Monkeypox Virus: क्या है मंकीपॉक्स? जिसने यूरोप से इजराइल तक मचा रखी है तबाही, जानें लक्षण और बचाव

दुनिया अभी कोरोना की मार से उबर भी नहीं पाई है कि अब मंकीपॉक्स (Monkeypox) ने दस्तक दे दी है. यह वायरल इंफेक्शन यूरोप में तेजी से फैल रहा है लेकिन अच्छी बात यह है कि भारत में एक भी केस नहीं है. रिपोर्ट्स के मुताबिक Monkeypox का पहला मामला साल 1970 में कॉगो में पाया गया था. एक्सपर्ट बताते हैं कि आमतौर पर यह वायरस एक खास प्रजाति के बंदर को प्रभावित करता है. लेकिन इंसानों में इसका पाया जाना हैरत की बात है. विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इस पर चिंता जाहिर की है.

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने बताया कि पिछले 10 दिनों में ही अब तक 12 देशों में मंकीपॉक्स के मरीज मिल चुके हैं. 92 मरीजों में इस वायरस की पुष्टि हो चुकी है. WHO ने आशंका जताई है कि अभी इसके मरीजों की संख्या में बढ़ोतरी हो सकती है. WHO के मुताबिक ये बेहद असामान्य है कि मंकीपॉक्स के मरीज ऐसे देशों में मिल रहे हैं, जहां पहले कभी ये बीमारी नहीं फैली. मंकीपॉक्स प्रभावित इलाकों की यात्रा न करने वालों में ये वायरस मिला एक बहुत ही असामान्य बात है. समलैंगिक पुरुषों में भी इसके केस मिल रहे हैं. इसे देखते हुए डब्लूएचओ ने निगरानी बढ़ाने की बात कही है.

क्या है मंकीपॉक्स और कहां से आया?
मंकीपॉक्स एक ऐसा वायरस है जो कि आम तौर पर जंगली जानवरों में पाया जाता है. हाल ही में इसके कई मामले विदेशों में देखे गए हैं. डबल्यूएचओ के अनुसार इस बीमारी की पहचान पहली बार साल 1958 में हुई थी. उस वक्त कुछ बंदरों पर रिसर्च किया जा रहा था रिसर्चर के मुताबिक बंदरों में चेचक जैसी बीमारी हुई थी, जिसके बाद इसे मंकीपॉक्स का नाम दे दिया गया. डबल्यूएचओ के मुताबिक इस बीमारी का मनुष्यों में पहली बार संक्रमण 1970 के दशक में हुआ था. इस दौरान कांगों में एक 9 साल के बच्चे को सबसे पहले यह बीमारी हुई थी. विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक मंकीपॉक्स किसी संक्रमित जानवर के काटने या उसके खून या फिर उसके फर को छूने से हो सकता है. ऐसा माना जाता है कि यह चूहों, चूहों और गिलहरियों द्वारा भी बड़ी तेजी के साथ फैलता है.

मंकीपॉक्स के लक्षण
मंकीपॉक्स के लक्षणों की बात करें तो मंकीपॉक्स होने के सप्ताह भर के अंदर संक्रमित व्यक्ति बुखार, शरीर में दर्द, ठंड लगना और थकान जैसे लक्षण का अनुभव करते हैं. कई गंभीर मामलों में लोगों के चेहरे और हाथों पर दाने और घाव भी हो सकते हैं जो कि शरीर के अन्य भागों में भी फैल सकते हैं, इसलिए ऐसा कोई भी लक्षण दिखे तो डॉक्टर से संपर्क जरूर करें.

मंकीपॉक्स से संबंधित इलाज
लक्षण दिखने के बाद मंकीपॉक्स आमतौर पर 5 से 20 दिनों के बीच ठीक हो जाता है. इस मामले में ज्यादातर लोगों को अस्पताल में भर्ती नहीं किया जाता है, लेकिन डबल्यूएचओ के मुताबिक 10 में से एक व्यक्ति के लिए मंकीपॉक्स घातक हो सकता है और बच्चों के केस में इसे गंभीर माना जाता है. ऐसे में इससे सावधान रहना बेहद जरूरी है. स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक चेचक के टीकों का मंकीपॉक्स पर भी प्रभाव रहता है, फिलहाल मंकीपॉक्स को लेकर एंटीवायरल दवाएं भी विकसित की जा रही हैं.

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