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हाईकोर्ट के जजों की रिटायरमेंट उम्र बढा़ने के लिए सुप्रीम कोर्ट पहुंचे BJP नेता अश्विनी उपाध्याय

उच्चतम न्यायालय में सोमवार को एक जनहित याचिका दाखिल कर उच्च न्यायालयों और शीर्ष अदालत में न्यायाधीशों के लिए सेवानिवृत्ति की एक समान उम्र तय करने का अनुरोध किया गया है। भाजपा नेता (BJP leader) और वरिष्ठ अधिवक्ता अश्विनी उपाध्याय (Ashwini Upadhyay) की तरफ से दाखिल की गई याचिका में कहा गया है कि अगर सेवानिवृत्ति उम्र में एकरूपता रहेगी तो उच्च न्यायालय के न्यायाधीश और आजादी से न्यायिक कार्य कर पाएंगे तथा उच्चतम न्यायालय जाने की कोई अपेक्षा भी नहीं रहेगी।


उच्चतम न्यायालय और उच्च न्यायालयों के बीच अधीनस्थता की आशंका भी कम होगी, इसलिए उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की सेवानिवृत्ति की उम्र उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीशों की तरह होना चाहिए।


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वरिष्ठ अधिवक्ता और भाजपा नेता अश्विनी कुमार उपाध्याय द्वारा दाखिल याचिका में अदालतों के न्यायाधीशों के लिए अलग-अलग सेवानिवृत्ति की उम्र को अतार्किक बताते हुए सेवानिवृत्ति की उम्र बढ़ाने और इसे 65 साल करने का अनुरोध किया गया है और कहा गया है कि इससे ना केवल कानून का शासन मजबूत होगा बल्कि अनुच्छेद 21 के तहत प्रदत्त त्वरित न्याय का मौलिक अधिकार भी बना रहेगा।


वर्तमान में उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीशों के लिए सेवानिवृत्ति की उम्र 65 साल है। वहीं उच्च न्यायालय के न्यायाधीश 62 साल में सेवानिवृत्त होते हैं। अधिवक्ता अश्वनी कुमार दुबे के जरिए दाखिल याचिका में कहा गया है, ‘न्यायाधीशों की सेवानिवृत्ति की उम्र में एकरूपता से उच्च न्यायालय में अनुभवी न्यायाधीशों का समूह तैयार होगा जो कि अति महत्वपूर्ण मामलों पर फैसला करने में काफी उपयोगी होगा।’


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याचिका में कहा गया कि लंबित मामलों के निपटारा के लिए भी सेवानिवृत्ति की उम्र में एकरूपता जरूरी है और इससे पीठ में सर्वश्रेष्ठ प्रतिभा को भी बनाए रखने में मदद मिलेगी।


चीफ जस्टिस ने भेजा था प्रस्ताव

बता दें कि साल 2019 में कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने राज्यसभा में बताया था कि देश के प्रधान न्यायाधीश ने उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की सेवानिवृत्ति की आयु बढ़ाने का प्रस्ताव भेजा है ताकि मामलों के लंबित होने की अवधि घटायी जा सके।


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हालांकि कानून मंत्री ने इस प्रश्न का जवाब नहीं दिया कि क्या सरकार उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की सेवानिवृत्ति की आयु बढ़ाने के प्रस्ताव पर विचार कर रही है या नहीं। उन्होंने एक प्रश्न के लिखित जवाब में बताया कि प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई ने यह प्रस्ताव भेजा है ताकि अधिक समय तक अनुभवी न्यायाधीश उपलब्ध रहें जिससे न्यायाधीश के पदों के भरे रहने की स्थिति बेहतर हो सके और लंबित मामलों की संख्या कम हो।


उच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की सेवानिवृत्ति आयु को 62 से बढ़ाकर 65 साल करने के प्रावधान वाला एक संविधान संशोधन विधेयक संप्रग सरकार लोकसभा में लायी थी किंतु यह विचार या मतदान के लिए नहीं आ पाया। प्रसाद ने कहा कि एक जुलाई तक देश के 25 उच्च न्यायालयों में 403 रिक्तियां थीं।


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