ने पीएम मोदी और उनके कार्यालय को टैग किया है”.



उपाध्याय ने अपने दूसरे ट्वीट में लिखा, “लोग नशा छोड़कर योग सीख रहे हैं, “बलात्कार-व्याभिचार कम हो रहा है, गांजा अफीम चरस जूआ छूट रहा है, बीड़ी सिगरेट गुटका शराब छूट रहा है, कई प्रकार की गलत आदतें छूट रही हैं, चोरी लूट झपटमारी मानवतस्करी बंद है, फिरौती अपहरण और नशा तस्करी बंद है, नशाबंदी के कारण अपराध कम हो रहा है”.



बीजेपी नेता यहीं नहीं रूके उन्होने एक औऱ ट्वीट कर लिखा, “गांधी-पटेल-अंबेडकर नशाबंदी चाहते थे, लोहिया-दीनदयाल जी नशाबंदी चाहते थे, सभी संविधान निर्माता नशाबंदी चाहते थे, आर्टिकल 47 नशाबंदी का निर्देश देता है, 21 दिन में गलत आदतें भी छूट जाती हैं, इसलिए नशा-शराब का व्यापार प्रतिबंधित करें और भारत को नशामुक्त देश घोषित करें”.



अश्विनी उपाध्याय का कहना है कि गांधीजी का सपना था शराब-मुक्त और नशा-मुक्त भारत. संविधान का आर्टिकल 47 भी यही कहता है अर्थात संविधान निर्माता भी शराब-मुक्त और नशा-मुक्त भारत चाहते थे. शराब और नशे के कारण अपराध और रोड एक्सीडेंट बढ़ रहा है, बीमारी और बेरोजगारी बढ़ रही है, लाखों परिवार बर्बाद हो चुके हैं तथा महिलाओं और बच्चों की जिंदगी नर्क बन गयी है, इसलिए भारत को शराब-मुक्त और नशा-मुक्त देश घोषित करना बहुत जरुरी है.


गौरतलब है कि लॉकडाउन के चलते देश के सभी शॉपिंग मॉल, दुकानें और बाजार बंद हैं. लॉकडाउन के कारण शराब की दुकानों पर ताला लगा हुआ है, जिसके कारण लोग अब नशे की बुरी आदतों के बगैर की रहना धीरे-धीरे सीख रहे हैं. बता दें कि गुजरात, बिहार, मिज़ोरम और नागालैंड में पूर्ण रूप से शराबबंदी है. 2016 में बिहार में शराबबंदी लागू हुई.


हरियाणा ने भी 1996 में राज्य में शराबबंदी का प्रयोग किया था. लेकिन 1998 में इसे हटा लिया गया. अधिकारियों ने अनुमान लगाया कि शराबबंदी के दौरान प्रदेश राजस्व के मामले में 1200 करोड़ रुपये पीछे चला गया. 1994 में आंध्रप्रदेश में भी शराब पर प्रतिबंध लगाया गया था लेकिन यह फैसला केवल 16 महीने ही चल पाया, और 1995 में यह प्रतिबंध हटा दिया गया था. कुल मिलाकर शराब पर प्रतिबंध लगाने के आड़े राजस्व आ जाता है जिसके चलते राज्य सरकारें इसे लागू करने से बचती रहीं हैं.


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