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CAA हिंसा: उपद्रवियों के खिलाफ कार्रवाई पर योगी की दो टूक, अगर कोई निर्दोषों को सताएगा तो उसको उसी की भाषा में समझाएंगे

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उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) बुधवार को विधानसभा में सीएए हिंसा (CAA violence) को लेकर जमकर गरजे. इस दौरान उन्होने उपद्रवियों से लेकर विपक्ष पर खूब वार किए. हिंसा के बाद उपद्रवियों पर कार्रवाई को लेकर योगी ने दो टूक कहा कि अगर कोई निर्दोषों को सताएगा तो उसको उसी की भाषा में समझाएंगे. योगी ने विधानसभा में राज्यपाल के अभिभाषण पर चर्चा का जवाब देते हुए ये बातें कहीं.


जो निर्दोषों को सताएगा तो उसको उसी की भाषा में समझाएंगे.

मुख्यमंत्री ने कहा कि आज जो लोग सदन में संविधान की दुहाई देते हैं वहीं लोग उसे तार-तार किया करते थे. इसी सदन में कागज के गोले फेंके जाते थे. जिन लोगों ने महिलाओं की इज्जत को तार-तार किया वो महिला सशक्तिकरण की बात करते है. उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की आड़ में अगर कोई निर्दोषों को सताएगा तो उसको उसी की भाषा में समझाएंगे. 19 और 20 दिसंबर को जो लोग संविधान और तिरंगे की आड़ लेकर धरने पर बैठे थे. उनके प्रति विपक्ष की पूरी सहानुभूति है. लेकिन विपक्ष प्रदेश की 23 करोड़ जनता के प्रति सहानुभूति नहीं रखता है, अगर रखता होता तो सदन से वॉकआउट नहीं किया करता. 2 और 3 अक्टूबर 2019 को 36 घंटे सदन में गंभीर चर्चा हुई लेकिन विपक्ष बाहर रहा.


सिर पर टोपी पहनने से धर्म नहीं हो जाता

मुख्यमंत्री ने कहा कि रामराज्य कोई धार्मिक कार्य नहीं है. सिर पर टोपी पहनने से धर्म नहीं हो जाता. जो लोग राष्ट्रीय सुरक्षा को आघात पहुंचाना चाहते हैं उन्हें विपक्षियों की सहानुभूति मिलती है. अगर उनकी सहानुभूति गरीब किसानों की तरफ होती तो हमें खुशी होती. लेकिन उन लोगों के प्रति उनकी कोई सहानुभूति नहीं है.


देश से गद्दारी करने वालों को गुमनाम मौत के सिवाय कुछ नहीं मिलेगा

योगी ने देश के विभाजन के वक्त पाकिस्तान गए दलित नेता जोगेन्द्र मंडल को ‘गद्दार’ करार देते हुए विपक्ष पर कटाक्ष किया और कहा कि एक बड़े षड्यंत्र का पर्दाफाश हुआ है. पीएफआई, सिमी जैसे संगठन का परिवर्तित नाम है. इन उपद्रवियों के साथ किसी प्रकार की सहानुभूति का मतलब पीएफआई और सिमी जैसे संगठनों का समर्थन है. आप जोगेन्द्र नाथ मंडल जैसे मत बनिए. देश से गद्दारी करने वालों को गुमनाम मौत के सिवाय कुछ नहीं मिलेगा.


उपद्रवियों को मिला राजनीतिक संरक्षण

मुख्यमंत्री ने कहा कि सीएए के खिलाफ हिंसा हमें इस बारे में फिर सोचने को मजबूर करती है. आंदोलन में पीछे से हिंसा कर रहे लोगों को राजनीतिक संरक्षण मिला था. गत 15 दिसंबर को जामिया मिल्लिया इस्लामिया में हिंसा हुई तो मैंने अलीगढ़ प्रशासन को सतर्क रहने को कहा. उस रात 15 हजार छात्र सड़क पर उतरकर अलीगढ़ को जलाना चाहते थे. अंदर से पहले पत्थर और फिर पेट्रोल बम फेंके गए. उसके बाद असलहे चले. कुलपति के लिखित अनुमति देने पर ही पुलिस अंदर गयी और हल्का बल प्रयोग किया.


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