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ISRO ने दी खुशखबरी, चंद्रयान-2 आर्बिटर चंद्रमा की कक्षा में सुरक्षित, 1 साल तक चांद पर करेगा शोध

भारत ने चांद के दक्षिणी ध्रुव के पास तक चंद्रयान-2 मिशन (chandrayaan 2) के तहत विक्रम लैंडर (vikram lander) को पहुंचाकर इतिहास रचा है. हालांकि भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के वैज्ञानिकों का संपर्क उससे चांद की सतह से करीब 2.1 किमी ऊपर से टूट गया. चंद्रमा की सतह को छूने से चंद मिनट पहले लैंडर ‘विक्रम’ का जमीनी स्टेशन से संपर्क टूटने के बाद इसरो के एक अधिकारी ने शनिवार को बताया कि चंद्रयान-2 का ऑर्बिटर चंद्रमा की कक्षा में सुरक्षित है.


अधिकारी ने ‘पीटीआई’ से कहा, ‘‘ऑर्बिटर चंद्रमा की कक्षा में पूरी तरह ठीक एवं सुरक्षित है और सामान्य तरीके से काम कर रहा है.’’ 2379 किलोग्राम ऑर्बिटर के मिशन का जीवन काल एक साल है. अब वैज्ञानिक उसके डाटा का विश्‍लेषण कर रहे हैं. भले ही विक्रम लैंडर का संपर्क वैज्ञानिकों से टूट गया हो, लेकिन चांद की कक्षा पर मौजूद चंद्रयान-2 ऑर्बिटर पूरे एक साल तक चांद पर शोध करेगा और उसके रहस्‍यों पर से पर्दा हटाएगा. इसका जिक्र पीएम मोदी ने शनिवार को अपने संबोधन में भी किया. इसके लिए उसमें बेहद शक्तिशाली उपकरण लगे हैं.


कुछ ऐसा है ऑर्बिटर

चंद्रयान-2 ऑर्बिटर का वजन 2,379 किलोग्राम है. यह 3.2*5.8*2.1 मीटर बड़ा है. इसकी मिशन लाइफ 1 साल की है. पूरे चंद्रयान-2 मिशन में इसी ऑर्बिटर को अहम भूमिका निभानी है. इसी के जरिये विक्रम लैंडर, प्रज्ञान रोवर और धरती पर मौजूद इसरो के वैज्ञानिकों के बीच संपर्क होना है. यह चांद की कक्षा पर मौजूद रहेगा.


यह चांद की सतह पर मौजूद लैंडर विक्रम और रोवर प्रज्ञान से मिली जानकारियों को धरती पर वैज्ञानिकों के पास भेजेगा. हालांकि अभी विक्रम लैंडर से संपर्क टूट गया है. लेकिन इसरो के वैज्ञानिकों ने क्रैश होने जैसी आशंका नहीं जताई है. उनका कहना है कि उसके डाटा का विश्‍लेषण हो रहा है. चंद्रयान-2 मिशन का 95 फीसदी पेलोड काम कर रहा है. मतलब ऑर्बिटर के सभी उपकरण सुचारू रूप से काम कर रहे हैं.


इन उपकरणों से करेगा शोध

  •  चंद्रयान-2 ऑर्बिटर के पास चांद की कक्षा से चांद पर शोध करने के लिए 8 उपकरण हैं. इनमें चांद का डिजिटल मॉडल तैयार करने के लिए टेरेन मैपिंग कैमरा-2 है. 

  • चांद की सतह पर मौजूद तत्‍वों की जांच के लिए इसमें चंद्रययान-2 लार्ज एरिया सॉफ्ट एक्‍स-रे स्‍पेक्‍ट्रोमीटर (क्‍लास) है.

  • क्‍लास को सोलर एक्‍स-रे स्‍पेक्‍ट्रम इनपुट मुहैया कराने के लिए सोलर एक्‍स-रे मॉनीटर है.

  • चांद पर पानी की मौजूदगी का पता लगाने और वहां मौजूद मिनरल्‍स पर शोध के लिए इसमें इमेजिंग आईआर स्‍पेक्‍ट्रोमीटर है. 

  • चांद के ध्रुवों की मैपिंग करने और सतह व सतह के नीचे जमी बर्फ का पता लगाने के लिए इसमें डुअल फ्रीक्‍वेंसी सिंथेटिक अपर्चर रडार है.

  • चांद की ऊपरी सतह पर शोध के लिए इसमें चंद्र एटमॉसफेयरिक कंपोजिशन एक्‍सप्‍लोरर-2 है.

  • ऑर्बिटर हाई रेजॉल्‍यूशन कैमरा के जरिये यह हाई रेस्‍टोपोग्राफी मैपिंग की जाएगी.

  • चांद के वातावरण की निचली परत की जांच करने के लिए डुअल फ्रीक्‍वेंसी रेडियो उपकरण है.

बता दें कि मिशन चंद्रयान-2 (chandrayaan2) की असफलता ने इसरो चीफ और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दोनों को भावुक कर दिया. इसरो (ISRO) कंट्रोल रूम में वैज्ञानिकों को दिए संबोधन के बाद पीएम बाहर निकले और भावुक इसरो चीफ के. सिवन फफक-फफककर रो पड़े. पीएम मोदी ने इसरो चीफ को गले लगाकर हिम्मत दी. पीएम ने इसरो चीफ की पीठ थपथपाई, उन्हें गले लगाया और गाड़ी में बैठ गए.



प्रधानमंत्री मोदी को उनकी गाड़ी तक छोड़ने पहुंचे इसरो चीफ खुद को संभाल नहीं पाए. वह फफककर रोने लगे और पीएम ने गले लगाकर उनकी पीठ थपथपाई. पीएम गाड़ी में बैठे और के. सिवन ने हाथ हिलाकर उन्हें अलविदा कहा. हालांकि, इस बीच सिवन की डबडबाई आंखें और चेहरे पर निराशा साफ नजर आ रही थी. खुद पीएम भी इस मौके पर भावुक नजर आए और भावनाओं से जूझने का द्वंद पीएम के चेहरे पर साफ नजर आ रहा था.


Also Read: Video: जब फूट-फूटकर रोने लगे ISRO चीफ तो पीएम मोदी ने गले लगाकर बढ़ाया हौंसला


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