देश की सर्वोच्च अदालत की संवैधानिक पीठ ने केरल के प्रसिद्ध सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश पर लगी रोक को गलत माना है। पीठ का कहना है कि मंदिर एक पब्लिक प्लेस है और हमारे देश में प्राइवेट मंदिर का कोई सिद्धांत नहीं है। यह पब्लिक प्लेस है और सार्वजनिक जगह पर यदि पुरुष जा सकते हैं तो महिलाओं को भी प्रवेश की इजाजत मिलनी चाहिए। जानिए, क्या है सबरीमाला मंदिर का धार्मिक महत्व और क्या हैं इस मंदिर में महिलाओं के प्रवेश से जुड़े नियम-कायदे… सबरीमाला मंदिर में 10 से 50 साल तक की उम्र की महिलाओं को प्रवेश की अनुमति नहीं है। इतना ही नहीं जिन महिलाओं को मंदिर में प्रवेश की अनुमति है, उन्हें भी अपने साथ आयु प्रमाणपत्र ले जाना होता है। चेकिंग के बाद ही उन्हें अंदर जाने की अनुमति दी जाती है। इंडियन यंग लॉयर्स असोसिएशन ने एक जनहित याचिका दायर कर सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश की इजाजत मांगी थी।.
करेल की राजधानी तिरुवनंतपुरम से करीब 175 किलोमीटर की दूर स्थित है पंपा क्षेत्र। पंपा से करीब 5 किलोमीटर की दूरी पर लंबी पर्वत श्रृंखला और घने वन हैं। इसी वन क्षेत्र में स्थित है सबरीमाला मंदिर। यह पत्तनमत्तिट्टा जिले के अंतर्गत आता है। पंपा से सबरीमाला मंदिर तक पैदल यात्रा करनी होती है। मक्का-मदीना के बाद यह दुनिया का दूसरा ऐसा तीर्थ माना जाता है, जहां हर साल करोड़ो श्रद्धालु आते हैं। इस मंदिर का असली नाम सबरिमलय है। मलयालम भाषा में पर्वत को शबरीमला कहा जाता है। यह मंदिर करीब 18 पहाड़ियों के बीच स्थित है और इसी आधार पर इसका नाम सबरिमलय रखा गया।
यह मंदिर अय्यपन देव को समर्पित है। कंब रामायण, महाभागवत के अष्टम स्कंद और स्कंद पुराण जैसे धार्मिक ग्रंथों में शिशु शास्ता का उल्लेख मिलता है, अय्यपन उसी के अवतार माने जाते हैं। शास्ता का जन्म भगवन विष्णु की अवतार मोहिनी और शिव के समागम से माना जाता है।
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