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आजादी के बाद पहली बार पंचायत चुनावों में मतदान करेंगे वनटांगिया गांव के लोग, इन्हें हक दिलाने के लिए CM योगी ने लड़ी लंबी लड़ाई

Vantangiya village Panchayat elections

उत्तर प्रदेश के 23 वनटांगिया (आदिवासी समुदाय) गांवों (Vantangiya Village) के निवासी प्रदेश के मौजूदा पंचायत चुनाव (Panchayat Elections) में पहली बार मतदान करेंगे। इनमें से 5 गांव गोरखपुर के और महराजगंज जिले के 18 गांव हैं। इन 23 वनटांगिया गांवों को योगी आदित्यनाथ सरकार ने 1 जनवरी 2018 को राजस्व गांव घोषित किया था। वनटांगिया आदिवासी समुदाय का मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के दिल में एक विशेष स्थान है, जो इस क्षेत्र में टॉफी वाले बाबा के नाम से प्रसिद्ध हैं। मुख्यमंत्री पिछले कई सालों से वनटांगिया बच्चों के साथ दिवाली मना रहे हैं।


मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ वनटांगिया समुदाय के लोगों के लिए भगवान से कम नहीं हैं। इस समुदाय के लोग कहते हैं कि हमने तो भगवान के रूप में महराज जी का बारम्बार दर्शन किया है और हां, हमारे भगवान ने बिना कोई मन्नत मांगे हमें और हमारे सभी वनटांगियों को वह सबकुछ दे दिया है, जिसके इंतजार में हमारी कई पीढ़ियां गुजर गईं। कतिपय लोगों के लिए इन वनटांगियों की बात अतिश्योक्ति लग सकती है, लेकिन दशकों से जंगल में पशुवत जीवन जीते रहे इन वनटांगियों के जीवन में विकास के उजियारे से जो बदलाव आया है, उसका एकमात्र श्रेय योगी को है।


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कौन कहलाते हैं वनटांगिया


दरअसल, अंग्रेजों ने जंगल लगाने और उसकी रखवाली करने के लिए जंगलों के बीच में कुछ लोगों को बसा दिया। ये लोग वहीं पर रहते थे, जंगल लगाते थे और किसी तरह से जीवन यापन करते थे। बाहरी दुनिया से इनका कोई मतलब नहीं था। इनके वनटांगिया कहलाने के पीछे की कहानी ये है कि जंगल क्षेत्र में पौधों की देखरेख करने के लिए मजदूर रखे गये थे।


इसके लिए 1920 में म्यांमार में आदिवासियों द्वारा पहाड़ों पर जंगल तैयार करने के साथ ही खाली स्थानों पर खेती करने की पद्धति ‘टोंगिया’ को आजमाया गया, इसलिए इस काम को करने वाले श्रमिक वनटांगिया कहलाए। वनटांगिया श्रमिक भूमिहीन थे। वो अपने परिवार के साथ जंगलों में रहते थे। इसिलए दूसरी पीढ़ी के लोगों का अपने मूल स्थान से कटाव हो गया और वो जंगल के होकर रह गये।


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1947 में देश को आजादी मिलने के बाद भी बड़ी संख्या में ऐसी आबादी थी जो जंगलों के बीच में रहती थी, जिसके बारे में जानने वाला कोई नहीं था। वनटांगिया समुदाय के गांवों में स्कूल, अस्पताल, बिजली, सड़क, पानी, जैसी मूलभूत सुविधाएं नहीं थी। एक तरह से वो खानाबदोश की जिन्दगी जी रहे थे। इन लोगों को लोकसभा और विधानसभा में वोट देने का अधिकार 1995 में मिला। इससे इनकी उपेक्षा का अंदाजा लगाया जा सकता है। पर ग्राम पंचायत में वोट देने का अधिकार तब भी नहीं मिला वो अधिकार इन्हें सीएम योगी के मुख्यमंत्री बनने के बाद मिला।


इसके बाद इन लोगों को संविधान के तहत नागरिकों के मूलभूत अधिकार दिए गये। यानी कि वनटांगियों को मूलभूत अधिकार तब मिले जब योगी आदित्यनाथ मुख्यमंत्री बने, जिसके बाद उन्होंने प्रदेश के 37 वनटांगियां गांवों को राजस्व गांव का दर्जा दिया।


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