श्रीलंका में महिंदा राजपक्षे के इस्तीफे के बाद भड़की हिंसा, सत्तारूढ़ पार्टी के MP समेत 4 की मौत

श्रीलंका के प्रधानमंत्री महिंदा राजपक्षे (Shrilanka PM Mahinda Rajapaksa Resigns) ने सोमवार को विपक्ष के दबाव और जनता के प्रदर्शन के कारण अपने पद से इस्तीफा दे दिया. इसके बाद वहां सरकार समर्थकों और विरोधियों के बीच खूब झड़प हुई जिसमें राजपक्षे बंधुओं की सत्तारूढ़ पार्टी के एक सांसद और उनके निजी सुरक्षा अधिकारी (पीएसओ) की मौत हो गई. बताया जा रहा है कि भीड़ ने पूर्व मंत्री जॉन्सटन फर्नांडो के माउंट लाविनिया इलाके में मौजूद आलीशान घर में भी आग लगा दी. उनके परिवार को बमुश्किल बचाया गया. एक सांसद सनथ निशांथा के घर भी आग लगाने की कोशिश की गई. अभी तक की जानकारी के मुताबिक, हिंसा में अब तक कुल चार लोगों की मौत हुई है, जबकि 138 लोग घायल हैं.

श्रीलंका के पूर्व प्रधानमंत्री महिंदा राजपक्षे के उत्तर-पश्चिमी प्रांत के कुरुनेगला शहर में स्थित आवास में सोमवार को आग लगा दी गई थी. यह घटना महिंदा के राष्ट्रपति को अपना इस्तीफा सौंपने के बाद सामने आई. इससे पहले सरकार विरोधी प्रदर्शनकारियों ने श्रीलंका के मोरातुवा मेयर समन लाल फर्नांडो और सांसदों सनथ निशांत, रमेश पथिराना, महिपाल हेराथ, थिसा कुट्टियाराची और निमल लांजा के आधिकारिक आवासों को भी आग के हवाले कर दिया. इंटर-यूनिवर्सिटी स्टूडेंट्स फेडरेशन (आईयूएसएफ) सहित बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी सड़कों पर उतर आए और श्रीलंका पोदुजाना पेरामुना के सांसदों पर हमला कर दिया.

मॉब लिंचिंग के डर से सांसद ने की खुदकुशी
इस हिंसा में सत्ताधारी पार्टी के एक सांसद की भी मौत हो गई. रिपोर्ट्स में सामने आया है कि सांसद ने पहले प्रदर्शनकारियों पर फायरिंग की और फिर मॉब लिचिंग के डर से खुद को गोली मारकर खुदकुशी कर ली. सांसद की मौत के बाद मामले की जांच में जुटी पुलिस ने बताया कि निट्टंबुवा शहर के समीप प्रदर्शनकारियों ने सांसद अमरकीर्ति अथुकोरला की कार को घेर लिया था.

सांसद की गोली से एक प्रदर्शनकारी की मौत
डर के मारे सांसद अमरकीर्ति ने प्रदर्शनकारियों पर गोलियां चला दीं. सांसद की फायरिंग में दो लोग गंभीर रूप से जख्म हो गए. सांसद की गोली से एक घायल ने अस्पताल में दम तोड़ दिया. उग्र भीड़ ने सांसद अमरकीर्ति अथुकोरला को चारों तरफ से घेर लिया. जिसके बाद सांसद ने खुदकुशी कर ली.

कई कार्यालय आग के हवाले
डेली मिरर की रिपोर्ट के अनुसार, यहां तक ​​कि श्रीलंका पोदुजाना पेरामुना (एसएलपीपी) के कुछ कार्यालयों को भी आग के हवाले कर दिया गया. इसके अलावा, वीरकेतिया प्रदेशीय सभा के अध्यक्ष के आवास पर दो लोगों की गोली मारकर हत्या कर दी गई और पांच अन्य घायल हो गए. पूरे देश में कर्फ्यू के बावजूद शांति बनाए रखने के लिए सेना को सड़कों पर तैनात किया गया है.

कैसे भड़क गई हिंसा?

उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री महिंदा राजपक्षे के समर्थकों द्वारा शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे लोगों पर हमला किए जाने के बाद पूरे देश में हिंसा भड़क गई है. लोगों ने राजधानी से लौट रहे राजपक्षे समर्थकों पर गुस्सा उतारा. उन्होंने उनके वाहनों को रोक लिया और कई शहरों में उन पर पर हमला किया. महिंदा राजपक्षे ने राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे के कार्यालय के सामने अपने समर्थकों द्वारा सरकार विरोधियों पर हमला किए जाने के कुछ घंटे बाद अपने पद से इस्तीफा दे दिया.

घटना के बाद राष्ट्रव्यापी कर्फ्यू लगा दिया गया है और राजधानी में सेना तैनात कर दी गई है. उल्लेखनीय है कि ब्रिटेन से वर्ष 1948 में आजादी मिलने के बाद से अब तक के समय में श्रीलंका अपने सबसे बुरे आर्थिक दौर से गुजर रहा है. यह संकट विदेशी मुद्रा भंडार की कमी से उत्पन्न हुआ है जिसका अभिप्राय है कि देश खाद्यान्न, ईंधन के आयात के लिए भुगतान नहीं कर सकता. 9 अप्रैल से पूरे श्रीलंका में हजारों प्रदर्शनकारी सड़कों पर हैं, क्योंकि सरकार के पास आयात के लिए धनराशि खत्म हो गई है. आवश्यक वस्तुओं की कीमतें आसमान छू रही हैं.

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