Dev Diwali 2021: आखिर बनारस में ही क्यों मनाई जाती है देव दिवाली, जानें वजह और महत्व

 

आज कार्तिक पूर्णिमा के दिन काशी की नगरी यानी की वाराणसी 15 लाख से भी ज्यादा दियों से जगमगाएगी। हिंदी धर्म में कार्तिक माह में आने वाली पूर्णिमा का तो विशेष महत्व है। मान्यता है कि कार्तिक पूर्णिमा के दिन ही समस्त देवी-देवता स्वर्ग से धरती पर आते हैं और गंगा स्नान करने के बाद दीपोत्सव का त्योहार मनाते हैं। देव दिवाली पर लोग अपने घर पर दीए और सुंदर-सुंदर रंगोली से मुख्य द्वार को सजाते हैं। देव दिवाली का सबसे ज्यादा उत्साह काशी में ही होता है। इसके पीछे भी एक खास वजह है। आइए आपको इसके पीछे की वजह से रूबरू कराते हैं।

ये है इसके पीछे की वजह

जानकारी के मुताबिक, धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन देवलोक से सभी देवी- देवता गण पवित्र नगरी वाराणसी यानि महाकाल की नगरी काशी में पधारते हैं। इसलिए कार्तिक मास की पूर्णिमा तिथि को काशी में बहुत साज-सज्जा की जाती है। पौराणिक कथाओं के अनुसार त्रिपुरासुर नामक राक्षस के अत्याचारों से सभी बहुत त्रस्त हो चुके थे। तब सभी को उसके आतंक से मुक्ति दिलाने के लिए भगवान शिव ने उस राक्षस का संहार कर दिया। जिससे सभी को उसके आतंक से मुक्ति मिल गई। जिस दिन भगवान शिव ने त्रिपुरासुर राक्षस का संहार किया था, वह कार्तिक पूर्णिमा का दिन था। तभी से भगवान शिव का एक नाम त्रिपुरारी पड़ा। इससे सभी देवों को अत्यंत प्रसन्नता हुई। तब सभी देवतागण भगवान शिव के साथ काशी पहुंचे और दीप जलाकर खुशियां मनाई। कहते हैं कि तभी से ही काशी में कार्तिक पूर्णिमा के दिन देव दिवाली मनाई जाती रही है। इस दिन  दीप दान का बहुत महत्व माना गया है। इसलिए इस दिन विशेष रूप से दीपदान किया जाता है।

कार्तिक पूर्णिमा के दिन न करें ये कार्य (Do Not Do These Things On Kartik Purnima)

– हिंदू धर्म में कार्तिक पूर्णिमा को बेहद पवित्र दिन माना गया है. ऐसे में इस दिन किसी से बहस न करें। आप किसी के साथ अभद्र व्यवहार और अपशब्द का प्रयोग न करें। इस दिन किसी से गाली-गलौज आदि से भी बचना चाहिए।

– कार्तिक पूर्णिमा के दिन तामसी चीजों का सेवन न करें। अगर इस दिन नॉनवेज, शराब आदि का सेवन करते हैं, तो आप जीवन में संकटों को न्यौता देते हैं।

– मान्यता है कि कार्तिक पूर्णिमा के दिन दान-पुण्य का विशेष महत्व है. पुण्य प्राप्ति के लिए खास होता है। ऐसे में किसी भी असहाय या गरीह व्यक्ति का अपमान करने से आपके पु्ण्य नष्ट हो सकते हैं।

– कहते हैं कि कार्तिक पूर्णिमा के दिन नाखून और बाल काटने से परहेज करना चाहिए। ऐसा करने से जीवन में परेशानियां घेर लेती हैं।

कार्तिक पूर्णिमा शुभ मुहूर्त (Kartik Purnima Shubh Muhurat 2021)

पूर्णिमा तिथि शुरू : 18 नवंबर, गुरुवार को दोपहर 12 बजे से

पूर्णिमा तिथि समाप्त : 19 नवंबर, शुक्रवार को दोपहर 02:26 मिनट तक

प्रदोष काल मुहूर्त : 18 नवंबर शाम 05:09 से 07:47 मिनट तक

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