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क्या सिर्फ योगी सरकार को बदनाम करने के लिए उन्नाव में मीडिया ने दिखाया सफ़ेद झूठ ?

एक तरफ हैदराबाद में महिला डॉक्टर के आरोपियों को पुलिस एनकाउंटर में मार गिराने पर देश में कई जगहों पर मिठाइयां बंट रही थी, आतिशबाजी हो रही थी तो वहीं उसी दिन देर रात करीब 11:40 बजे उत्तर प्रदेश का उन्नाव बीते ढाई सालों में तीसरी बार चर्चा में आया. कारण था गुरूवार को बिहार थाना क्षेत्र में पेशी पर जा रही रेप पीड़िता का जिंदगी-मौत से लड़ते हुए हार जाना. पीड़िता के पुलिस को दिए गए बयान के आधार पर पुलिस ने बिना कोई देरी किए पांचों आरोपियों को उनके घर से गिरफ्तार कर लिया.


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धरने पर बैठे अखिलेश यादव

हैदराबाद एनकाउंटर की तर्ज पर यहां भी आरोपियों के लिए वैसी ही सजा की मांग देशभर में की गई. इस मुद्दे पर सियासत भी खूब देखी गयी. कोई भी राजनीतिक दल किसी से कमतर नहीं दिखा. शुरूआत सूबे के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से हुई, जिन्होने यूपी विधानसभा के गेट पर बैठकर योगी सरकार में कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाकर इस्तीफा मांग लिया, दूसरी तरफ बसपा सुप्रीमों मायावती ने योगी सरकार को महिला सुरक्षा पर जमकर कोसा. तीसरी तरफ सूबे में अपनी खोई सियासी जमीन तलाश रही कांग्रेस की महासचिव प्रियंका गांधी बिना कोई देरी सीधे उन्नाव पीड़िता के घर पहुंच गयीं और प्रदेश सरकार को महिला सुरक्षा के मामले में असंवेदनशील बताते हुए जमकर प्रहार किए.


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पीड़िता के घर प्रियंका गांधी

इसी बीच आरोपित पक्ष की करीब 200 की संख्या में महिलाओं ने अपनी बात रखने के लिए प्रियंका को रोकना चाहा लेकिन वह नहीं रुकी. इसके बाद महिलाएं उनके काफिले के सामने सड़क पर लेट गईं. सुरक्षाकर्मियों ने बात करवाने का भरोसा देकर किनारे करा दिया. वहीं प्रियंका ने गाड़ी का शीशा तक नहीं खोला जिसपर महिलाएं हंगामा करने लगीं. प्रियंका के रवैया को देखकर पूर्व सांसद अन्नू टंडन ने गाड़ी रोककर महिलाओं से बातचीत की और न्याय का भरोसा दिलाया. आरोपित पक्ष की महिलाओं ने न्याय न मिलने पर सामूहिक रूप से आत्मदाह की धमकी दी. महिलाओं ने मीडिया पर उनका पक्ष न लेने का आरोप भी लगाया. शनिवार को पूरे दिन रेप पीड़िता का मुद्दा मीडिया में खूब गूंजा और रात योगी सरकार द्वारा न्याय का भरोसा, पीड़िता परिवार को 25 लाख का चेक, पक्का मकान की मंजूरी देकर थोड़ा ठंडा हुआ.


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स्वामी प्रसाद मौर्य पीड़िता के घर

मीडिया ने अपनी रिपोर्टिंग से प्रदेश सरकार को बैकफुट पर ला दिया. यही कारण है कि सरकार के मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य बिना कोई देरी किए पीड़िता के घर पहुंचे वहीं आर्थिक मदद के आश्वासन के बजाय सीधा पीड़ित परिवार को चेक थमा आए. जिले के डीएम, एसपी पूरे दिन पीड़िता के गांव का चक्कर लगाते रहे. जिस मीडिया ने पीड़ित परिवार की आवाज को बुलंद किया उसी पर आरोपित परिवार ने उपेक्षा का आरोप लगाया. जिसके मुताबिक मीडिया ने एकतरफा रिपोर्टिंग की. हमारे ग्राउंड रिपोर्टर ने जब आरोपित पक्ष से जब बातचीत की उन्होने पीड़िता पर बेहद गंभीर आरोप लगाए.


शुभम त्रिवेदी की बहन

क्या कहना है आरोपित पक्ष का ?

