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यूपी विधानसभा उपचुनाव: दबाव बनाने की स्थिति में नहीं सहयोगी दल, सभी सीटों पर अपने उम्मीदवार उतार सकती है बीजेपी

जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल 370 हटाए जाने के बाद जहां आमजन में भाजपा का आकर्षण बढ़ा है वहीं सहयोगी दलों का दबाव भी कम हुआ है. सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी को पहले ही किनारे कर चुकी भाजपा अब अपना दल (एस) और निर्बल इंडियन शोषित हमारा आम दल (निषाद) को भी पहले की तरह महत्व नहीं दे रही है. अब इन दलों की वह स्थिति भी नहीं रही कि दबाव बना सकें. मंत्रिमंडल विस्तार से लेकर कई मौकों पर इसकी बानगी दिखी है. उप चुनाव (UP assembly byelection) में भी इन दलों ने समझौते में सीटों की मांग की है, लेकिन भाजपा अपने ही उम्मीदवारों पर दांव लगाने की तैयारी कर रही है.


दरअसल विधानसभा चुनाव में चुनाव पूर्व गठबंधन के तहत भाजपा ने अपना दल को जो 11 सीटें दी थी, उसमें प्रतापगढ़ सदर सीट भी थी. इस सीट पर संगम लाल गुप्ता जीते थे, जिसे भाजपा ने अपने टिकट पर प्रतापगढ़ से लोकसभा चुनाव लड़ाया. इसकेबाद राज्य इकाई ने प्रतापगढ़ सदर सीट पर निर्णय लेने की जिम्मेदारी केंद्रीय नेतृत्व पर छोड़ दिया है.


उत्तर प्रदेश में विधानसभा की 13 सीटों पर उपचुनाव होने जा रहे हैं. इनमें 10 सीटें बीजेपी के पास और एक-एक सीट सपा-बसपा और अपना दल के पास है. मीडिया रिपोर्ट की मानें तो उत्तर प्रदेश विधानसभा उपचुनाव में भारतीय जनता पार्टी अपना दल के खाते की प्रतापगढ़ सदर सीट सहित सभी 13 सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारेगी. जबकि अपना दल भी प्रतापगढ़ सीट बीजेपी को नहीं देना चाहता. ऐसे में अगर इस सीट पर बीजेपी ने अपना प्रत्याशी घोषित किया तो निश्चित तौर पर दोनों दलों के रिश्तों में दरार आ जाएगी.


स्वाभाविक रूप से प्रतापगढ़ सीट पर अपना दल एस की दावेदारी है लेकिन भाजपा इसे छोड़ने के मूड में दिख नहीं रही है. यद्यपि अधिकृत रूप से इस पर कोई बोल नहीं रहा है लेकिन जम्मू-कश्मीर में एक विधान-एक निशान का फॉर्मूला लागू होने के बाद भाजपा बदले माहौल को देखते हुए सभी सीटों पर अकेले मैदान में आना चाहती है. निषाद पार्टी भी अंबेडकरनगर जिले की जलालपुर समेत एक-दो सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारने की कोशिश में है लेकिन, भाजपा अपने निषाद नेताओं को आगे करना चाहती है.


ऐसे साधा जातीय संतुलन

मोदी की पिछली सरकार में मंत्री रहीं मीरजापुर की सांसद व अपना दल एस की अध्यक्ष अनुप्रिया पटेल को इस बार न केंद्रीय मंत्रिमंडल में और न ही योगी मंत्रिमंडल के विस्तार में उनके एमएलसी पति आशीष सिंह को शपथ दिलाई गई. मंत्रिमंडल में कानपुर की नीलिमा कटियार से लेकर मीरजापुर के भाजपा विधायक रमाशंकर सिंह को मौका मिला और कुर्मी बिरादरी का संतुलन बना दिया.


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