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यूपी में कांग्रेस की जमीन तैयार करने में जुटी प्रियंका गांधी, कल हो सकता है बड़ा फैसला

कांग्रेस महासचिव और उत्तर प्रदेश की प्रभारी प्रियंका गांधी वाड्रा (Priyanka Gandhi Vadra) दो दिवसीय दौरे पर मंगलवार को अपनी मां सोनिया गांधी के संसदीय क्षेत्र रायबरेली (Raibareli) पहुंच रही हैं. रायबरेली के भुएमऊ गेस्ट हाउस में प्रियंका गांधी प्रदेश की अपनी नई टीम के लिए कार्यशाला का आयोजन कर रही हैं, जिसमें प्रदेश अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू और उनकी पूरी कार्यकारिणी शामिल होगी. कार्यशाला में एआईसीसी के आधा दर्जन से अधिक पदाधिकारी प्रदेश अध्यक्ष की टीम को अनुशासन के साथ विपक्षी दलों से दो-दो हाथ करने के गुर सिखाएंगी. दो दिन तक चलने वाले प्रक्षिशण सत्र प्रियंका गांधी की निगरानी में संचालित होगी. इस वर्कशॉप में प्रदेश कांग्रेस पार्टी के पदाधिकारी शामिल होंगे.


प्रियंका गांधी की पाठशाला का रायबरेली में आयोजन ऐसे समय हो रहा है, जब उनकी पार्टी के दो विधायक अदिति सिंह (Aditi Singh) और राकेश सिंह (Rakesh Singh) लगातार पार्टी विरोधी काम कर रहे है और पार्टी ने उनको नोटिस दे रखा है. ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि क्या दोनों विधायक प्रियंका की पाठशाला में शामिल होंगे या नहीं. कांग्रेस के जिलाध्यक्ष पंकज तिवारी का कहना है कि प्रियंका गांधी की कार्यशाला का मकसद पार्टी जनता के मुद्दों को सड़क से लेकर सोशल मिडिया पर जोरदार तरीके से उठा सके.


इसी कड़ी में माना जा रहा है कि प्रियंका गांधी की मौजूदगी में 23 अक्टूबर को रायबरेली के दिवगंत नेता अखिलेश सिंह के भतीजे मनीष (Manish Singh) सिंह कांग्रेस में शामिल हो सकते हैं. मनीष सिंह को कांग्रेस में शामिल करने की सारी औपचारिकता पूरी हो गई है. केवल इसकी घोषणा होनी बाकी है. पिछले दिनों रायबरेली सदर से विधायक अदिति सिंह के भाजपा खेमे के करीब जाने के बाद कांग्रेस अपने हो गढ़ में पूरी तरह से खत्म होती नजर आ रही थी. इसी के चलते कांग्रेस विधायक अदिति सिंह के चचेरे भाई मनीष सिंह को पार्टी जॉइन कराकर रायबरेली में बड़ी जिम्मेदारी देने की तैयारी हो चुकी है.


मनीष सिंह 2017 में बसपा के टिकट पर हरचंदपुर से चुनाव लड़े थे, लेकिन कांग्रेस के विधायक राकेश सिंह से चुनाव हार गए थे. मौजूदा स्थिति में राकेश सिंह भी कांग्रेस से बगावत कर चुके है और इसकी वजह है उनके भाई दिनेश प्रताप सिंह. जो कभी रायबरेली में कांग्रेस के लिए आंख के तारे हुआ करते थे, लेकिन 2019 में भाजपा ने दिनेश प्रताप को न केवल पार्टी में शामिल किया. बल्कि, उन्हें सोनिया गांधी के खिलाफ लोकसभा का उम्मीदवार भी बना दिया. इसके बाद राकेश सिंह ने भी कांग्रेस से दूरी बना ली.


राकेश सिंह की भी भाजपा खेमे के करीब होने की वजह से मनीष सिंह की जॉइनिंग को कांग्रेस के मास्टर प्लान के तहत देखा जा रहा है. बता दें कि मनीष सिंह के पिता अशोक सिंह रायबरेली से दो बार सांसद भी रह चुके हैं. ऐसे में वो रायबरेली के लिए पुराने चेहरे हैं और इसका फायदा कांग्रेस को हो सकता है.


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