शुभम त्रिवेदी की बहन का कहना है कि अगर हमारे भाई गुनहगार हैं तो उन्हे जो चाहें सजा दी जाए, लेकिन हमें इसके सबूत दिखाएं जाएं, उन्होने मीडिया पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि मीडिया एकतरफा रवैया अपना रही है. हमारी बात नहीं दिखा रही, पीड़िता वो नहीं हम हैं. शुभम त्रिवेदी की बहन ने कहा कि यह पूरी तरह लड़की की साजिश है. लड़की शिवम से शादी करना चाहती थी. उसका शिवम से 3-4 साल तक अफेयर भी चला. उन्होने बताया कि शिवम का परिवार भी दोनो की शादी के तैयार हो गया था, लेकिन शिवम को पता चला कि लड़की का 3-4 और लड़कों के साथ भी अफेयर चल रहा है. उन्होने बताया कि शिवम ने लड़की की फेसबुक आइडी बनाई थी इसीलिए उसके पास पासवर्ड था. शिवम ने अकाउंट खोलकर फेसबुक पर लड़की को और लड़कों के साथ गंदी-गंदी चैटिंग करते देखा. इसके बाद शिवम ने लड़की से शादी करने से इंकार कर दिया और बात करनी बंद कर दी.


आरोपी की बहन के मुताबिक शादी से इंकार सुनते ही लड़की ने धमकी दी कि अगर हमसे शादी नहीं करोगे तो तुम्हारे खिलाफ रेप का केस दर्ज करा देंगे इसी के चलते लड़की ने शिवम और हमारे भाई दोनों पर रेप का केस लगवा दिया. उन्होने बताया कि हमारी मां गांव की प्रधान हैं लड़की कई बार हमारे घर आई और शादी करवाने की बात कही तो हमारी तरफ से कहा गया कि अब जब शिवम राजी नहीं है तो हम क्या कर सकते हैं. इसी के चलते लड़की ने रेप के झूठे आरोप में हमारे भाई का नाम भी दर्ज करा दिया.


शुभम की मां सरोज

शुभम की मां सरोज (ग्राम प्रधान) ने कहा कि मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए. हमारे बच्चे अगर दोषी हों तो उन्हे सख्त से सजा मिले. उन्होने कहा अगर हमे न्याय नहीं मिला तो हम अपनी तीनों लड़कियों को साथ लेकर आत्मदाह कर लेंगें.


उमेश बाजपेई की बहन प्रिया का कहना है कि सरकार सीबीआई जांच, नार्को टेस्ट जो चाहें करा ले इस मामले में न्याय होना चाहिए. उन्होने कहा कि हमारे भाई को सुबह सोते हुए पुलिस उठा ले गयी. लोग कह रहे गोली मार दी जाएगी तो कोई कह रहा है कि फांसी पर लटका दिया जाएगा. हम लोग न्याय के लिए रो रहे हैं, तड़प रहे हैं हमारी कोई नहीं सुनता है.


उमेश बाजपेई की बहन ने कहा कि हमारे भाई के खिलाफ सबूत तो दिखाएं लोग जान से मारने की बात कर रहे हैं. उन्होने कहा कि हमारे पास सबूत है कि लड़की ने शिवम से फिरौती की मांग की थी. हमारी पास उसकी सभी चैटिंग हैं. उन्होने कहा कि जो हुआ वो गलत हुआ. लड़की का कई लोगों के साथ अफेयर था. उन्होने कहा कि लड़की ने हम लोगों को जो भी धमकी दी उसने वो सब किया. लड़की ने मेरे भाई और मेरे परिवार से कहा कि मेरी शिवम से शादी करवाओ हमने जब असमर्थता प्रकट की तो उसने धमकी दी कि अगर मेरी शादी नहीं करवाई तो मैं अपना आत्मदाह करके उमेश, शिवम औऱ शुभम तीनों को फंसवा दूंगी और उसने यही किया.


पीड़िता और शिवम की शादी का प्रमाण पत्र

शिवम और पीड़िता ने वैवाहिक अनुबंध कराकर की शादी

जानकारी के मुताबिक पीड़िता की पास के रहने वाले शिवम से मार्च 2017 में प्रेम-प्रसंग हुआ, मार्च 2017 में ही दोनों रायबरेली गए. पीड़िता और शिवम ने रायबरेली सिविल कोर्ट में वैवाहिक अनुबंध कराकर शादी की, परंतु दोनो ही परिवारों को यह रिश्ता नागवार गुजरा और उन्होने इसकी मंजूरी नहीं दी. इसके बाद पीड़िता ने 5 मार्च 2019 को आरोपी के खिलाफ रेप की एफआईआर दर्ज कराई, जिसके बाद पुलिस ने शिवम को गिरफ्तार कर लिया. लोअर कोर्ट ने शिवम को जेल भेज दिया. जेल जाने के बाद आरोपी शिवम ने हाईकोर्ट में अपील दायर की.


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यूपी सरकार के वकील ने शिवम की बेल का किया विरोध

हाईकोर्ट में आरोपी के वकील ने दलील दी कि दो साल तक शिवम के साथ रहने के बाद पीड़िता ने 2019 में एफआईआर दर्ज कराई. अगर दोनों में प्रेम-प्रसंग नहीं था तो यह एफआईआर पहले क्यों दर्ज नहीं कराई गयी. हाईकोर्ट में आरोपी के वकील ने दलील दी कि शिवम का पहले से कोई क्रिमिनल रिकॉर्ड नहीं है. आरोपी की दलील को मानते हुए हाईकोर्ट ने पर्सनल बॉन्ड पर आरोपी शिवम को बेल दे दी. वहीं इस बेल का यूपी सरकार के वकील ने विरोध किया. घटना के ठीक 6 दिन पहले ही शिवम जेल से छूटकर आया था.


