संसद में केवल 1 सीट लेकिन फिर भी बन गए श्रीलंका के PM, जानिए कौन हैं रानिल विक्रमसिंघे

गंभीर आर्थिक संकट से जूझ रहे श्रीलंका (Sri Lanka) को अपने नए प्रधानमंत्री रानिल विक्रमसिंघे (PM Ranil Wickremesinghe) में उम्मीद नजर आ रही है, और इसकी वजह भी है. वकील से नेता बने रानिल विक्रमसिंघे 45 साल से संसद में हैं और उन्होंने अगस्त 2020 में हुए आम चुनाव में अपनी यूनाइटेड नेशनल पार्टी (UNP) की बुरी तरह हार के बाद जबरदस्त वापसी की है. मजे की बात ये है कि श्रीलंका की संसद में उनकी पार्टी की केवल एक सीट है. इसके बावजूद  राजपक्षे परिवार से नजदीकी के चलते वे देश के प्रधानमंत्री बनने में कामयाब हो गए हैं.

कौन हैं रानिल विक्रमसिंघे

रानिल विक्रमसिंघे 1994 से यूनाइटेड नेशनल पार्टी के प्रमुख रहे हैं. वह अब तक 4 बार श्रीलंका के पीएम रहे चुके हैं. महिंदा के 2020 में पीएम बनने से पहले भी रानिल ही श्रीलंका के पीएम थे. 73 साल के रानिल ने वकालत की पढ़ाई की हुई है. 70 के दशक में रानिल ने राजनीति में कदम रखा और पहली बार 1977 में सांसद चुने गए थे. 1993 में पहली बार पीएम बनने से पहले रानिल उप विदेश मंत्री, युवा और रोजगार मंत्री सहित कई और मंत्रालय संभाल चुके हैं.

राजपक्षे परिवार के करीबी हैं रानिल

बता दें कि नए पीएम को नियुक्त करने से पहले गोताबया राजपक्षे से साफ कहा था कि मैं युवा मंत्रिमंडल नियुक्त करूंगा जिसमें राजपक्षे परिवार का एक भी सदस्य नहीं होगा. अलग पार्टी में रहते हुए भी रानिल विक्रमसिंघे को श्रीलंका के राष्ट्रपति गोताबाया राजपक्षे और महिंदा राजपक्षे का करीबी बताया जाता है. एक्सपर्ट्स मानते हैं कि यही कारण है कि उन्हें पीएम बनाया जा रहा है.

भारत की यात्रा पर 4 बार आए विक्रमसिंघे
विक्रमसिंघे ने भारत के साथ व्यक्तिगत संबंध बनाए और प्रधानमंत्री के रूप में अपने पिछले कार्यकाल के दौरान अक्टूबर 2016, अप्रैल 2017, नवंबर 2017 और अक्टूबर 2018 में देश का दौरा किया. इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी 2 बार श्रीलंका की यात्रा की. तत्कालीन राष्ट्रपति मैत्रीपाला सिरिसेना के विरोध के बावजूद विक्रमसिंघे ने कोलंबो बंदरगाह के पूर्वी टर्मिनल पर भारत के साथ समझौते का समर्थन किया था जिसे राजपक्षे ने 2020 में खारिज कर दिया था.

सिर्फ 28 साल की उम्र में पहली बार पहुंचे संसद
श्रीलंका को अंग्रेजों से आजादी मिलने के बाद 1949 में जन्मे विक्रमसिंघे 1977 में सिर्फ 28 साल की उम्र में ही संसद के लिए चुने गए थे. यूनिवर्सिटी में पढ़ाई के दौरान ही विक्रमसिंघे यूएनपी की यूथ लीग में शामिल हो गए थे. उस समय श्रीलंका में सबसे कम उम्र के मंत्री के रूप में उन्होंने राष्ट्रपति जयवर्धने की कैबिनेट में उन्होंने उपविदेश मंत्री का पद संभाला था. विक्रमसिंघे के प्रधानमंत्री बनने के बाद उम्मीद है कि श्रीलंका आर्थिक संकट से निकल पाएगा और भारत के साथ उसके रिश्तों में और भी मजबूती आएगी.

गोटाबाया राजपक्षे के इस्तीफे की मांग शुरू
इसी बीच श्रीलंका (Sri Lanka) के विपक्षी दलों ने राष्ट्रपति गोटाबाया राजपक्षे Gotabaya Rajapakse के इस्तीफे की भी मांग शुरू कर दी है. संसद में 17 मई को गोटाबाया राजपक्षे के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा की जाएगी. ‘द डेली मिरर’ समाचार पत्र में प्रकाशित खबर के अनुसार, कई विपक्षी दलों ने गुरुवार को हुई बैठक में इस बारे में फैसला लिया. संसद में विशेष मंजूरी मिलने के बाद इस प्रस्ताव पर चर्चा शुरू की जाएगी.

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