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यूपी BJP में होने जा रही पीएम मोदी के करीबी नौकरशाह की एंट्री, योगी सरकार में मिल सकती अहम जिम्मेदारी

उत्तर प्रदेश भारतीय जनता पार्टी में एक और नौकरशाह की एंट्री होने जा रही है. गुजरात कैडर के 1988 बैच के आईएएस अरविंद कुमार शर्मा (IAS Arvind Kumar Sharma) गुरुवार को बीजेपी जॉइन करेंगे. पीएम मोदी के नजदीकी लोगों में शुमार अरविंद एकाएक वीआरएस लेकर यूपी में एमएलसी चुनाव (UP MLC Election) के बीच बीजेपी (BJP) से जुड़े रहे हैं. ऐसे में विधान परिषद भेजे जाने से लेकर उनकी दूसरी बड़ी भूमिकाओं तक के कयास लग रहे हैं.  सूर्य के उत्तरायण होने के साथ ही यूपी की राजनीति में उनकी एंट्री पार्टी में संगठन से लेकर सरकार तक कईयों की धड़कने बढ़ा सकती है.


मौजूदा समय में यूपी में केशव प्रसाद मौर्य और दिनेश शर्मा दो उपमुख्यमंत्री है लेकिन अब ऐसी सियासी खबरे सामने आ रही हैं कि जल्द ही राज्य को तीसरा मुख्यमंत्री मिल सकता है. प्रदेश में तीसरे डिप्टी सीएम को लेकर अटकलें तेज हो गई है. सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार इस बार जिनकों डिप्टी सीएम बनाया जा सकता है वे पीएम मोदी के खास अरविंद शर्मा हैं. यूपी के सियासी गणित के लिहाज से अरविंद न जातीय समीकरण पर फिट हैं, न उनकी कोई राजनीतिक जमीन है। इसलिए इन दावों की परख अभी बाकी है.


कौन हैं अरविंद शर्मा ?

पॉलिटिकल साइंस में फर्स्ट क्लास से मास्टर डिग्री प्राप्त ब्यूरोक्रेट का जन्म उत्तर प्रदेश के मऊ जिले में 11अप्रैल 1962 को हुआ था. वह भूमिहार ब्राह्मण समुदाय से आते हैं. इलाहाबाद विश्वविद्यालय के विद्यार्थी रहे अरविंद 1988 बैच के गुजरात कैडर के आईएएस रहे हैं. उन्होंने 2001 से लेकर 2013 तक गुजरात के सीएम नरेंद्र मोदी के साथ काम किया है. जब नरेंद्र मोदी पीएम बने तो वो अपने साथ अरविंद कुमार शर्मा को पीएमओ लेकर आ गए.


2014 में वह पीएमओ में संयुक्त सचिव के पद पर रहे. उसके बाद प्रमोशन पाकर सचिव बने थे. लॉकडाउन के बाद मुश्किल समय में पीएम मोदी ने अरविंद शर्मा पर एक बार फिर से विश्वास जताते हुए उन्हें सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उपक्रम (एमएसएमई) मंत्रालय में सचिव के पद पर भेजा. हालांकि कई राज्यों में अभी राज्यपाल के पद खाली हैं, इनमें कुछ केंद्रशासित प्रदेश शामिल हैं. चर्चा है कि उन्हें इन राज्यों में से कहीं का राज्यपाल भी बनाया जा सकता है, लेकिन सवाल यह है कि राज्यपाल पद के लिए बीजेपी की सदस्यता जरुरी नहीं थी. लखनऊ में उनकी ज्वाइनिंग भविष्य की राजनीति की ओर संकेत दे रही है.


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