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बांग्लादेशी युवती को बेचने दिल्ली ले जा रहे थे रोहिंग्या मुसलमान, पेशी पर आए अयाज ने कोर्ट में कबूला, नाव से पार कराई थी सीमा

bangladeshi girl

उत्तर प्रदेश के कानपुर में शुक्रवार को बांग्लादेशी युवती (Bangladeshi Girl) को बेचने दिल्ली ले जा रहे 2 रोहिंग्या मुसलमानों के मामले की सुनवाई अपर जिला जज सप्तम अभिषेक उपाध्याय की अदालत में हुई। इस दौरान आरोपी अयाज ने बताया कि युवती को बिना पासपोर्ट-वीजा के बांग्लादेश से भारत लाने के लिए रज्जाक से 15 हजार टका लिए थे। रुपए मिलने के बाद वह नाव से बांग्लादेशी युवती को सीमा पार कराकर भारत ले आया। कोर्ट में वादी मुकदमा जीआरपी इंस्पेक्टर राममोहन राय और एफआईआर लेखक विनोद पांडे के बयान दर्ज किए गए। मामले की अगली सुनवाई 25 जनवरी को होगी।


पश्चिम बंगाल में भी है इनका बड़ा गिरोह

जीआरपी इंस्पेक्टर ने गवाही के दौरान बताया कि गिरफ्तारी के समय अयाज के पास से जो मोबाइल मिला था उसमें लगा सिम रज्जाक ने कोलकाता के फर्जी नाम व पते से निकलवाकर अयाज को दिया था। अयाज के पास से भारतीय और बांग्लादेशी करेंसी भी बरामद हुई थी। वहीं रज्जाक के पास से पांच मोबाइल और कई सिम कार्ड मिले थे। रज्जाक भारत और बांग्लादेश दोनों के सिम इस्तेमाल करता था। दोनों देशों की करेंसी भी मिली थी। रज्जाक के पास पासपोर्ट भी था।


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अयाज म्यांमार का रहने वाला है जो बांग्लादेश में काक्स बाजार स्थित शरणार्थी शिविर में रहता था। क्षेत्र में ही रहने वाली युवती को वह बिना पासपोर्ट-वीजा के मानव तस्करी कर भारत ले आया था। इंस्पेक्टर ने बताया कि आरोपियों का बड़ा गिरोह सीमा पर सक्रिय है। ये लोग मोटरसाइकिल, बस, ट्रेन आदि के सहारे लोगों को नदी किनारे इकट्ठा करते हैं फिर नाव का इस्तेमाल कर रात के अंधेरे में बांग्लादेश की सीमा पार कर भारत में घुसपैठ करा देते हैं।


पश्चिम बंगाल में भी इनका गिरोह सक्रिय है। एडीजीसी जितेंद्र कुमार पांडे व विवेक शुक्ला ने बताया कि 26 अगस्त 2019 को रिपोर्ट दर्ज हुई थी। अयाज और रज्जाक दोनों आरोपियों पर मानव तस्करी, धोखाधड़ी व विदेश विषयक अधिनियम के तहत आरोप तय हुए हैं। 19 जनवरी को राजकीय बालिका गृह से आई पीड़िता ने आरोपियों को पहचानकर बयान भी दर्ज कराए थे।


बांग्लादेशी युवती ने कोर्ट में खोली थी आरोपियों की पोल

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इससे पहले मंगलवार को राजकीय बालिका गृह से बयान दर्ज कराने कोर्ट आई बांग्लादेशी युवती ने कटघरे में खड़े अभियुक्तों को पहचाना और मानव तस्करी के आरोपियों द्वारा बांग्लादेश से कानपुर तक लाए जाने का पूरा वाकया कोर्ट के सामने सुनाया था। युवती ने कहा था कि अभियुक्तों को सजा दिलाकर ही अपने वतन शान से लौटूंगी। बांग्लादेश के बाक्स बाजार की रहने वाली 18 वर्षीय युवती ने बताया कि 6-7 साल पहले मां की मौत के बाद पिता ने मलेशिया जाकर दूसरा निकाह कर लिया।


पीड़िता बांग्लादेश में बहन-बहनोई के साथ रहती थी। 5 साल से भारत में रहने वाली मामी अमीन निशां उससे फोन पर अक्सर भारत आने को कहती थीं। मामी ने ही अब्दुल रज्जाक का नंबर दिया। रज्जाक ने फोन पर उसे 19 अगस्त 2019 की सुबह नूतन ब्रिज बस स्टैंड बुलाया। इसके बाद जगह-जगह रज्जाक के आदमी मिलते गए और वह मोहम्मद अयाज तक पहुंची, जो उन लोगों को नाव में बैठाकर नदी पार कर भारत ले आए।


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सियालदाह स्टेशन पर रज्जाक मिला, फिर रज्जाक और अयाज उसे होटल ले गए। उनकी बातों पर शक होने पर युवती ने अपना फोन मांगा लेकिन दोनों ने नहीं दिया। ट्रेन में मांगी का वीडियो कॉल रज्जाक के फोन पर आया और उनकी बातें सुनकर उसे पता चला के ये लोग उसे बेचने के लिए भारत लाए हैं। तब उसने ट्रेन में बांग्ला भाषा जानने वाले को आपबीती बताई तो उसने जीआरपी को फोन कर दिया। 27 अगस्त 2019 को दोनों आरोपियों को कानपुर से पकड़ा गया था।


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