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सीएम योगी का ‘विशेष वरासत अभियान’ लाया रंग, एक महीने में सुलझे साढ़े तीन लाख से अधिक जमीनी विवाद

Yogi Government unemployment rate

उत्तर प्रदेश में भूमि विवादों को जड़ से खत्म करने को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) के निर्देश पर शुरु हुए विशेष वरासत (Vishesh Varasat Abhiyan) अभियान को  एक महीनेे पूरे हो गए. ‘आपकी जमीन, आपका अधिकार, सबको मिले अपना उत्तराधिकार’ के संकल्प से शुरु हुए इस अभियान के तहत एक माह में ही राजस्व विभाग ने वरासत से संबंधित मिले 3,68,709 आवेदनों का निस्तारण किया है.


चंद दिनों में ही इतनी बड़ी संख्या में वरासत संबंधी मामलों का निस्तारण किए जाने से अब राज्य के गांव-गांव में विशेष वरासत अभियान में रूचि लेते हुए लोग निर्विवाद उत्तराधिकारों को खतौनियों में दर्ज कराने के लिए बढ़चढ़ कर आवेदन कर रहें हैं. इसे देखते हुए यह दावा किया जा रहा है कि आवेदन करने वालों की संख्या में इजाफा होगा और आगामी 15 फरवरी के  बाद राज्य में वरासत से संबंधित एक भी विवाद शेष नहीं रहेगा. इस अभियान के प्रति लोगों के रुझान को देखते हुए ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राज्य के सभी मंडलायुक्तों एवं जिलाधिकारियों को विशेष वरासत अभियान में प्राप्त आवेदनों का शत-प्रतिशत ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन कराने के निर्देश दिएं हुए हैं. उक्त निर्देश देते हुए मुख्यमंत्री ने यह भी कहा था कि राजस्व ग्राम समिति की बैठक के लिए व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए, ताकि इस अभियान में अधिकतम सहभागिता सुनिश्चित की जा सके.


मुख्यमंत्री के इस निर्देश पर राजस्व विभाग के अधिकारियों के विशेष वरासत अभियान के प्रचार प्रचार का कार्य तेज कर दिया है और लेखपाल तथा विभाग के अन्य अधिकारी गांव-गांव पहुंच कर लोगों से आवेदन रहे हैं. राजस्व परिषद के अध्यक्ष दीपक कुमार ने भी वरासत अभियान की समीक्षा करने के बाद सभी मंडलायुक्तों एवं जिलाधिकारियों को वरासत अभियान के तहत प्राप्त हो रहे आवेदनों को तय सीमा में निस्तारित करने को कहा है.


इस अभियान के प्रति सरकार की सक्रियता का ही यह परिणाम है कि राज्य के 1,08,920 राजस्व ग्रामों में निर्विवाद उत्तराधिकारियों को खतौनियों में दर्ज कराने के लिए बड़ी संख्या  में लोग आगे रहे हैं. जिसके चलते गत 15 दिसंबर से अब तक 4,37,840  आवेदन प्राप्त  हुए हैं. जिनमें से 3,68,709 आवेदनों का लेखपाल के स्तर से राजस्व विभाग ने निस्तारित कर दिया हैं.  ग्रामीणों से प्राप्त शेष बचे आवेदनों को भी निस्तारित करने की प्रक्रिया चल रही है. अधिकारियों का कहना है कि राज्य में वरासत संबंधी विवादों को पूरी तरह से खत्म करने के लिए बीते 24 दिनों से पांच चरणों में चलाए जाने जा रहे विशेष वरासत अभियान के तहत गांव-गांव जा कर राजस्व विभाग के लेखपाल तथा अन्य अधिकारी ग्रामीणों से वरासत संबंधी प्रकरणों की जानकारी लेकर उसका निस्तारण कर रहें हैं.


इस विशेष वरासत अभियान को जहां सरकार बहुत महत्व दे रही है, वहीं जनता का  सहयोग भी मिला है. सरकार चाहती है कि वर्षों से लंबित वरासत संबंधी एक भी प्रकरण शेष ना रहे. इसी सोच के तहत 15 दिसंबर से प्रदेश की सभी ग्राम पंचायतों तथा ब्लाकों में विशेष वरासत अभियान चल रहा है. इस अभियान के तहत लोगों को वरासत दर्ज कराने के लिए ऑनलाइन व ऑफलाइन दोनों तरह की सुविधाएं दी गई हैं. जिनकी जमीन गांवों में है लेकिन वह कहीं और रह रहे हैं उनके लिए हर तहसील स्तर पर एक काउंटर भी खोला गया है.


अभियान के तहत लोग ज्यादा से ज्यादा आवेदन करे, इसके तहत हेल्पलाइन नम्बर तथा ई-मेल आईडी की व्यवस्था की गई है. हर आवेदक राजस्व परिषद की हेल्पलाइन तथा मुख्यमंत्री हेल्पलाइन पर सम्पर्क कर विशेष वरासत अभियान के सम्बन्ध में आवश्यक जानकारी प्राप्त कर सके, इसकी भी व्यवस्था की गई है. राजस्व विभाग के अफसरों का दावा है कि 15 फरवरी के बाद राज्य में वरासत संबंधी प्रकरणों का निस्तारण कर दिया जाएगा और ऐसा करने वाला उत्तर प्रदेश देश का पहला राज्य होगा.


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