बाकी हैं कई सवाल

पीड़िता ने अपने बयान में कहा था कि उसपर चाकू से हमला किया गया, इतना ही नहीं उसने डंडे से पिटाई की बात भी कही. लेकिन मेडिकल रिपोर्ट में पीड़िता के शरीर पर सिर्फ जलने के निशान ही पाए गए हैं. उस पर चाकू या डंडे से किसी भी तरह के हमले को डॉक्टर की टीम नकार रही है.


पीड़िता ने अपने बयान में कहा कि शिवम समेत 5 लोगों ने उस पर हमला किया है. वहीं पीड़िता के भाई ने इस पूरे मामले में केवल दो लोगों के शामिल होने की आशंका जताई थी. जिसके आधार पर पुलिस ने शिवम त्रिवेदी व शुभम त्रिवेदी के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया था. हालांकि पीड़िता ने मजिस्ट्रेटी बयान में एसडीएम, नायब तहसीलदार और अन्य अधिकारियों को शिवम व शुभम के अलावा शिवम के पिता रामकिशोर, शुभम के पिता हरिशंकर त्रिवेदी (प्रधान के पति), उमेश बाजपेई (पंचायत मित्र) के नाम बताए थे. पुलिस ने बाद में इन तीनों के नाम भी जोड़ दिए.


जानकारी के मुताबिक पीड़िता हर बार केस की सुनवाई के लिए अपने परिजनों के साथ जाती थी. लेकिन घटना वाले दिन सुबह करीब 4:30 बजे वह अकेली ही गई थी. परिवार का कोई भी सदस्य उसके साथ नहीं गया, अब जिसे लेकर सवाल उठ रहे हैं.


बिहार थाना झेत्र सीओ सी.के त्रिपाठी का रिपब्लिक न्यूज चैनल द्वारा स्टिंग सामने आया है, जिसमें उन्होने जांच की जानकारियां साझा की हैं. सीओ के मुताबिक मुख्य आरोपी शिवम और उसके दोस्त शुभम के बीच बातचीत 5:12 बजे हुई थी, वहीं पीड़िता को जलाने की घटना 4:40 से 4:50 के बीच हुई थी. पुलिस की जांच के मुताबिक सीडीआर की जांच भी आरोपियों के बयान से मेल खा रही है. वहीं पुलिस ने सभी आरोपियों को उनके घर से गिरफ्तार किया है. मुख्य आरोपी शिवम ने खुद पुलिस के पास जाकर सरेंडर किया था. बिहार थाने की पुलिस इस बात की पुष्टि करती है. यही नहीं, घटना के तत्काल बाद जब अभियुक्तों के घर पर पुलिस ने दबिश दी तो लगभग सभी अभियुक्त अपने घर पर ही मिले.



स्थानीय लोगों के मुताबिक पीड़िता ने केस वापस लेने के लिए शुभम के पिता हरिशंकर त्रिवेदी (प्रधान के पति) से 15 लाख रुपए की डिमांड की, लोगों की माने तो पीड़िता ने करीब 7-8 लाख वसूल भी लिए. उन्नाव में इस घटना को शुरू से देख रहे कई पुलिस अधिकारी भी स्थानीय लोगों की आशंकाओं से सहमति जताते हैं लेकिन इस बारे में वो आधिकारिक रूप से कुछ भी कहने से बच रहे हैं. गांव में कुछ लोगों को इस बात पर भी आपत्ति है कि अन्य लोगों के अलावा मीडिया भी पीड़ित पक्ष के प्रति ज़्यादा हमदर्दी दिखा रहा है.


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बहरहाल सबकी अपनी-अपनी दलील है लेकिन इतना साफ है कि यह केस उतना सीधा नहीं जितना मीडिया में दिख रहा है. अगर सभी पहलुओं पर विचार करें तो बिना किसी जांच सीधा-सीधा किसी को दोषी या निर्दोष बता देने को न्याय नहीं माना जा सकता. जहां दोनों ही पक्ष खुद को पीड़ित बता रहे हों और खबरों में किसी एक को ही जगह मिले वहां मीडिया ट्रायल पर सवाल लाजिमी है. ऐसे में सवाल उठेगा कि क्या योगी सरकार को बदनाम करने के लिए मीडिया ने सफेद झूठ चलाया ? सवाल, आरोप-प्रत्यारोप कई हैं जवाब या यूं कहें सच जांच रिपोर्ट आने के बाद ही पता चल सकेगा.


Also Read: Exclusive: उन्नाव मामले में पीड़िता और वकील की सनसनीखेज चैट वायरल, आरोपी पक्ष का दावा- शिवम नहीं, वकील कर रहा था पीड़िता का शोषण, आरोपियों से थी लाखों वसूलने की तैयारी


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