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यदि RSS को समझना है तो उसके सेवा भाव को समझना होगा: सीएम योगी

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के अखिल भारतीय सह प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर (Sunil Ambekar) द्वारा लिखी पुस्तक राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ‘स्वर्णिम भारत के दिशा सूत्र’ का शुक्रवार को सीएम योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) की मौजूदगी में लोकार्पण किया गया. इस दौरान कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सीएम योगी ने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) को समझने के लिए उसके सेवाभाव को समझना होगा. उन्होंने कहा कि आरएसएस एक ऐसा संगठन है, जो बिना किसी सरकारी सहयोग के सेवा कार्य करता है.


सीएम योगी ने कहा कि ‘राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ-स्वर्णिम भारत के दिशा सूत्र’ मात्र एक पुस्तक नहीं है, यह एक दृष्टि है. उन्होंने कहा कि संघ का सेवा कार्य लोगों को बरबश ही अपनी ओर खींचता है. बूंद और शक्कर के मिलन की तरह ही आरएसएस अपनी उपस्थिति का एहसास कराता रहा है. उन्होंने कहा कि शक्कर की तरह इसे हर कोई एहसास करता है. यही इस पुस्तक में भी दिया है. यदि संघ को समझना है तो उसके सेवा भाव को समझना होगा.


उन्होंने कहा कि लॉकडाउन में भी संघ ने अपना एहसास कराया. हर लोग चिंतित थे कि कैसे लॉकडाउन में परिस्थितियों को संभाला जाए. जहां दुनिया का हर व्यक्ति स्वतंत्रता का सदुपयोग व दुरपयोग दोनों करना जानता है, ऐसे में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पहला संगठन था, जो लोगों को घर-घर जाकर सहायता पहुंचाने के लिए आगे आया था. राज्य सरकारों ने उपेक्षा की होगी लेकिन आरएसएस ने किसी की उपेक्षा नहीं की. सेवा की यह पराकाष्ठा रही कि लोगों को चप्पल पहनाने से लेकर घर पहुंचाने तक का काम किया था. आरएसएस ने किसी की जाति किसी का धर्म नहीं पूछा था. उन्होंने कहा कि इसी का नतीजा रहा कि मजदूरों को उनके घर तक पहुंचाने में सरकारों को सहायता मिल पाई.


मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि संघ को समझना है तो उसके सेवा भाव को समझना होगा. देश में कहीं भी आपदा आती है तो स्वयंसेवक स्व स्फूर्त रूप से वहां के सेवा भाव से जुड़ता है. यही तो राष्ट्रवाद है. आपदा के समय खुद की परवाह नहीं करते हुए गरीबों के जीवन में किस तरह संघ ने आनंद भरा, यह पूरी दुनिया ने देखा है. यदि आपके विरोध में कोई बोलने वाला नहीं है तो आपने अच्छा काम नहीं किया. संघ ने यही काम किया है. संघ ने हमेशा सेवा भाव से सेवा काम किया है. यहां से निकलकर स्वयंसेवक निकलकर सुदुर दक्षिण भारत में सेवा काम कर सकता है, तो वह स्वयं सेवक ही कर सकता है. ऐसी सोच भी संघ ही सकता है.


गौरतलब है कि सुनील आंबेकर ने पूर्व में ‘द आरएसएस-रोडमैप्स फॉर द 21 सेंचुरी’ नामक पुस्तक अंग्रेजी में लिखी थी, जिसका वर्ष 2019 में संघ प्रमुख मोहन राव भागवत ने लोकार्पण किया था. शुक्रवार को जिस पुस्तक का लोकार्पण हुआ है, वह अंग्रेजी पुस्तक का ही हिन्दी रुपान्तरण है. इसका हिंदी में अनुवाद डा. जितेंद्र वीर कालरा ने किया है. प्रभात प्रकाशन ने इसे प्रकाशित किया है. 272 पृष्ठों की इस पुस्तक के माध्यम से सुनील आंबेकर ने संघ और संघ की आंतरिक कार्यप्रणाली को दस अध्यायों में सम्पूर्ण विश्व के सामने रखा है. इनमें संघ की भावभूमि, संघ की मूल अवधारणाएं, संघ की कार्यप्रणाली, शाखा पद्धति तथा संरचना, संघ की दृष्टि में भारत का इतिहास, हिंदुत्व का पुनरोदय, जाति प्रथा और सामाजिक न्याय, भूमंडलीकरण, आधुनिकता और महिला आंदोलन प्रमुख हैं. यह पुस्तक संघ की कार्यप्रणाली और उसकी भावी योजनाओं को विस्तार से समझाती है.


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