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तेजी से बढ़ रही Koo एप पर यूजर्स की संख्या, आधिकारिक तौर पर ‘भारतीय ट्विटर’ घोषित कर सकती है मोदी सरकार

India made app Koo: माइक्रो ब्लॉगिंग मंच ट्विटर (Twitter) को लेकर बढ़ते विवाद के बीच स्वदेशी सोशल मीडिया ऐप ‘कू’ (Koo App) को केंद्र सरकार के मंत्रियों और सरकारी विभागों का समर्थन मिलने के चलते उसके यूजर्स की संख्या तेजी से बढ़ रही है. सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने ट्विटर के बारे में अपना रुख बताने के लिए कू (Koo) का इस्तेमाल किया है. मंत्रालय ने ट्विटर से कई भड़काऊ सामग्री को वापस लेने का आदेश दिया था, जिसका ट्विटर ने अभी पूरी तरह पालन नहीं किया. सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय और पीयूष गोयल जैसे कुछ मंत्रियों ने लोगों से कू को अपनाने की अपील की, जिसके चलते इसके यूजर्स की संख्या में तेजी से इजाफा हो रहा है. अब खबर है कि भारत सरकार आधिकारिक तौर पर Koo app को ट्विटर के विकल्प के तौर पर पेश करने वाली है.


ईटी की एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि नरेंद्र मोदी सरकार जल्द ही Koo app को ट्विटर के भारतीय विकल्प के तौर पर आधिकारिक रूप से घोषित कर सकती है. रिपोर्ट में कहा गया है कि Koo app को सरकार पहला सरकारी कम्यूनिकेशन प्लेटफॉर्म भी घोषित कर सकती है. दावा किया जा रहा है कि सरकारी मंत्रालय की ओर से सबसे पहले कू एप पर ही जानकारी शेयर की जाएगी और उसके बाद कू के लिंक को ट्विटर पर शेयर किया जाएगा.


दरअसल, स्वदेशी माइक्रोब्लॉगिंग प्लेटफॉर्म ‘कू’ एप से जुड़ने के लिए सरकार के कई मंत्री और नेता ऐसे समय पर जोर दे रहे हैं जब ट्विटर के साथ सरकार का गतिरोध बना हुआ है. भारत सरकार ने 1178 अकाउंट्स बंद करने के लिए ट्विटर को एक सूची सौंपी है. सरकार का कहना है कि ये अकाउंट्स किसान आंदोलन के बारे में ‘भ्रामक जानकारियां एवं भड़काऊ सामग्रियां’ प्रसारित कर रहे हैं. यही नहीं ये अकाउंट खालिस्तान समर्थक हैं. केंद्रीय सूचना एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय के फरमान पर ट्विटर ने 500 से अधिक अकाउंट्स पर रोक लगाई है. ट्विटर की इस ‘आधी अधूरी कार्रवाई’ पर सरकार ने नाराजगी जाहिर की है. सूत्रों का कहना कि आदेशों का पालन नहीं करने पर सरकार भारत में ट्विटर के अधिकारियों को गिरफ्तार कर सकती है। केंद्रीय मंत्रियों एवं विभागों के ‘कू’ एप से जुड़ने से जाहिर है कि सरकार इस एप को बढ़ावा देना चाहती है.


भारतीय हिंदी भाषी यूजर्स पर नजर


‘कू’ एप के को-फाउंडर एवं सीईओ अप्रमेय राधाकृष्णा ने इंडियन एक्सप्रेस डॉट कॉम से बातचीत में कहा, ‘हमने इस एप पर नवंबर 2019 में काम करना शुरू किया. हम चाहते हैं कि इंटरनेट पर भारतीय भाषा में लोगों की आवाज पहुंचे. मौजूदा प्लेटफॉर्म अंग्रेजी बोलने वाली आबादी को तरजीह देते हैं और भारत में यह संख्या करीब एक प्रतिशत है. अंग्रेजी बोलने वालों की है. हमारे इस एप की शुरुआत मार्च 2020 में हुई और इसी समय कोरोना महामारी ने दस्तक दी.’ केंद्रीय मंत्रियों के अलावा केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर बोर्ड, कस्टम विभाग और मॉय गवर्न्मेंट इंडिया भी इस एप पर आ गए हैं.


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