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क्या कुछ पक रहा है उत्तराखंड में, डॉ निशंक की अचानक बढ़ी सक्रियता के तलाशे जा रहे मायने

उत्तराखंड की सियायत में चल रही हलचलों के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री डॉ रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ (Dr Ramesh Pokhriyal Nishank) की उत्तराखंड में अचानक बढ़ी सक्रियता ने सियासी गलियारों में कई तरह की चर्चाओं को जन्म दे दिया है। चर्चा ये भी कि क्या उत्तराखंड की सियायत में कुछ पक रहा है।


डॉ निशंक उत्तराखंड के बड़े राजनेता हैं। वह विधायक से लेकर मुख्यमंत्री तक सभी पदों पर रह चुके हैं। पिछले साढे छह सालों वे जहां हरिद्वार से सांसद हैं तो वहीं पिछले डेढ़ साल से वे केंद्र में शिक्षा मंत्री के पद पर विराजमान है। निशंक इस दौरान लगातार उत्तराखंड में समय दे रहे हैं। वे सामान्य सी बैठकों को भी पूरी तवज्जो दे रहे हैं। कार्यकर्ताओं के घरों पर जाकर उनके हालचाल ले रहे हैं। शुभकामना और सांत्वना हेतु कार्यकर्ताओं के घरों पर जाकर उन्होंने अपनी पुरानी टीम को सक्रिय भी कर दिया है।


सोशल मीडिया उनके कार्यक्रमों को लेकर भरा हुआ है। राज्य में इस दौरान वे निरंतर टीवी में दिख रहे हैं और अखबारों में छप रहे हैं। राजनीति के जानकार मानते हैं कि डॉ निशंक के हर कदम के पीछे मायने होते हैं और उनकी सक्रियता के क्या मायने हैं इसके कयास जारी है। वे निरंतर हरिद्वार कुंभ की तैयारियों का जायजा ले रहे अधिकारियों को डांट फटकार रहे हैं।


2011 में मुख्यमंत्री रहते डॉ निशंक सफल कुंभ करा कर वाहवाही बटोर चुके हैं। वे लगातार अधिकारियों को निर्देशित कर रहे हैं। अखाड़ों के संतों से निरंतर बैठकर कुंभ में आने वाली दिक्कतों के समाधान पर अभी से चर्चा कर रहे हैं। कुंभ को लेकर वे राज्य सरकार से ज्यादा गंभीर और सक्रिय दिखाई दे रहे हैं।


निशंक को राजनीति का महारथी माना जाता है। जनता से जुडे़ छोटे मुद्दों को भी चर्चा में लाने के वे सिद्धहस्त हैं। यहां तक कि हाल ही में उन्होंने उड्डयन से जुड़ी बैठक भी ली। सोशल मीडिया पर लोग उनकी सक्रियता को लेकर तमाम कयास लगा रहे।


निशंक की सक्रियता को लेकर मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के कैंप में भी बेचैनी देखी जा रही है। निशंक का राज्य के विधायकों से लगातार संवाद, कार्यकर्ताओं के हाल चाल लेना राजनीतिक मायनों के हिसाब से ही देखा जा रहा है।


निशंक केंद्रीय योजनाओं में अपना श्रेय लेने से भी नहीं चूक रहे। इसमें दो राय नहीं कि निशंक नौकरशाही में विशेष प्रभाव रखते हैं और उसे आड़े हाथों लेना जानते भी हैं। इस दौरान निशंक का यह अंदाज उनके समर्थकों को खूब भा रहा है, वहीं दूसरी ओर मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह कैंप में इसे लेकर बेचैनी देखी जा रही।


निशंक की सक्रियता क्या दिल्ली दरबार के इशारे पर है या राज्य में कोई सियासी हलचल की भनक निशंक को है। इन सब पर मंथन का दौर जारी है। सियासत में माहिर निशंक की सक्रियता भविष्य में क्या गुल खिलाएगी वह आने वाला वक्त ही बताएगा, बहरहाल सर्द भरे मौसम में भी उत्तराखंड में चर्चाओं का दौर गरम है।


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