अमेरिका में जारी है इमरान खान की इंटरनेशनल बेइज्जती, सभा में लगे बलूचिस्तान की आजादी के नारे

पाकिस्तान (Pakistan) के प्रधानमंत्री इमरान खान (Imran Khan) अपनी पहली आधिकारिक यात्रा पर अमेरिका (America) में हैं. लेकिन, उनकी इस यात्रा पर बाधाएं थमने का नाम नहीं ले रही है. अमेरिका पहुंचते ही इमरान का स्वागत ना होने पर पहले उनका मजाक उड़ा और अब उनके भाषण के दौरान बलूचिस्तान (Balochistan) की आजादी के नारे लगे और हंगामा हुआ है. वहीं, इनकी यात्रा के पहले संशय भी था कि कहीं इमरान खान की बेइज्जती न हो जाये. लेकिन, सोमवार को हुए भाषण के दौरान ये साफ हो गया कि अमेरिका में इमरान खान की इंटरनेशनल बेइज्जती लगातार जारी है.


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दरअसल, इमरान खान का यह दौरा कुछ अच्छा नहीं जा रहा है. पहले तो उन्हें वाशिंगटन एयरपोर्ट पर कोई बड़ा अमेरिकी अधिकारी रिसीव करने नहीं आया, वहीं रविवार को जब वह यहां एक ऑडिटोरियम में लोगों को संबोधित करने पहुंचे तो वहां बलूचिस्तान के समर्थकों ने उनका जमकर विरोध किया. बता दें इमरान खान का भाषण सुनने के लिए अमेरिका में रह रहे पाकिस्तान के लोग बड़ी संख्या में ऑडिटोरियम में पहुंचे थे. तभी बलूचिस्तान प्रांत का एक युवा अपनी सीट से खड़ा होकर पाकिस्तान के विरोध में नारे लगाने लगा. बाद में पाकिस्तान विरोधी नारे लगाने के चलते बलूचिस्तान के कुछ युवाओं को ऑडिटोरियम से बाहर निकाल दिया गया. हांलाकि, इमरान खान ने अपने भाषण को नहीं रोका.



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गौरतलब है कि अमेरिका में रह रहे बलूचिस्तान के लोग लगातार पाकिस्तान के खिलाफ अत्याचार को लेकर आवाजें उठाते रहे हैं. इनका आरोप है पाकिस्तान की सेना वहां मानव अधिकारों का उल्लंघन करती है. वहीं, अपनी पहली विदेश यात्रा से पहले इमरान खान अपने देश में चौतरफा विरोधों से घिरे हुए हैं. पाकिस्तान के सबसे बड़े प्रांत बलूचिस्तान में राजनीतिक दलों, वर्ल्ड बलोच ऑर्गनाइजेशन (WBO) और बलोच रिपब्लिकन पार्टी (BRP) ने एक जागरूकता अभियान चला रखा है. इन सबने उनके कार्यक्रम को बॉयकाट की अपील की थी.


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इसके अलावा 10 अमेरिकी सांसदों ने 19 जुलाई को ट्रंप को एक खत लिखा था. जिसमें उन्होंने पाकिस्तान के सिंध इलाके में मानवाधिकारों के उल्लंघन का मुद्दा उठाया था. उन्होंने ट्रंप से गुजारिश की थी कि ट्रंप 22 जुलाई को पाकिस्तानी पीएम के साथ होने वाली अपनी बातचीत में इस मुद्दे को भी उठाएं. अमेरिकी सांसदों ने मानवाधिकारों के उल्लंघन और अन्याय की बात उठाते हुए कहा था कि अमेरिका के पाकिस्तान को 30 हजार करोड़ डॉलर की मदद देने के बाद भी वहां पाकिस्तानी सरकार के जरिए ये मानवाधिकार का उल्लंघन और अन्याय जारी है.


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