अवैध मस्जिद ढहाने वाले चर्चित IAS दिव्यांशु पटेल का बढ़ा कद, आउट ऑफ टर्न प्रमोशन देकर CM योगी ने जताया कार्यशैली पर भरोसा

उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले में अवैध मस्जिद गिराकर चर्चा में आए आईएएस दिव्यांशु पटेल (IAS Divyanshu Patel) पर योगी आदित्यनाथ सरकार ने भरोसा जताया है. उन्नाव में बतौर सीडीओ तैनात दिव्यांशु पटेल (Unnao CDO Divyanshu Patel) को राज्य सरकार ने आउट ऑफ टर्न प्रमोशन देकर पीठ थपथपाई है. दिव्यांशु को अब शुक्लागंज उन्नाव विकास प्राधिकरण का भी चार्ज मिला है. वैसे आमतौर पर जिले में विकास प्राधिकरण का अतिरिक्त चार्ज डीएम के पास ही रहता है, लेकिन योगी सरकार ने सीडीओ दिव्यांशु पटेल को आगे करके ये परंपरा तोड़ दी है. दिव्यांशु पटेल यूपी के पहले सीडीओ हैं जिनके पास वीसी का अतिरिक्त चार्ज है.

2017 बैच के आईएएस दिव्यांशु पटेल हाल ही में तब चर्चा में आए थे जब विधानसभा चुनाव परिणाम के दौरान उन्हें और उनके परिवार को धमकियां मिली थीं. हार से बौखलाए कुछ दलों के कार्यकर्ताओं ने सीडीओ पर झूठे आरोप लगाकर उन्हें दबाने के लिए जान से मारने की बात कही थी. तब जवाब में सीडीओ ने धमकाने वालों के लिए अपना आवास फूलों से सजाकर प्यार का पैगाम भेजा था. लेकिन आज योगी सरकार ने दिव्यांशु पटेल का कद बढ़ाकर साफ संदेश दिया है कि मौजूदा सरकार में केवल कानून का राज होगा और शासन की मंशा के अनुरूप काम करने वाले प्रशासनिक अफसरों के उत्साहवर्धन में सरकार पीछे नहीं रहेगी.

विकास कार्यों को लेकर सुर्खियां बटोरते हैं दिव्यांशु

दिव्यांशु पटेल अपने विकास कार्यों के लिए अक्सर सुर्खियां बटोरते हैं. फिर बात चाहें बाराबंकी में तहसील के रिनोवेशन का कार्य हो या ब्लॉकों के सुंदरीकरण का दिव्यांशु ने जिस कार्य की जिम्मेदारी संभाली उसे बखूबी अंजाम तक पहुंचाया. दिव्यांशु ने सभी ब्लॉकों में सरदार पटेल, वीर शिवाजी और स्वामी विवेकानंद की मूर्तियां भी लगवाई हैं, जिसने इन महान हस्तियों का मान बढ़ाने का काम किया तथा लोगों को इनसे प्रेरित होने का अवसर प्रदान किया है.

अवैध मस्जिद ढहाने पर मिली थी खूब सराहना 

यूपी के बलरामपुर में एमएलके महाविद्यालय के संस्कृत विभाग में कार्यरत एसोसिएट प्रोफेसर डा. एपी वर्मा के बेटे दिव्यांशु पटेल साल 2017 में 204 रैंक हासिल कर IAS बने थे. दिव्यांशु राष्ट्रीय पटल पर पहली बार चर्चा में तब आए जब करीब दो महीने पहले उन्होंने बाराबंकी में एक अवैध मस्जिद को गिराया था. दिव्यांशु तब बतौर एसडीएम चार्ज संभाल रहे थे. इस कार्रवाई को लेकर सोशल मीडिया पर उन्हें खूब जनसर्मथन मिला था.

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कौन हैं दिव्यांशु पटेल

बलरामपुर के रहने वाले दिव्यांशु पटेल के पिता डा. एपी वर्मा एमएलके महाविद्यालय के संस्कृत विभाग में बतौर एसोसिएट प्रोफेसर कार्यरत हैं. दिव्यांशु पटेल साल 2017 में 204 रैंक हासिल कर आईएएस बने थे. दिव्यांशु ने अपनी प्रारम्भिक शिक्षा बलरामपुर माडर्न इण्टर कालेज से प्राप्त की. एमएलके कालेज से बीए की परीक्षा उन्होंने सर्वोच्च अंक प्राप्त कर पास की.

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इसके बाद दिल्ली विश्वविद्यालय से वर्ष 2010 में बीएड, वर्ष 2011 में एमएड व जेएनयू से परास्नातक किया. फरवरी 2011 में माता के देहांत के बाद भी उन्होंने हौसला नहीं खोया. समाज शास्त्र में जेआरएफ उत्तीर्ण हुए. साल 2012 में दिव्यांशु का चयन असिस्टेंट कमाडेंट सीआरपीएफ के रूप में हुआ था, लेकिन उन्होंने अपने लक्ष्य को हासिल करने के लिए उसे तरजीह नहीं दी.

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IAS बनने के लिए गुरू को दिया क्रेडिट

दिव्यांशु का कहना है कि अगर आज वह आईएएस बने हैं तो उसके पीछे उनके गुरू डॉ माधवराज द्विवेदी का बड़ा योगदान है. उनका कहना है कि गुरूजी ने कक्षा 10 से एक अभिभावक की तरह उनका मार्गदर्शन किया है. कहां पढ़ना है, क्या विषय लेने हैं, कैसे करना है बारीक-बारीक चीजों पर भी माधवराज द्विवेदी उन्हें लगातार गाइड करते रहे. दिव्यांशु ने बताया कि कहना है कि उनका नाम ‘दिव्यांशु’ भी गुरू जी की ही देन है, यह नामकरण उन्होंने ही किया. आज वे जो भी हैं अपने गुरू डॉ माधवराज द्विवेदी की वजह से ही हैं.

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