Dengue Signs and Symptoms: क्या हैं डेंगू के लक्षण ?, जानिए किस समय और किस जगह काटते हैं मच्छर

आज कर डेंगू का आतंक काफी ज्यादा फैला हुआ है. सरकार के साथ साथ सभी स्वास्थ्य सेवाएं लगातार लोगों को जागरूक कर रहीं हैं कि कैसे इससे बचा जा सकता है. दरअसल, डेंगू बुखार डेंगू वायरस से संक्रमित एडीज मच्छर के काटने से फैलता है. ये मच्छर तब संक्रमित हो जाता है जब वह किसी डेंगू वायरस से संक्रमित व्यक्ति के खून को चूसता है. ये एक व्यक्ति से दूसरे में सीधे तौर पर नहीं फैलता है. डेंगू संक्रमण DEN-1, DEN-2, DEN-3, और DEN-4 वायरस से फैलता है. इन चारों वायरस को सीरोटाइप कहा जाता है क्योंकि ये चारों अलग-अलग तरीके से एंटीबॉडी को प्रभावित करते हैं. बढ़ते संक्रमण के चलते आज हम आपको बताते हैं कि डेंगू का मच्छर किस समय काटता है और इससे बचने के तरीके क्या हैं.

दोपहर के टाइम काटते हैं मच्छर

जानकारी के मुताबिक, डेंगू फैलाने वाले मच्छर सबसे ज्यादा दोपहर के समय काटते हैं. खासतौर से सूर्योदय के दो घंटे बाद और सूर्यास्त से एक घंटे पहले. हालांकि, रात के समय भी डेंगू के मच्छर एक्टिव रहते हैं, खासकर उन इलाकों में जहां अच्छी रोशनी होती है. डेंगू के मच्छरों के काटने का खतरा ऑफिस, मॉल, इनडोर ऑडिटोरियम और स्टेडियम के अंदर ज्यादा होता है.

डेंगू के लक्षण

डेंगू तीन प्रकार के होते हैं, जिसमें एक तो सामान्य डेंगू हैं और दूसरे डेंगू खतरनाक होते हैं. तीन तरह के डेंगू में क्लासिकल डेंगू, डेंगू हमरेडिक बुखार (DHF) और डेंगू शॉक सिंन्ड्रोम (DSS) शामिल हैं.

– क्लासिकल (साधारण) डेंगू बुखार में ठंड लगने के साथ अचानकल बुखार चढ़ना, सिर-जोड़ों में दर्द, आंखों के पिछले भाग में दर्द होना, अत्यधिक कमजोरी लगना, भूख में बेहद कमी और मुंह के स्वाद का खराब होना जैसे लक्षण होते हं. लेकिन, इन्हें सामान्य माना जाता है और 5-7 दिन यह दिक्कत होने के बाद रोगी टीक हो जाता है.
– फिर डीएचएफ की स्थिति आती है, जब नाक, मसूड़ों से खून आना, शौच व उल्टी में खून आना, स्किन पर नीले-काले रंग के चिकत्ते पड़ जाना आदि लक्षण आने लग जाते हैं. इसके लिए टोर्निके टेस्ट करवाया जाता है, जिससे इसके बारे में पता चल जाता है. इसके अलाव ब्लड प्लेटलेट्स कम होना भी शुरू हो जाता है.
– फिर बारी आती है डीएसएस की. डीएसएस में सामान्य डेंगू के साथ कई दूसरे लक्षण भी आ जाते हैं तो दिक्कत हो जाती है. इस स्थिति में बैचेनी काफी ज्यादा हो जाती है और तेज बुखार के बावजूद भी उसकी त्वचा ठंडी महसूस होती है. इसके अलावा रोगी धीरे-धीरे होश खोने लगता है. अगर रोगी की नाड़ी देखी जाए तो वह तोज और कमजोर महसूस होती है. रोगी का ब्लड प्रेशर कम होने लगता है.

डेंगू से बचाव के तरीके

डेंगू से बचे रहने के लिए सबसे आवश्यक है, मच्छरों से बचाव के उपाय करना. मच्छरों को पनपने से रोकने, मच्छर भगाने वाली दवाओं, आस-पास की साफ सफाई और मच्छरदानी का उपयोग करके डेंगू से बचाव किया जा सकता है. इसके अलावा डेंगू से बचाव के लिए प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करने के भी उपाय करते रहने चाहिए. दिन में पूरी बाजू के कपड़े पहनकर रखने चाहिए. घर के आसपास या घर के अंदर पानी नहीं जमने दें. कूलर, गमले, टायर में जमे पानी को भी बहा दें. कूलर में अगर पानी है तो इसे भी खाली कर लें वरना इसमें मच्छर पनप सकते हैं

डेंगू का इलाज

बता दें कि अब तक डेंगू का कोई विशिष्ट उपचार उपलब्ध नहीं है, हालांकि दवाइयों के माध्यम से लक्षणों को कम करने का प्रयास किया जाता है. डेंगू में रोगियों के रक्त में प्लेटलेट्स में कमी होना सामान्य है, ऐसे में पहला लक्ष्य प्लेटलेट्स के स्तर को बढ़ाना होता है. इस समय नारियल पानी पीना सबसे अच्छा होता है. ये प्लेटलेट्स बढ़ाने का भी काम करता है. इसके अलावा गिलोय, पपीता, कीवी, अनार, चुकंदर और हरी सब्जियों को डाइट में शामिल करें. इन सब साथ डॉक्टर से सलाह लेना बिलकुल न भूलें

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